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लघुकथा के इतिहास में मील का पत्थर: दस्तक

समीक्षक: राम सिंह 'साद'


पुस्तक: दस्तक (लघुकथा संकलन), 
प्रथम संस्करण: 2022 
सम्पादक: डॉ. दिनेश पाठक 'शशि' एवं आचार्य नीरज शास्त्री 
प्रकाशक: एक्सप्रेस पब्लिशिंग नम्बर-8, 3, क्रॉस स्ट्रीट, चेन्नै 60004 
ISBN: 979888749529-3 
मूल्य-₹ 210/, पृष्ठ संख्या 165

लघुकथा संकलन 'दस्तक' में लघुकथा से जुड़े वरिष्ठ एवं नवोदित 64 लघुकथाकारों की 82 लघुकथाएँ संकलित हैं। साथ ही इसमें लघुकथा विधा पर प्रकाश डालते चार आलेख भी समाहित हैं। श्री सुकेश साहनी द्वारा लिखित 'कहानी का बीज रूप नहीं है: लघुकथा, श्री रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु' द्वारा लिखित 'लघुकथा: कुछ अनुत्तरित प्रश्न, डॉ. सुरेन्द्र गुप्त द्वारा लिखित आधुनिक लघुकथा अपने तेवर बदल रही है' तथा श्री अशोक भाटिया का आलेख 'लघुकथा और 'शास्त्रीय सवाल' चारों आलेख जहाँ लघुकथा के संदर्भ में विषद और विस्तृत जानकारी प्रस्तुत करते हैं, वहीं नए लघुकथाकारों को प्रेरणा भी देते हैं।

राम सिंह 'साद'
उपरोक्त आलेखों से यह भी पता चलता है कि आज की इस सामर्थ्यवान विधा का इतिहास लगभग 150 वर्ष पुराना है। यह कृति यह भी उद्घाटित करती है कि भारतेन्दु हरिश्चन्द्र पहले लघुकथाकार हैं। लघुकथा न्यूनतम शब्दों में बड़ी से बड़ी बात कहने में समर्थ होती है। इसमें लक्षणा और व्यंजना की प्रधानता रहती है। लघुकथा का उद्देश्य सत्य को उद्घाटित करते हुए विद्रूपताओं पर-प्रहार करना होता है।

      इसी उद्देश्य की पूर्ति एवं नवीन लघुकथाकारों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से वर्तमान हिंदी साहित्य के दो आलोकित नक्षत्र क्रमश: डॉ. दिनेश पाठक 'शशि' जी एवं आचार्य नीरज शास्त्री जी ने इस संकलन को सम्पादित कर लघुकथा के विकास में एक और मील का पत्थर स्थापित किया है।

      इस संकलन में शामिल सभी लघुकथाकारों ने अपनी प्रतिनिधि  लघुकथाएँ  देकर इस रस कलश को भरा है। कुछ लघुकथाएँ  अत्यन्त उत्कृष्ट हैं जो पाठक के मन-मस्तिष्क पर छा जाती हैं। इनमें श्रीमती आशा शैली की 'धरना और खेत', श्री अनुराग शर्मा की 'कौमी एकता', संतोष श्रीवास्तव की 'उषा की दीवाली, आचार्य नीरज शास्त्री (सम्पादक) की 'विद्रोह की सजा', डॉ. अम्बुजा मलखेड़कर की 'स्वच्छ दीपावली स्वस्थ दीपावली', डॉ. रवि शर्मा 'मधुप' की त्यागपत्र', भगवती प्रसाद द्विवेदी की 'इण्डेन एक्सप्रेस एवं न्यूट्रॉन बम', सिद्धेश्वर की 'हरामखोर', श्रीमती राशि पाठक की 'संगति का असर', उषा सोमानी की 'रिश्तों की मिठास' इंजी. अरुण जैन की 'कोयले की खदान', श्री सीताराम गुप्ता की अवलंबन श्रीमती मालती बसंत की 'दर्द की दवा', श्री सत्येन्द्र सिंह की 'ट्यूब लाइट', श्रीमती गिरिजा कुलश्रेष्ठ की 'कितनी पास कितनी दूर' , मिन्नी मिश्रा की 'मेहनत की रोटी ', श्री दिलीप भाटिया की 'पिक नहीं ली', सुशील चावला की 'अकड़ी हुई गर्दन', डॉ. दिनेश पाठक 'शशि' (सम्पादक) की 'सत्य का बोध' तथा डॉ. जवाहर 'धीर' की 'लॉक डाउन' पूर्ण समर्थ एवं पाठक के हृदय पर दस्तक देती लघुकथाएँ हैं।
इसी प्रकार श्री अशोक कुमार मिश्र की लघुकथा 'आँखें', डॉ त्रिलोक सिंह ठकुरेला की "हरा दुपट्टा', श्री अखिलेश श्रीवास्तव 'चमन' की 'गुरुमंत्र' श्रीमती कल्पना 'मनोरमा' की 'पीली चिड़िया',  डाँ शैलेश गुप्ता 'वीर' की 'दोहरे मापदंड', श्रीमती नीलम राकेश की 'मिलावट', श्रीमती शशि श्रीवास्तव की 'बँटवारे का दर्द', डॉ. अमिता दुबे की 'भगवान का रूप' वर्तमान समस्याओं पर चोट करती श्रेष्ठ लघुकथाएँ हैं।

डॉ. शील कौशिक की लघुकथा 'बदलती प्रश्नावली' एवं श्रीमती कान्ता राय की 'अस्तित्व की यात्रा, डॉ. कमलेश भारतीय की लघुकथा 'बहुत दिनों के बाद तथा डॉ० विष्णु शास्त्री 'सरल' की लघुकथा 'सम्बन्धों की छाया' भी उल्लेखनीय हैं।
      
कुल मिलाकर प्रस्तुत संकलन सम्पादकद्वय डॉ० दिनेश पाठक 'शशि' जी तथा आचार्य नीरज शास्त्री जी के प्रयासों का सुफल है। आकर्षक आवरण की रचना श्री अनुज अनुभव के द्वारा की गई है। इस प्रकार यह संकलन 165 पृष्ठों का सुंदर ग्रंथ है। 
      
यह पुस्तक लघुकथा के इतिहास में एक और मील का पत्थर है। अत: यह संकलन पठनीय और संग्रहणीय है। इस संकलन हेतु मैं सभी रचनाकारों सहित सम्पादक द्वय को बधाई देता हूँ।
***

राम सिंह 'साद'
88, प्रभुनगर, लाजपत नगर, एन. एच-2, मधुरा 201004
चलभाष: 97600 35037
 

1 comment:

  1. वाह! बहुत सुंदर! आदर्श समीक्षा हेतु श्री राम सिंह 'साद'जी का हार्दिक आभार। प्रकाशन हेतु सेतु परिवार को साधुवाद।
    आचार्य नीरज शास्त्री

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