सेतु प्रथमांक दो शब्द - जून 2016

साथियों,


आज हम एक अत्यंत रोचक समय में जी रहे हैं। मानव को चाँद पर पहुँचे हुए 46 वर्ष हो चुके हैं, छापेखाने की खोज को 575 साल और रेडियो प्रसारण को भी अच्छा खासा समय बीत चुका है। पहले दूरदर्शन और फिर इंटरनैट तथा ई-प्रकाशन के युग में भी आज तक पत्र-पत्रिकाओं का महत्व कम नहीं हुआ, बल्कि पठन-पाठन की ओर जनता का रुझान बढता ही दिख रहा है। इंटरनेट तथा अन्य संचार माध्यमों के द्वारा संसार भर के रचनाकारों, पाठकों, प्रकाशकों, वितरकों, और विशेषज्ञों को एक दूसरे के निकट आने का अवसर मिला है। 

आश्चर्य की बात है कि पाठक वर्ग की निरंतर होती वृद्धि और अभिव्यक्ति के नित नये साधनों के बावजूद, आज अच्छी पठन सामग्री में कमी आ रही है। विशेषकर हिंदी के क्षेत्र में कुछ दशक पहले की धर्मयुग, साप्ताहिक हिंदुस्तान, सर्वोत्तम जैसे स्तर की पत्रिकायें आज देखने को भी नहीं मिलती हैं।
Introducing Setu - Anurag Sharma
डॉ सुनील शर्मा की प्रेरणा, दीपक मशाल का सहयोग और संसार के विभिन्न छोरों पर बैठे हुए कुछ दृढप्रतिज्ञ मित्रों की शुभकामनाओं द्वारा आज हम उच्चस्तरीय पत्रकारिता की परम्परा को जीवित रखने के इस नये प्रयास को आपकी सेवा में समर्पित कर रहे हैं। आशा है आपको पसंद आयेगा। अपनी प्रतिक्रिया से हमें अवगत कराते हुए हमारा उत्साह बढाने के साथ-साथ हमारी कमियों के बारे में भी हमें बताते रहिये ताकि हमारा मनोयोग सार्थक हो।