हिमाद्री वर्मा डोई (प्रतिनिधि कवयित्रियाँ 2020)

इतिहास विषय में एम.ए. हिमाद्री वर्मा डोई हिंदी भाषा में कविता, गीत, गजल, लघु कथा, कहानी एवं उपन्यास लेखन करती हैं। लेखन के अतिरिक्त गायन एवं चित्रकारी का भी शौक रखती हैं। अभी तक आपकी 5 पुस्तकें प्रकाशित हुई हैं जिनमें से चार काव्य हैं और एक उपन्यास है। दूरदर्शन में भी आपकी सभी पुस्तकों की चर्चा हुई है। इनके साहित्य लेखन का उद्देश्य समाज में सकारात्मक एवं प्रेरणात्मक सोच का संचार करना है एवं नारी विमर्श के विभिन्न पहलुओं को उजागर कर मेरे सपनों की दुनिया से पाठकों को रूबरू कराना है।

हिमाद्री वर्मा डोई
मन की मजबूती 

मन की मजबूती गगनचुंबी होती
बुलंदी छूने को प्रयासरत ये रहती
हताशा निराशा से कोसों दूर होती
उन्मुक्त गगन में मुक्त मुक्त विचरती, फिर
रजिया सुल्तान शख्सियते-हिंद बन निखरती

हाँ, मन की मजबूती गगनचुंबी होती

भय के साए से कभी नहीं ये डरती
आशाओं के झूले में हर पल सवार ये रहती
शक-शुबहा से मुक्त मुक्त प्रसन्न चित्त रहती
लक्ष्मीबाई सी सौगात धरा को आजाद ये करती

हाँ, मन की मजबूती गगनचुंबी होती

मन से जीत जाती और मंजिलों को पाती
सपनों के जहान को हर बार साकार करती
सार्थक कर जीवन मंद मंद मुस्कुराती
जौहर की अग्नि से तप पद्मिनी बन निखरती
हाँ, मन की मजबूती गगनचुंबी होती

मुकद्दर स्वयं का स्वयं ही लिखती
हाथ की लकीरों के सहारे नहीं
कर्म पथ पर पग पग ये चलती
द्रौपदी की लाज कौरवों का काल लिखती

हाँ मन की मजबूती गगनचुंबी होती।

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