नन्ही कलम की ऊँची उड़ान: ऊँच-नीच का फाफड़ा

समीक्षक: दिनेश पाठक ‘शशि’

28, सारंग विहार, मथुरा-6; चलभाष: +91 941 272 7361; ईमेल: drdinesh57@gmail.com

पुस्तक: ऊँच-नीच का फाफड़ा (बाल कविता संग्रह)
रचनाकार: अनुज अनुभव                    
आईएसबीएन: 978-81-8111-109-8
प्रकाशन वर्ष: 2019 
पृष्ठ: 32, मूल्य: ₹ 70.00 रुपये
प्रकाशक: जवाहर पुस्तकालय, सदर, मथुरा-281001 (उ.प्र.)
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एक कहावत है कि इतिहास अपने आप को दोहराता है। अनुज अनुभव की बाल कविताओं की पुस्तक ‘ ऊँच-नीच का फाफड़ा’ पढ़ते हुए हिन्दी साहित्य के कई दिग्गज अमर साहित्यकारों के नाम मेरे स्मृति पटल पर अंकित हो रहे हैं जिन्होंने अल्प आयु में ही लेखन प्रारम्भ कर दिया था। भारतेन्दु हरिश्चंद्र जी जब पाँच वर्ष के थे तभी उन्होंने एक दोहा-
‘‘ लै ढ्यौड़ा ठाड़े भये, श्री अनिरुद्ध सुजान
  वाणासुर की सेन को, हनन लगे भगवान।

लिखकर अपने पिताजी श्री गिरिधर कविराय को सुनाया था जिसे सुनकर उनके पिता इतने प्रसन्न हुए कि उन्होंने भारतेन्दु जी को एक अच्छा साहित्यकार होने का आशीर्वाद दिया। राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त जी ने भी मात्र आठ वर्ष की आयु में एक छप्पय सुनाकर अपने पिताजी से प्रसिद्ध कवि बनने का आशीर्वाद पाया था। इसी प्रकार जयशंकर प्रसाद जी ने जो कहानी लिखी थी वह सन् 1905 ई में जब प्रसाद जी मात्र चैदह वर्ष के थे तभी एक पत्रिका में प्रकाशित हो गई थी। प्रख्यात कवयित्री  महादेवी जी ने भी प्रसाद जी के आशीर्वाद से अल्पआयु में  ही लिखना प्रारम्भ कर दिया था और अनुजअनुभव को भी अपने साहित्यकार बाबा एवं पिताजी का आशीर्वाद प्राप्त है इसलिए अनुज अनुभव का भी मात्र साढ़े बारह वर्ष की उम्र में उनका कविता संग्रह-‘‘ऊँच-नीच का फाफड़ा’’ प्रकाशित होकर  हिन्दी साहित्य जगत में अपनी अहमियत सिद्ध करने के लिए उपस्थित हो गया है। ‘ऊँच-नीच का फाफड़ा’ में अनुज अनुभव की 18 बाल कविता संग्रहीत हैं। क्रम संख्या एक से बारह तक की बाल कविताएँ अनुज अनुभव ने आज से पाँच वर्ष पूर्व जब वह मात्र आठ वर्ष के ही थे, तभी लिख ली थीं जिन पर अनुज को सन् 2015 ई. में एक साहित्यिक संस्था द्वारा पुरस्कृत भी किया गया था। क्रम संख्या तेरह से अट्ठारह तक की कविताएँ अभी जल्दी में ही लिखी गई हैं तथा उनके अनुरूप चित्र भी अनुज ने स्वयं ही तैयार किए हैं ।
भारतीय संस्कृति में ईश वन्दना से पुस्तक का प्रारम्भ करने की परिपाटी का निर्वहन करते हुए अनुज ने भी अपनी पुस्तक का प्रारम्भ ईश वन्दना से ही प्रारम्भ किया है-
                ‘‘ माँ मुझको वर दे दो ऐसा
                  बन जाऊं मैं ध्रुव के जैसा।
                  अच्छे-अच्छे काम करूँ मैं
                  जग में ऊँचा नाम करूँ मैं।                 

ऊँच-नीच का फाफड़ा बच्चों द्वारा खेले जाने वाला भारतीय खेल है। इसी के आधार पर संग्रह का नामकरण किया गया है। यह संग्रह की दूसरी कविता है जिसमें आपसी भाई चारे का आह्वान करते हुए बालकों को अच्छी लगने वाली खाने की चीजों का उल्लेख किया गया है-
                 ‘‘ ऊँच-नीच का फाफड़ा खेलेंगे हम-तुम
                   गीत प्यार के प्यारे से, गायेंगे हम-तुम               
                   इडली, डोसा, रसमलाई अच्छे लगते हैं               
                   और साथ में रसगुल्ला खायेंगे हम-तुम।             

तीसरी कविता का शीर्षक है ‘मेरे पापा’ जिसमें एक बच्चे ने अपने पापा का बहुत अच्छा खाका खींचा है तो चैथी बाल कविता का शीर्षक -‘‘गौरैया’’ है। छोटी सी चिड़िया गौरैया पर बहुत ही भोली सी बाल कविता की रचना की है अनुज ने-     
                ‘‘रोज सवेरे गौरैया, मेरे आँगन में आती है       
                 प्यारे चुन्नू जग जाओ, कह कर मुझे जगाती है।       
                 यह सुनकर मैं जग जाता हूँ, उसे ढूँढ़ने जाता हूँ       
                 इतने में छोटी गौरैया, फुर्र-फुर्र उड़ जाती है।’’         

संग्रह की अगली बाल कविताओं के नाम हैं- भारत के बच्चे, चलो उड़ाएँ छत पर काइट, गाय, गड़बड़झाला, भारत देश महान, जब हम करते शैतानी, घड़े पाप के फूट रहे हैं, शेर कुए में जा पड़ा, तोता, बन्दर, हाथी तथा शेर, गोरिल्ला और चश्मा।

दिनेश पाठक ‘शशि’
इस बाल कविता संग्रह में कई बाल कविता ऐसी भी हैं जिनमें अनुज अनुभव के परिपक्व विचारों की झलक मिलती है। ‘घडे़ पाप के फूट रहे हैं’ संग्रह की ऐसी ही कविता है-     
                       जो भारत को लूट रहे हैं       
                       कौए जैसे टूट रहे हैं         
                       उनको यह मालूम नहीं है           
                       घड़े पाप के फूट रहे हैं।’’         

इस प्रकार अनुज अनुभव के कविता संग्रह ‘‘ऊँच-नीच का फाफड़ा’’ की रचनाएँ पढ़ते-पढ़ते पाठकों के मन में कुछ कहावतें जरूर उभरेंगीं जैसे- ‘मोर तो चिते चिताए ही आते हैं’ याकि ‘होनहार विरवान के होत चीकने पात’ या फिर ‘पूत के पाँव पालने में ही दीख जाते हैं आदि-आदि। इन कविताओं से यह स्पष्ट है कि अनुज अनुभव के अन्दर एक परिपक्व कवि के गुण विद्यमान हैं जो निश्चित ही अपने साहित्यकार बाबा श्री हरिदत्त चतुर्वेदी‘हरीश’ एवं साहित्यकार पिता आचार्य नीरज शास्त्री की भाँति ही अपनी सम्प्रभुता सिद्ध करने में सक्षम होंगे।         

संग्रह का आवरण बहुत ही मनमोहक एवं मुद्रण त्रुटिहीन है। कविताओं के साथ लगे सभी चित्र कविताओं के अनुरूप हैं जिनमें पहले बारह कविताओं के चित्र कक्षा ग्यारह के छात्र अभिषेक सिंह एवं आकाश सिंह ने बनाए हैं तथा शेष छह कविताओं के चित्र स्वयं अनुज ने। संग्रह का हिन्दी साहित्य जगत में स्वागत होगा तथा बच्चे इन कविताओं को झूम-झूम कर, गाकर आनन्द लेंगे, ऐसी आशा है।

मेरी शुभकामनाएँ।

9 comments :

  1. बालकवि अनुज चतुर्वेदी 'अनुभव' की सुंदर बालकाव्य कृति ऊंच नींच का फाफड़ा बाल मनोभावों के अनुकूल एक उत्तम कृति है। इस कृति की उत्तम समीक्षा बाल साहित्य के मर्मज्ञ साहित्य गौरव डॉ दिनेश पाठक'शशि'जी द्वारा सार्थक एवं सुस्पष्ट शैली में की गई है। इस हेतु में बालकवि अनुज अनुभव एवं पूज्यवर डॉ दिनेश पाठक'शशि'जी को हार्दिक शुभकामनाएं देता हूं।
    आचार्य नीरज शास्त्री

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  2. सुंदर बाल काव्य कृति ऊंच नींच का फाफड़ा की समीक्षा हेतु सेतु परिवार का हार्दिक आभार।
    आचार्य नीरज शास्त्री

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  3. सुंदर समीक्षा हेतु आदरणीय डॉ दिनेश पाठक'शशि'जी का सादर आभार।

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  4. अनुज अनुभव को कोटि-कोटि शुभकामनाएं।

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  5. सुंदर बाल काव्य कृति ऊंच नींच का फाफड़ा की समीक्षा हेतु सेतु परिवार का हार्दिक आभार।
    आचार्य नीरज शास्त्री

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  6. सुंदर बाल काव्य कृति ऊंच नींच का फाफड़ा की समीक्षा हेतु सेतु परिवार का हार्दिक आभार।
    आचार्य नीरज शास्त्री

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  7. सुंदर बाल साहित्य कृति"उंच नीच का फाफड़ा"के रचयिता अनुज अनुभव की समीक्षा आदरणीय श्री डॉ दिनेश पाठक'शशि'जी द्वारा बहुत ही उत्तम एवं स्पष्ट रूप से की है कवि तथा समीक्षक दोनों को बहुत बहुत धन्यवाद ।

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  8. इस होनहार बालकवि से परिचयय कराने का धन्यवाद पाठक जी . पहले तो नाम से लगा कि आपके अनुज अनुभव के बचपन की कोई कृति है लेकिन परिचय पढ़कर भ्रम दूर हुआ . वास्तव में जन्मजात प्रतिभा के साथ एक दिशा व प्रेरणा भी जरूरी है . जाने कितनी प्रतिभाएं दिशाहीन कहीं विलीन हो जातीं हैं . अनुज अनुभव के पास दोनों हैं यह अच्छघ बात है . आपने उस प्रतिभा को और आगे बढ़ाकर एक पारखी और सहृदय लेखक का कार्य किया है . बहुत खूब .

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