तोहफा

- सीमा सिंह

सीमा सिंह
सुबह से घर की सफाई और किचन में जुटी नीना चौंक गई, “बाप रे अतुल  के आने सिर्फ दो घंटे बचे हैं और मैं भूत जैसी घूम रही हूँ। माँ आप ज़रा गैस बंद कर देना प्लीज  मैं नहाने जा रही हूँ।”
अतुल की पसंद की पीली साड़ी में तैयार होकर आई तो माँ अर्थ पूर्ण ढंग से मुस्कुरा रही थी “वाह जी खाने से लेकर सजावट तक सब अतुल का मनपसंद, अब तो साड़ी भी।” माँ ने कहा तो नीना शरमा गई।
“क्या बात हुई थी वैसे तेरी? माँ ने उत्सुकता से पूछा।
“आवाज़ कट  रही थी माँ  अतुल की। वो  अमेरिका से पिछले ही सप्ताह लौटा है। मुझसे मिलने तो सीधे यहीं आना चाहता था ,मगर माता-पिता सबसे पहलें हैं। तो अब आ रहा है उसकी माँ को अब  शादी की बहुत जल्दी है।”
शादी  के नाम पर नीना की रंगत और गुलाबी हो गई। माँ नें दुलार से नीना के सिर पर हाथ फिराते हुए कहा, “बेटा तूने बहुत तपस्या की। पाँच साल बहुत होते हैं।”
“दीदी आपके लिए तो गिफ्ट-शिफ्ट भी आ रहें होगे ना” छोटे भाई ने बहन को छेड़ते हुए कहा।
“वो खुद आ गया वापस, इस से बड़ा क्या तोहफा होगा” माँ ने कहा।
तभी बाहर घंटी बजी नीना ने दौड़ कर दरवाजा खोला। हाँ ये अतुल ही था। हाथ में बड़ा सा पैकिट पकड़े।
“अरे रुक क्यों गए अंदर आओ ना।”
“नहीं बहुत जल्दी में हूँ ये सारे बाँटने हैं फिर कभी जरूर आऊँगा अभी ये पकड़ो। सबको आना है बहाना नही चलेगा।” और नीना को  कार्ड थमाकर चला और वापस मुड कर आँख दबाते हुए कहा ...
“गज़ब लग रही हो अब तो तुम भी शादी कर ही डालो...”