लघुकथा: कोंपल फिर इतराई

विभा रश्मि

विभा रश्मि


सर्दी की विदाई के साथ पतझड़ का अवसाद झेल  रही  प्रकृति अब परिंदों के कलरव से गूँज उठी थी।

झील के पानी में उनका किलोल केया मुग्ध होकर देख रही थी ।
मेहमान परिन्दों ने मीलों की दूरी छोटे - छोटे पंखों से तय कर, झीलों और राष्ट्रीय उद्यानों के  दरख्तों पर अपना आश्रय बना लिया था ।

सूनी शाखाओं पर नव - कोपलें देख केया खुशी से चीख़  पड़ी - " देखो शिशिर, उजाड़ पेड़ों पर नई कोपलें ।"
पतझड़ में उजड़ी शाखाएँ पुनः आबाद हो चली थीं। देखो न बसंत आ गया है।" केया बच्चों की तरह चहक रही  थी।
शिशिर ने केया का हाथ थामकर उसे अभ्यारण्य की एक बेंच पर बैठा दिया था।
कुदरत को वासंती चोला बदलता देख केया की आँखें खुशी से चमक रही  थीं।
"वो देखो  सफ़ेद सारस का जोड़ा।"
"हाँ, वो "साइबेरियन क्रेन " यानी सारस हैं। पहले बहुत आते थे, इस बार गिने - चुने ही आए हैं।"
"वो  फ़ौव्वारे के पास झाड़ पर बड़ी चोंच वाला  नीला पक्षी, क्या नाम बताया था तुमने  ? "
"वो किंगफिशर है।"
"पति के  पक्षीविद होने का तुम्हें तो बहुत लाभ है, है न केया?"
केया पिछले दुःख भूलकर नये पक्षियों के आगमन का स्वागत  प्रसन्नता से  कर रही थी।
" ये 'मेहमान पक्षी '  फरवरी के बाद, मार्च में अपने देश लौटेंगे। किसी का परिवार अधूरा होगा, कोई नन्हें चूज़े - चिकले  लेकर जाएगा।
"चलो, तुम्हें कुछ परदेसी पक्षियों के घोंसले और उनमें सहेजे अंडे दिखला दूँ।"
केया ने उमंगित होकर  हाँ भर दी। फिर कुछ सोचते हुए  गंभीर होकर, अचानक एक स्थान पर ठिठक कर रुक गई।
"रहने दो शिशिर, माँ कहती थी कि अगर इंसान पक्षियों के अंडों को छू लेता है  तो पक्षी उन्हें नहीं सेते, वे अपने बच्चों को भी नहीं  अपनाते । "
"ओह!" ये शिशिर के लिए नई जानकारी थी।
" प्लीज़!  छूना मत, अपनी ममता मारनी पड़ेगी फिर बेचारी मादा को।"
केया  भावुक हो गई थी।
तभी सारे पखेरू एक साथ चहचहाहट बिखेरने लगे।
दोनों का ध्यान झील में उनकी किलोल की ओर आकर्षित हो गया।
"आओ न इधर, केया।"
केया बेंच पर बैठ चुकी थी। उसने अपने उदर पे हथेली रख दी थी।
" शिशिर, छूकर देखो यहाँ ... अपना शिशु भी खुश है,  हलचल हो रही है ...।"
शिशिर 'बर्डवाच'  करना छोड़ केया के निकट दम साधे खड़ा था। उसकी हथेली केया ने अपने उदर  पर  रखवा रखी  थी।
गर्भस्थ शिशु का  इतराना महसूसकर दोनों के अधरों पर  मुस्कान बिखर  गई थी।
क्यारियों में रंगबिरंगे फूलों ने  दोनों के  जीवन में भी वसंत -  ॠतु की छटा बिखेर दी थी।

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