"हिंदी मेरी पहचान"आरंभिक चैरिटेबल फाउंडेशन का आयोजन

 व्हाट्सएप, फेसबुक आदि  सोशल मीडिया मंचों पर अभद्र और चलताऊ  शब्दों के साथ  हिन्दी का विकृत रूप दिखाई देता है। वर्तनी की अशुद्धियाँ और हिंग्लिश की प्रचुरता है। कई तथाकथित प्रतिष्ठित पुस्तकों के भी यही हाल हैं। पूर्णविराम की जगह फुलस्टॉप का उपयोग होने लगा है वाक्यों को विराम देने के लिए।  'हंस' और 'नवनीत' आदि पत्रिकाओं  में यह देखा जा सकता है। ऐसे ही विचार हिन्दी  रचना धर्मियों और साहित्य मनीषियों के रहे। अवसर था।

"आरंभ चैरिटेबल फाउंडेशन" के तत्वावधान में हिंदी दिवस 14 सितंबर को "हिन्दी मेरी पहचान" विषयांतर्गत काव्य गोष्ठी  आयोजन का। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार समीक्षक डॉ प्रभु दयाल मिश्र ने कहा- हिन्दी अपनी मजबूत अंतर्निहित शक्ति के कारण बहुत मजबूत है विश्व पटल पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए। संस्कृत से जन्मित हिंदी का शब्द भंडार विश्व की अन्य भाषाओं की तुलना में बहुत वृहद है , यही बात हिंदी को प्रचुर अभिव्यक्ति देकर श्रेष्ठ बनाती है।

मुख्य अतिथि अपर कलेक्टर सुश्री शीला दाहिमा जी ने अपने वक्तव्य में कहा कि हिन्दी पूरे विश्व में चौथे स्थान पर सर्वाधिक बोली जाने वाली बहुत सशक्त भाषा है। हमें अन्य भाषाएंँ सीखना चाहिए लेकिन पहले अपनी मातृभाषा हिन्दी को पढ़ना, लिखना, सीखना चाहिए। बच्चों को बचपन से ही सबसे पहले हिंदी और उसके बाद अन्य भाषाओं में पठन-पाठन, लेखन की आदत डालनी चाहिए।

विशिष्ट अतिथि माया दुबे जी ने अपने उद्बोधन में-अब राज्य भाषा से राष्ट्र भाषा का सफर हमारी हिन्दी तय करें। 

सारस्वत उद्बोधन में संस्था अध्यक्ष अनुपमा अनुश्री ने हिन्दी की समसामयिक स्थिति पर अपने विचार रखते हुए कहा - सिर्फ एक दिन हिन्दी पर अगाथ,  प्रगाढ़ प्रेम दिखाते हुए हिंदी के खूब चर्चे , हिंदी  पर पर्चे, हिन्दी के पर्चे" ही न छपें बल्कि अपनी भाषा में निहित अपनी संस्कृति-सभ्यता और संस्कारों को जीवित रखने के लिए, नई पीढ़ी को सौंपने के लिए,हिंदी की लौ सभी के हृदय में जलाए रखने के लिए, सभी को हिन्दी की मशाल थामे रखना होगा।

उपस्थित रचनाकारों ने  हिन्दी को समर्पित अपनी रचनाओं से वातावरण को खुशनुमा बना दिया।

हिन्दी है माथे की बिंदी
जिसका रुप विशाल है 
हिन्दी के ही दम पर देखो 
भारत माँ का उन्नत भाल है -शेफालिका श्रीवास्तव

मैं संस्कृत की वंशजा,  हिंदी कहलाती हूँ।
मैं भारत की धड़कन,जन -गण- मन में गाती हूंँ- शालिनी बड़ोले 

ह से हिंदी, ह से हम हैं । 
मातृभाषा हिन्दी है हमारी,
ये हम सबकी पहचान है। -कमल चंद्रा 

हिन्दी मेरा मान, मेरा अभिमान
उससे ही तो है, मेरी पहचान -निरूपमा खरे
 
भारत की प्यारी हिन्दी भाषा है -ऊषा सोनी 

बोली भरी मिठास की जो थी अपने पास,
शनैः शनैः वो गुम हुई अधुनातन के साथ - मधुलिका सक्सैना

मेरे देश के रहने वालों हिंदी का सम्मान करो
ये है भारत देश की भाषा मत इसको मेहमान करो - डॉ .ओरीना अदा

रग-रग में मेरे हिन्दी है - डॉ.रेखा भटनागर  

कार्यक्रम का संयोजन शेफालिका श्रीवास्तव ने किया। आभार प्रदर्शन कमल चंद्रा ने और कार्यक्रम का संचालन बिंदु त्रिपाठी ने किया।

No comments :

Post a Comment

We welcome your comments related to the article and the topic being discussed. We expect the comments to be courteous, and respectful of the author and other commenters. Setu reserves the right to moderate, remove or reject comments that contain foul language, insult, hatred, personal information or indicate bad intention. The views expressed in comments reflect those of the commenter, not the official views of the Setu editorial board. प्रकाशित रचना से सम्बंधित शालीन सम्वाद का स्वागत है।