सुबह का सूरज अब मेरा नहीं है : समीर लाल ’समीर’ की नजर से

सुबह का सूरज अब मेरा नहीं है

लेखिका: मीना चोपड़ा
प्रकाशक: हिन्दी राईटर्स गिल्ड, 3577, नेबलस गेट, मिसिसागा, कनाडा
ईमेल: hindiwg@gmail.com
मूल्य: $12.99

समीक्षक: समीर लाल ’समीर’

मीना चोपड़ा, कनाडा का एक जाना पहचाना नाम है। वे जितनी खूबसूरती से अपनी कूची से चित्रकारी करना जानती हैं, उतनी ही खूबसूरती से अपनी कविताओं में शब्दचित्र भी गढ़ती हैं। लेकिन शब्दचित्र को अपनी कलाकारी से चित्रों में उतारना, और चित्र भी ऐसे, कि लगता है, कविता कह रहे हैं; यह कला मीना जी को एक अद्भुत कलाकार बनाती है।

जिस तरह चित्रों की कोई भाषा नहीं होती, मीना जी की कविताओं ने भी भाषाओं की सीमा के परे भावों को उजागर किया है। हिन्दी, अंग्रेजी, उर्दू और पंजाबी आदि भाषाओं में सिद्धहस्त लिखती हैं। अंग्रेजी, उर्दू, हिन्दी मंचों से अपनी कविताओं को पढ़ती हैं।

उनका कविता संग्रह ’सुबह का सूरज अब मेरा नहीं है’ मात्र हिन्दी कविताओं का संग्रह नहीं है। इसमें उनकी चित्रकारी भी है। अंग्रेजी कविताएँ भी हैं। भावानुवाद भी है। एक तरह से यह एक पूरा पैकेज है। आप इसमें एक कवि, एक कलाकार, एक संवेदनशील हृदय के भाव, प्रकृति का प्रेम सब पायेंगे।

भावों में चिन्तन, प्रेम, अध्यात्म सभी दृष्टिगत होता है। उनकी कविता ’जीवन गाथा’ का अंश:
मीना चोपड़ा
उठती हैं
गिरती हैं
दर्पण हैं साँसें
प्रतिबिम्बों को
जन्म देती हैं।
एक अन्य बानगी देखें ’ये अँधेरे’:
धूल और मिट्टी में सने
आरजुओं से लथपथ
उठकर नींद से गहरी
आँखे मलते
पोंछकर आसमान को
देखते रहे चेहरा अपना
सितारों के आइने में
गुमसुम से ये अँधेरे।
कविताओं का सफर तय करते एक शब्दचित्र देखें ’आवर्तन’
टेढ़े और तिरछे रास्तों
पर चलती लकीरें
नये, पुराने आयामों से निकल
उन्हीं में ढलती
ये लकीरें
परिधि के किसी
कोने में अटक
बिन्दु को अपने तलाशती
भटकती रहीं-
भटकती रहीं-

अब एक अंग्रेजी की कविता देखें:
A death, A Beginning
Have you ever searched?
Your lost self
Unfolding those
Ruthless cold nights
Inside me…?

और फिर इसका भावानुवाद:
खोजा है कभी तुमने
अपनी खोई हुई पहचान को
अँधेरी, सियाह, ठंडी रातों की
खुलती हुई परतों के तल
ढकी हुई मेरी कोख की
सुलगती परतों में।

लगभग 50 कविताओं का संकलन, अनेक चित्र, कुछ भावानुवाद सब कुछ एक बैठक में पढ़ डालने को मजबूर करती है। एक अलग अनुपम अनुभव है मीना जी पढ़ना, चित्रों को निहारना और कविताओं और चित्रों के भावों पर मनन करना।

4 comments :

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  2. समीर जी,बहुत खूबसूरती और सवेदनशीलता के साथ आपने जो मेरी कविताओं पर अपने सर्वप्रिय ब्लॉग सेतु में गंभीर संमीक्षा दी है वह मेरे लिए बहुत सम्मान की बात है। मैं आपकी बहुत आभारी हूँ।

    धन्यवाद सहित
    सादर
    मीना

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  3. बढ़िया समीक्षा

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  4. आपकी समीक्षा बहुत सटीक और बेबाक होती है ।

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