मनीषा अमोल (प्रतिनिधि कवयित्रियाँ 2020)

मनीषा अमोल ने दिल्ली विश्वविद्यालय से अपनी उच्च स्तरीय शिक्षा प्राप्त की और ।MT ग़ाज़ियाबाद से MBA की डिग्री लेकर मार्केटिंग में अलग अलग निजी कम्पनियों में कार्यरत रहीं। आजकल निदेशक के पद पर कार्यरत हैं। उन्हें प्रशासनिक कार्य करने के लिए कई सम्मान प्राप्त हुए। साहित्य में रुचि रखती हैं और पिछले एक वर्ष से पूर्ण रूप से इसी में संलग्न हैं। ऑनलाइन साहित्य संगठनों से भी जुड़ी हुई हैं। कविताएँ (हिंदी और अंग्रेज़ी), ग़ज़ल और लघुकथाएँ लिखती हैं, पर कविताओं में ख़ास रुचि रखती हैं।


मनीषा अमोल
प्रेरणा

अत्यंत प्रेरणा मिलती है-
उन पतझड़ के पेड़ों से,
ज्येष्ठ की गर्मी में जो कुम्हला जाते,
आभा भी धूमिल हो जाती,
दरख़्त वीराने से हो जाते,
पर वो हिम्मत कभी न हारते,
छोटे हरे कोमल पत्तों के फूटने का,
उसी इंतज़ार में अपने दिन गुज़ारते,
जब शजर नये पत्तों से लद जाता,
क्या अद्भुत नज़ारा है होता,
मानो जैसे एक नयी शुरुआत हो।

उन बहती ठंडी हवाओं से,
अपने आग़ोश में लिए,
उन मंडराते काले घने बदलों को,
पहुँचा जाते उस सूखी धरती के ऊपर,
जहाँ बरस जाता तेज़ मूसलाधार पानी,
बुझ जाती धरती की प्यास,
उग आती नयी फ़सल,
मानो हमारे लिए कोई उपहार हो।

उन अविरल बहती नदियों से,
निर्मलता की ओढ़े चादर,
समेट कर सारी गंदगी और अशुद्धता,
बिना किसी शिकवा या शिकायत,
मिटा देती अपना अस्तित्व,
और जा मिलती समंदर में,
मानो हमारे लिए एक संदेश हो।

प्रकृति अत्यंत प्रेरणा स्रोत है,
बस अपनी सोच की आँखें खोलनी हैं।

No comments :

Post a Comment

We welcome your comments related to the article and the topic being discussed. We expect the comments to be courteous, and respectful of the author and other commenters. Setu reserves the right to moderate, remove or reject comments that contain foul language, insult, hatred, personal information or indicate bad intention. The views expressed in comments reflect those of the commenter, not the official views of the Setu editorial board. प्रकाशित रचना से सम्बंधित शालीन सम्वाद का स्वागत है।