प्रवासी हिंदी साहित्य शोध अनुभाग

अंतरराष्ट्रीय हिन्दी समिति की पत्रिका विश्वा के प्रधान सम्पादक श्री रमेश जोशी की पहल पर प्रवासी हिंदी साहित्य शोध की दिशा में इस नये प्रयास के लिए मुद्रित शोध, सन्दर्भ सामग्री के रूप में आपका समर्थन और सहयोग अपेक्षित हैं। - सम्पादक

महाकवि गुलाब खंडेलवाल स्मृति 'प्रवासी हिंदी साहित्य शोध अनुभाग' का शुभारम्भ 

देश में हजारों-लाखों विद्यालयों और संस्थानों में हिंदी-दिवस और पखवाड़ा मनाए जा रहे हैं लेकिन सीकर (राजस्थान ) में इस अवसर पर एक विशेष उपक्रम का शुभारम्भ हुआ- महाकवि गुलाब खंडेलवाल स्मृति 'प्रवासी हिंदी साहित्य शोध अनुभाग' ।

भारत मूल के लाखों लोग दुनिया के विभिन्न भागों में फैले हुए हैं जिनमें सैंकड़ों उच्चकोटि के रचनाकार भी हैं। भारत मूल के विद्याधर सूरजप्रसाद नायपाल को तो नोबल पुरस्कार भी मिल चुका है। भारत से बाहर भी भारत मूल के हिंदी के बहुत से ऐसे साहित्यकार हैं जो भारत की केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा सम्मानित और पुरस्कृत हो चुके हैं।  जिन पर भारत में कई शोध हो चुके हैं। अब भी बहुत से शोधार्थी प्रवासी हिंदी साहित्यकारों पर शोध करना चाहते हैं किन्तु प्रवासी साहित्यकारों और उनके साहित्य की पूरी जानकारी के अभाव में उन्हें कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

सीकर (राजस्थान ) के राजकीय पुस्तकालय के हिंदी पखवाड़े के दौरान अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति की इस पत्रिका 'विश्वा' के प्रधान संपादक श्री रमेश जोशी राजकीय जिला पुस्तकालय, सीकर में पधारे। उनके सामने जब इस समस्या पर चर्चा हुई तो उन्होंने पुस्तकालय में महाकवि गुलाब खंडेलवाल स्मृति 'प्रवासी हिंदी साहित्य शोध अनुभाग' का शुभारम्भ करने का निर्णय लिया।

18 सितम्बर 2017 से विधिवत इस अनुभाग का प्रतीकात्मक शुभारम्भ कर दिया गया है। इसके लिए उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति के त्रैमासिक पत्र 'विश्वा' के 2012 से 2017 तक के अंकों का एक सेट पुस्तकालयाध्यक्ष श्री चन्द्रसिंह को भेंट किया गया। विश्वास है कि नवम्बर 2017 तक पर्याप्त सामग्री जुटाकर इसका विधिवत लोकार्पण कर दिया जाएगा।


 भारत में प्रवासी हिंदी साहित्यकारों पर शोध करने के लिए एक स्थान पर ही समस्त सामग्री उपलब्ध कराने का यह पहला प्रयास है। अब शोधार्थी, महाविद्यालय और विश्वविद्यालय अपनी इससे संबंधित आवश्यकताओं के लिए राजकीय पुस्तकालय, सीकर (राजस्थान) और रमेश जोशी से संपर्क कर सकते हैं।

पुस्तकालयाध्यक्ष, सीकर (राजस्थान )  - librarysikar@gmail.com
रमेश जोशी, प्रधान संपादक 'विश्वा' -joshikavirai@gmail.com

(प्रस्तुति: भारती मिश्र)

1 comment :

  1. सार्थक प्रयास हेतु बधाई !
    ~ लावण्या दीपक शाह

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