सम्पादकीय: निंदक नियरे राखिये ...

सेतु के सभी पाठकों और शुभाकांक्षियों को 26 जनवरी, भारत के गणतंत्र दिवस की बधाई और हार्दिक शुभकामनाएँ!

विभाजन की विभीषिका झेलने के बाद एक महान राष्ट्र ने अपने लोकतांत्रिक प्रशासन के नये, स्वतंत्र स्वरूप को परिभाषित किया और विश्व के एक प्राचीनतम राष्ट्र भारत का पुनर्जन्म हुआ। विभाजन के समय की जो समस्यायें आज तक मुँह बाये खड़ी हैं, उनमें कश्मीर समस्या सर्वप्रमुख है। इस भारतीय राज्य का बड़ा भाग आज भी पाकिस्तान और चीन के कब्ज़े में है। और भारत प्रशासित भाग भी प्रतिदिन के आतंकवाद से त्रस्त है। 19 जनवरी का दिन एक स्वतंत्र राष्ट्र की दुखती रग जैसा है क्योंकि सन् 1990 को इसी दिन कश्मीर के मूल निवासी पंडितों का अंतिम और निर्णायक पलायन हुआ। देश के अंदर ही शरणार्थी होना एक भयावह स्थिति है। राजनीतिक नेतृत्व को इस मानवीय समस्या पर गम्भीर होने की आवश्यकता है।

इस माह प्रख्यात हिंदी साहित्यकार श्री दूधनाथ सिंह के देहांत की दुखद सूचना मिली है, उन्हें सेतु सम्पादन मण्डल की ओर से विनम्र श्रद्धांजलि! जनवरी मास में प्रसिद्ध साहित्यकार कमलेश्वर का जन्मदिन और पुण्यतिथि दोनों ही पड़ते हैं, उन्हें भी स्मरण।

पिट्सबर्ग की बर्फ़ से ढँकी धरती पर पहले उत्तरायणी, तदनंतर वसंत पंचमी के पर्व भारतीय परम्परा में निहित उल्लास बिखेर गये हैं। इस अंक में लोहड़ी पर ब्रिटेन और अमेरिका से क्रमशः कादम्बरी मेहरा और शशि पाधा के आलेख प्रस्तुत हैं।

29 जनवरी 1780 को आयरलैंड से आये जेम्स हिकी (James Augustus Hicky) द्वारा "हिकीज़ बेंगाल गैज़ैट ऑर ओरिजिनल कैलकटा जनरल एडवर्टाइज़र (साप्ताहिक) की स्थापना को भारत में पत्रकारिता का विधिवत आरम्भ माना जाता है। यद्यपि कोलकाता में पत्रकारिता आरम्भ करने का विचार लगभग एक दशक पहले से चल रहा था। प्रशासन के निंदक इस पत्र को ईस्ट इंडिया कम्पनी के प्रशासन ने दो वर्ष के अंतराल में ही ज़ब्त कर लिया। तब से अब तक की यात्रा में हमने रेडियो, टीवी, और सोशल मीडिया तक बहुत कुछ देखा है। समस्त यात्रा में जो एक गुण सर्वदा महत्वपूर्ण रहा है, वह है प्रामाणिकता।

30 जनवरी को गांधी जी का देहांत हुआ था। आधुनिक काल के सबसे प्रसिद्ध भारतीय महात्मा गांधी से हम सबको यह सीखने की आवश्यकता कि कठिनतम काल में वैविध्य और विरोधाभास से भरे समाज को एक उद्देश्य के लिये कैसे संगठित किया जा सकता है। इस अंक में निशांत राहुल और कन्हैया त्रिपाठी के आलेख गांधीवादी विचारधारा की झलकियाँ प्रस्तुत कर रहे हैं। पिछले अंकों की तरह इस बार भी अमर स्वाधीनता सेनानी बिस्मिल की आत्मकथा के अंश भी धारावाहिक रूप में प्रस्तुत हैं।

साक्षात्कारों की कड़ी को जारी रखते हुये, इस अंक में हम प्रसिद्ध लेखिका डॉ. सुधा ओम ढींगरा से वार्ता कर रहे हैं। स्वर्गद्वीप मॉरिशस की चित्रावली के अतिरिक्त इस अंक में 17 कवियों की पद्य रचनाएँ प्रस्तुत हैं। नौ उत्कृष्ट आलेख, एक व्यंग्य, तीन कहानियों, और स्थायी स्तम्भों के साथ यह अंक प्रस्तुत हमें आशा है कि आपकी बेबाक प्रतिक्रिया हमें प्राप्त होती रहेगी।

सेतु को प्राप्त हुई हर ईमेल का उत्तर हम नहीं दे सकते, लेकिन यहाँ हमारा प्रयास गुणवत्ता के साथ-साथ प्रामाणिकता बनाये रखने का है। यही आग्रह हमारे रचनाकारों से भी है। न केवल रचना के विषयों की प्रामाणिकता बल्कि रचना की प्रामाणिकता की भी। एक बार फिर मेरा अनुरोध है कि केवल मौलिक, और पूर्णतः अप्रकाशित रचनाएँ ही भेजें। प्रकाशन से अभिप्राय केवल मुद्रित सामग्री न होकर अंतर्जाल पर प्रकाशन तथा दृश्य-श्रव्य माध्यमों पर प्रसारण भी शामिल है। बल्कि सेतु के अंतर्जालीय स्वरूप के कारण अंतर्जालीय समूहों या पत्र-पत्रिकाओं, फ़ेसबुक, ब्लॉग आदि पर पहले से प्रकाशित रचनाओं का यहाँ पुनर्प्रकाशन व्यर्थ का दोहराव है। कुछ आलेखों में मौलिकता के स्थान पर इधर-उधर से उठाई रचनाओं की पंक्तियों के संकलन भी प्राप्त हुए हैं। आपकी रचनात्मकता के साथ-साथ यह हिंदी भाषा का भी अनादर है। सभी भावी रचनाप्रेषकों से हमारा अनुरोध है कि ऐसा कभी न करें। आलेखों में सभी संदर्भ और श्रेय स्पष्ट लिखें। आपकी अप्रकाशित, मौलिक तथा उत्कृष्ट रचनाओं का सेतु में सदा स्वागत है। यहाँ, यह याद दिलाना भी आवश्यक है कि किसी राजनैतिक विचारधारा के प्रचार, हिंसक गतिविधि, या किसी भी प्रकार की घृणा या द्वेष की अभिव्यक्ति के लिये सेतु में कोई स्थान नहीं है, चाहे वह किसी भी वर्ग, जाति, या लिंग के विरुद्ध हो, चाहे किसी पंथ, धर्म, भाषा, राज्य, या राष्ट्रीयता के प्रति हो। नये-पुराने, सभी लेखकों के लिये 'लेखकों से अनुरोध' की निम्न कड़ी सभी पक्षों का समय बचाने और प्रकाशन की गुणवत्ता बनाये रखने में लाभप्रद है:
http://www.setumag.com/p/hindi-setu-submission-guidelines-setu.html

सेतु सम्पादन मण्डल की ओर से मैं एक बार फिर कविताकोश की टीम और ललित कुमार का आभार व्यक्त करना चाहूँगा, जिनके सौजन्य से सेतु के प्रकाशित अंकों की पीडीएफ़ फ़ाइलें डाउनलोड के लिये उपलब्ध कराई जा रही हैं। सेतु के प्रकाशित अंक कविता कोश की निम्न कड़ी पर उपलब्ध हैं:
http://kavitakosh.org/kk/सेतु_पत्रिका

अनुराग शर्मा

अब एक सूचना लघुकथा प्रतियोगिता के बारे में। इस प्रतियोगिता के लिये हमें कुल 131 संदेश प्राप्त हुए थे। अधिकांश प्रतियोगियों ने नियमों के अनुपालन का वचन देते हुए केवल एक, अप्रकाशित, अप्रसारित रचना देवनागरी, यूनिकोड में ही भेजी थीं। कुछ प्रतियोगियों ने एक से अधिक रचनाएँ भेजी थीं। कुछ प्रतियोगियों ने पुराने यूनिकोडपूर्व अक्षरों का प्रयोग किया। एक प्रविष्टि रोमन में भी थी। हमारे सीमित संसाधन हमें यूनिकोड से इतर लिखी रचनाओं के प्रसंस्करण की सुविधा नहीं देते। इसलिये उन्हें छोड़ना ही था। कुछ रचनायें इंटरनैट पर या मुद्रण में प्रकाशित थीं, वे भी प्रतियोगिता के नियमों के विरुद्ध होने के कारण बाहर रखनी पड़ीं।

नियमों पर खरी उतरने वाली सभी रचनाओं को मूलभूत गुणवत्ता की कसौटी पर कसने के बाद प्रबुद्ध निर्णायकों के पास भेज दिया गया है। प्रतियोगिता के विषय में आनेवाली अलग-अलग ईमेल का उत्तर दे पाना हमारे लिये सम्भव नहीं है। हमारा प्रयास है कि परिणामों की घोषणा मार्च अंक में कर दी जायेगी यदि निर्णायकों की व्यस्तता या किसी अन्य कारण से देर हुई तो भी हम आपको यथास्थिति से अवगत कराते रहेंगे। यदि अगले वर्ष की प्रतियोगिता के लिये आपके पास विधागत या प्रक्रिया सम्बंधी कोई सुझाव हैं तो हमें अवश्य भेजें। आपके अन्य सुझावों तथा प्रतिक्रियाओं का भी स्वागत है। जहाँ कहीं सुधार की सम्भावना हो, हमें अवश्य बताइये क्योंकि सेतु के संचालन में हम संत कबीर के निम्न कथन से सहमत हैं:
निंदक नियरे राखिये आंगन कुटी छवाय, बिन पानी साबुन बिना, निरमल करत सुभाय

शुभकामनाओं सहित,
अनुराग शर्मा


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