समय के सत्य का बोध कराता लघुकथा संग्रह: सत्य का बोध

समीक्षक: आचार्य नीरज शास्त्री

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पुस्तक: सत्य का बोध (लघुकथा संग्रह)
लेखक: दिनेश पाठक ‘शशि’
ISBN: 979-88-856933-9-4
पृष्ठ: 144
मूल्य: ₹ 200.00 रुपये
प्रकाशन वर्ष: 2022
प्रकाशक: एक्सप्रेस पब्लिशिंग, चेन्नई 04


'सत्य का बोध' वर्तमान युग के लब्ध प्रतिष्ठ कथाकार डॉ दिनेश पाठक 'शशि' जी द्वारा प्रणीत लघुकथा संग्रह है। प्रस्तुत संग्रह में कुल 43 लघुकथाएँ हैं। यह संग्रह विद्वान लेखक ने युगल सरकार को समर्पित किया है।

इस संग्रह की भूमिका में लिखे गए अभिमत में लेखिका सुश्री कांता राय ने लिखा है कि लेखक अपनी लघुकथाओं के माध्यम से अज्ञानता से व्याप्त अंधेरे को चुनौती दे रहे हैं। देखें -
"सत्य का बोध मनुष्य जीवन में व्याप्त चैतन्यता का स्वत: प्रमाण है। चैतन्य विद्वज्जन भौतिक सुखों से ऊपर उठकर समाज के विकास में अपने कर्मों से प्रकाशमान रहता है और अज्ञानता से व्याप्त अंधेरों को चुनौती देता रहता है। इस संग्रह के लेखक डॉ दिनेश पाठक'शशि' द्वारा ये सभी चुनौतियां लघुकथा के माध्यम से सामने आ रही हैं।"1/07

इसी तरह संग्रह के प्रणेता डॉ दिनेश पाठक'शशि'जी के लेखनधर्म को स्पष्ट करते हुए अभिमत-2 की लेखिका डॉ शील कौशिक लिखती हैं -
"उनकी लघुकथाओं में जीवन का गहन अनुभव व परिपक्व चिंतन देखने को मिलता है। अपनी विस्तृत संवेदनात्मक चेतना के साथ वे हमारे सम्मुख ऐसे व्यापक सरोकारों वाले लेखक के रूप में हैं, जिसमें समाज के हर वर्ग की अनुगूंज है।"2/15

आचार्य नीरज शास्त्री
लेखक ने 'अपनी बात' शीर्षक के अंतर्गत अपनी लघुकथाओं को अपने अनुभवों एवं अनुभूतियों से जनित बताया है। यथा - 
"मेरे अनुभवों एवं अनुभूतियों के फलस्वरूप उपजीं जीवन के यथार्थ की ये लघुकथाएँ पढ़कर आपको भी अपने ही आस पास कहीं घटित होती सी लगें तो अपना श्रम सार्थक समझूंगा।" 3/26

इस संग्रह की सभी लघुकथाएँ अपनी विषयवस्तु एवं शिल्प के आधार पर उत्कृष्टतम लघुकथाएँ हैं।ये लघुकथाएँ विद्रूपताओं पर करारा प्रहार करते हुए अपने उद्देश्य में पूर्ण सफल सिद्ध होती हैं।इन लघुकथाओं के तेवर विद्वान लेखक के रचनाधर्म के उच्चतम आदर्शों एवं शैल्पिक विशिष्टताओं को प्रदर्शित करते हैं।

इस संग्रह की पहली लघुकथा 'जीत' स्त्री और पुरुष के संबंधों की पवित्रता और उनके व्यावहारिक दृष्टिकोण को उजागर करती हैं। 'जीवन सत्य' एक संवेदनशील लघुकथा है जिसमें पौधे और फल- फूलों के माध्यम से नव पीढ़ियों से जुड़े सत्य को उजागर करती हैं। 'यथावत' लघुकथा राजनैतिक आधार पर चौराहों का नाम बदलकर अपना स्वार्थ सिद्ध करना दिखाती है।

दिनेश पाठक ‘शशि’
'सेवाभाव' माता पिता की सेवा व देखभाल के नाम पर अपना ट्रांसफर रुकवाने संबंधी स्वार्थ की पूर्ति पर कटाक्ष करती है।

इस संग्रह की सभी लघुकथाएँ एक से बढ़कर एक हैं और अपने लक्ष्य पर निशाना साधती हैं। इस संग्रह की लघुकथाओं की भाषा जहाँ सरस,सरल और पाठकों की समझ के अनुकूल है, वहीं शैली भावात्मक एवं चित्रात्मक है। पुस्तक का आवरण भी संग्रह की विषयवस्तु के अनुरूप ही है। 144 पृष्ठीय इस संग्रह का मूल्य₹200/- भी उचित है। समय के सत्य का बोध कराने वाला यह लघुकथा संग्रह वास्तव में पठनीय और संग्रहणीय है। मुझे आशा ही नहीं पूर्ण विश्वास है कि यह लघुकथा संग्रह लेखक के यश में श्री वृद्धि करेगा।

अनंत शुभकामनाएँ!

1 comment :

  1. आदरणीय बहुत बहुत आभार।
    आचार्य नीरज शास्त्री

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