काव्य: पुनीता जैन

पुनीता जैन

बात क्या है

औंधे मुँह सोए हैं शब्द
झकझोरती हूँ
उठो  / जागो
कितने काम सर पर हैं
उठो  / लड़ो
कितनी लड़ाइयाँ हैं तुम्हारे भरोसे

टूटती नहीं ऊँघ शब्द की
रेशमी चादर ओढ़े
गहरी नींद में हैं
क्या लड़ना चाहते नहीं ये !

असमंजस कि असहाय हैं
संशयग्रस्त कि क्षीणकाय हैं
बात क्या है !
बाहर शोर गहरा
और ये नींद में हैं !
-----

लौटना इस तरह

ऐसी उड़ानों में
डैनों की जरूरत ही कब होती है !
धरा रहता सब
धरा पर
उड़ती हूँ / तो बस उड़ती हूँ

पहुँचती हूँ जब सूरज तक
धकेल देता बरबस वह
पृथ्वी के आंगन की साधारणता में

कहते हुए
जाओ गुनगनी धूप सेंको
मेरी भाषा का अर्थ
जला देगा तुम्हे ........ !
-----

आसान नहीं

भोपाल से दिल्ली
राज्य की राजधानी से
देश की राजधानी का सफर
रेंगती ट्रेन करती प्रवेश

कचरे से अँटा
दिल्ली द्वार निजामुद् दीन

आसान नहीं
भर लेना जेहन में
तीखी दुर्गन्धयुक्त हवा

आसान नहीं
दिल्ली को जगह देना
अपने रक्त में
-----

कामकाजी एक दिन

वह अधनींद जागी
दाँत माँजे बगैर / चाय चूल्हे पर चढ़ाई
सब्जी रोटी बनाई
दाल स्थगित कर दी
बच्चे ने किस रंग के कपड़े पहने / नहीं पता
रसोई से ही ऊंची आवाज लगा / विदा किया

नहाई बिना कोहनी एड़ी साफ किए
कपड़ा इस्त्री किया
ज्यों त्यों तन पर धर दिया
रोटी चार बार चबाई
फिर पानी संग गटक लिया

तेजी से गाड़ी चलाई
हर बार ब्रेक लगा संग-संग बडबड़ाई
नौकरी की
थकी / लौटी/ फिर घर में की
जरा सी बात पर घर भर पर चिड़चिड़ाई
बच्चों पर प्यार नहीं हिदायतें लुटाई
जल्दी से झप्पी दे
बिस्तर पर लौट आई

लिखूंगी अपनी
दिनचर्या गाथा!
यह सोच उसने छुटटी की अर्जी लगाई!
-----

मृत्यु

कुछ नहीं तुम!

भय चिंताओं में
अकारण उपस्थित

श्वासों के आवागमन
पलकों के निपात सी
सहज / अनिवार्य

रात की गहन नींद तुम!
नमक भर उनींदा जीवन स्पर्श लिए!
या कि
गहन निश्चेतना एक / अननुभूत!
जिसके उस पार / विराट शून्य अदृष्ट

नहीं / कुछ नहीं तुम ...

विलुप्ति के प्रकृत नियम
अनंत रात्रि की अनंत नींद तुम!

No comments :

Post a Comment

We welcome your comments related to the article and the topic being discussed. We expect the comments to be courteous, and respectful of the author and other commenters. Setu reserves the right to moderate, remove or reject comments that contain foul language, insult, hatred, personal information or indicate bad intention. The views expressed in comments reflect those of the commenter, not the official views of the Setu editorial board. प्रकाशित रचना से सम्बंधित शालीन सम्वाद का स्वागत है।