आशा है, आपसे कभी आमने-सामने मुलाकात होगी:आइंस्टाइन – मेहेर वान

मेहेर वान 
अल्बर्ट आइन्स्टाइन महात्मा गाँधी के आजीवन प्रशंसक रहे। जब भी युद्धों से निजात पाने की दिशा में चर्चा होती थी वह हमेशा अहिंसा और गाँधी जी का ज़िक्र करते थे। अल्बर्ट आइंस्टाइन की विचारधारा पर गाँधी जी और अहिंसा का काफ़ी प्रभाव रहा। सन 1950 में एक रिकार्डेड ऑडियो में अल्बर्ट आइन्सटाइन ने गाँधी के बारे में कहा था, “मुझे भरोसा है कि  हमारे समय के सभी राजनैतिक महापुरुषों में महात्मा गाँधी के विचार सबसे विद्वत्तापूर्ण हैं।”
यह द्वितीय विश्वयुद्ध के काफ़ी पहले का समय था और गाँधी की छवि भारत में एक सशक्त राजनैतिक ताकत के रूप में बन चुकी थी, मगर वैश्विक तौर पर अब भी उन्हें बहुत ख्याति नहीं मिली थी। यह पत्र सन 1931 में जब गाँधी जी के मित्र सुन्दरम आइन्सटाइन के घर पहुँचे तो उन्होंने गाँधी जी के नाम एक संक्षिप्त पत्र लिखा।


आदरणीय गाँधी जी,
इन पंक्तियों को आप तक पहुँचाने के लिये मैं आपके मित्र का सहारा ले रहा हूँ जो अभी मेरे घर में उपस्थित हैं। आपने अपने कार्यों के ज़रिये यह प्रदर्शित किया है कि हिंसा के बिना भी सफलता हासिल कर पाना संभव है, यहाँ तक कि उन लोगों के साथ काम करते हुये भी, जिन्होंने हिंसा के माध्यम का त्याग नहीं किया हो। मुझे आशा है कि आपका उदाहरण आपके देश की सीमाओं के पार भी पहुँचेगा, और ऐसी अंतर्राष्ट्रीय शक्ति बनाने में सहायक होगा जिसका सभी सम्मान करेंगे, जो युद्धों -विवादों को खत्म करने सम्बन्धी निर्णय लेगी।

सच्चे आदर सहित,

आपका
(अल्बर्ट आइंस्टाइन)

आशा है, आपसे कभी आमने –सामने मुलाकात होगी.


गाँधी जी का जवाब

लन्दन
अक्टूबर 18, 1931

प्रिय मित्र,

सुन्दरम के हाथों आपका खूबसुरत पत्र पाकर मुझे खुशी हुयी।  मेरे लिये यह बहुत तसल्ली की बात है कि मेरे काम को आपका वैचारिक का समर्थन मिला है। वास्तव में मैं भी चाहता हूँ कि हम लोग कभी आमने-सामने मिलें, वह भी मेरे भारत वाले आश्रम में।

भवदीय
(मो.क.गाँधी)
                                                                                                           अनुक्रमणिका, जनवरी 2017