मन बैरागी तन अनुरागी (ग़ज़ल)

निदा फ़ाज़ली

(12 अक्टूबर 1938 – 8 फ़रवरी 2016)

मन बैरागी तन अनुरागी कदम-कदम दुश्वारी है
जीवन जीना सरल न जानो बहुत बड़ी फनकारी है

औरों जैसे होकर भी हम बाइज़्ज़त हैं बस्ती में
कुछ लोगों का सीधापन है कुछ अपनी अय्यारी है

जब-जब मौसम झूमा हमने कपड़े फाड़े शोर किया
हर मौसम शाइस्ता रहना कोरी दुनियादारी है

ऐब नहीं है उसमें कोई लाल परी न फूल गली
यह मत पूछो वह अच्छा है या अच्छी नादारी है

जो चेहरा देखा वह तोड़ा नगर नगर वीरान किए
पहले औरों से नाखुश थे अब खुद से बेज़ारी है