अन्‍तर्राष्‍ट्रीय भाषा के रूप में हिंदी भाषिक संस्‍कृति शिक्षण

 डॉ. रमेश कुमार

सह आचार्य, प्रारम्भिक शिक्षा विभाग, राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद, दिल्ली
मातृभाषा उपार्जन के क्रम में भाषिक संस्‍कृति अनायास ही आत्‍मसात कर ली जाती है पर अन्‍य भाषा के रूप में इसे सीखना होता है। भाषा पर पर्याप्‍त अधिकार करने के लिए उसके सांस्‍कृतिक पक्ष की जानकारी प्राप्‍त करना आवश्‍यक होता है। इसके लिए उस भाषा-भाषी जनता की जीवन-शैली, रीति-रिवाजों, सामाजिक और आर्थिक-नैतिक परंपरा तथा उनके जीवन मूल्‍यों से छात्रों को परिचित कराना जरूरी होता है। अन्‍तर्राष्‍ट्रीय  भाषा के रूप में हिंदी भाषिक संस्‍कृति को सीखें तभी वे बेहतर ढंग से हिंदी भाषा अध्‍ययन कर सकते है।
 
चारों भाषा कौशलों के विकास के साथ अध्‍येय भाषा की संस्‍कृति का बोध अतिरिक्‍त कौशल के रूप में विकसित किया जाता है। भाषा में प्रयुक्‍त शब्‍दों, वाक्‍यांशों तथा वाक्‍यों का अर्थ भाषिक संस्‍कृति से नियंत्रित होता है। मातृभाषा के प्रयोक्‍ता के लिए वह सहज रूप में सीखा जाता है। नवीन भाषा सीख रहे अध्‍येता के लिए इसे सीखना पढ़ता है ।
 
भाषिक संस्‍कृति शिक्षण की अनिवार्यता:
1.      व्‍यक्ति की निजी सांस्‍कृतिक चेतना के विकास में सहायक
2.      व्‍यावहारिक कुशलता के विकास में सहायक
3.      अध्‍येय भाषा की संस्‍कृति की समझ में सहायक
4.      भाषा के अधिगम और प्रभावी शिक्षण में सहायक
5.      भाषिक संस्‍कृति के कारण व्‍यापक दृष्टिकोण का विकास
6.      विभिन्‍न प्रकार के भाषाई व्‍यवहारों एवं कार्यो को समझने के लिए अत्‍यावश्‍यक
7.      मुहावरों एवं कहावतों के उचित प्रयोग में सहायक
8.      साहित्‍य के अध्‍ययन के लिए भी संस्‍कृति का ज्ञान अपेक्षित है।
 
उपरोक्‍त बिंदुओं को ध्‍यान में रखते हुए अन्‍तर्राष्‍ट्रीय भाषा के रूप में हिंदी सीख रहे विदेशी छात्रों के लिए भाषिक संस्‍कृति शिक्षण हेतु निम्‍न उपाय सुझाए जा सकते हैं: -
 
1.      फिल्‍मों (चलचित्र) के माध्‍यम से:
विदेशी  छात्रों को कुछ चुने हुए भारतीय फिल्‍म दिखाए जाए जिसमें भारतीय परिवेश को दर्शाया गया हो। इसे पहले मूक रूप से उनके सामने प्रस्‍तुत किया जाए एवं जगह-जगह पर दृश्‍यों को रोककर उसे (Explain)  वर्णन किया जाए ताकि वे विभिन्‍न् परिदृश्‍यों के साथ-साथ भारतीय संस्‍कृति के विभिन्‍न पक्षों को भी समझ सकें जैसे बड़ों का अभिवादन, महिलाओं के लिए समयसूचक शब्‍द आदि। फिल्‍म की समाप्ति के अनन्‍तर उन्‍हें कुछ समय आपस में बातचीत करने के लिए दें इसके अधिक यदि वे विभिन्‍न्‍ प्रसंगों के बारे में चर्चा करें तो भी उन्‍हें इसके लिए पर्याप्‍त मौका  उपलब्‍ध कराएँ। इसके अनन्‍तर फिल्‍म को (सवाक्) प्रस्‍तुत करें। इससे उनका श्रवण कौशल विकसित होगा और वे भारतीय संस्‍कृति के विभिन्‍न पहलूओं से परिचित हो सकेंगे।
 
2.      फ्लैश कार्ड के माध्‍यम से :
इसके अन्‍तर्गत 100-200 चित्रों की एक श्रृंखला बनाए जो कि भारतीय जनजीवन के विभिन्‍न परिदृश्‍यों पर आधारित हो जैसे शादी-विवाह, हाट-बाज़ार, खेल का मैदान, मेला, मंदिर, दुकान आदि से जुड़ी हुई तस्‍वीरें हों। एक-एक कर तस्‍वीरों को प्रस्‍तुत करें एवं अंर्तराष्‍ट्रीय छात्रों से हर तस्‍वीर पर विस्‍तृत चर्चा करें जिसमें उनकी समझ को संवर्द्धित होगी।
 
3.      विभिन्‍न उत्‍सवों में आमंत्रण:
भारतीय संस्‍कृति को नजदीक से समझने के लिए आवश्‍यक है कि उन्‍हें (विदेशी छात्रों को) इसमें सम्मिलित किया जाए जैसे विवाह, जन्‍मोत्‍सव, स्‍वतंत्रता दिवस, गणतंत्र दिवस जैसे विभिन्‍न त्‍यौहारों में छात्रों को आमंत्रित किया जाए उन्‍हें निरीक्षण का पर्याप्‍त अवसर उपलब्‍ध कराया जाए तो निश्‍चय ही छात्र इससे लाभान्वित होगें और विभिन्‍न अवसरों पर शब्‍दों का सार्थक चयन कर पाएँगे।
 
4.      अभिनय मंचन :
भारतीय परिवेश पर आधारित नाटकों का मंचन भी ऐसे छात्रों के लिए काफी लाभदायक होगा क्‍योंकि अभिनय के दौरान करके सीखने की पर्याप्‍त संभावनाएँ रहती है अत: छात्रों को यह लंबे समय तक स्‍मृत रहेगा।
 
5.      पूर्णत: शारीरिक प्रदर्शन विधि‍ (Total physical responses method) :
इस विधि‍ के अंतर्गत एक व्यक्त‍ि कुछ क्रियाओं का शारीरिक प्रदर्शन  करता है तथा कुछ समय के लिए शांत होकर वह समय उपलब्ध करता है भाषा विद्यार्थी को कि वह सोचे । तदन्तर भाषा विद्यार्थी द्वारा पूछे जाने पर वह उक्त व्यक्त‍ि द्वारा किए गए क्रियाओं को सिखे जाने वाली भाषा के जवाब देता है । यदि भाषा में कुछ संशोधन की जरूरत पड़ती है तो निश्‍चय ही भाषा सहायक उसे उपलब्ध कराता है । भाषा को सीखने का यह एक व्यवस्थि‍त तरीका है जिसे उपलब्ध कराया जा सकता है ।
 
6.      भारत में विभिन्‍न परिवारों के साथ रहने का अवसर उपलब्‍ध कराकर:
विदेशी छात्र भारतीय परिवार के सदस्‍यों के रहन -सहन, खान-पान, रूचि, आदि को गौर से निरी‍क्षत करें एवं उसको रिकार्ड करते चलें। यदि उन्‍हें किसी चीज के बारे में पूछना हो तो वे परिवार के सदस्‍यों के साथ चर्चा कर सकते हैं। ऐसा करना उनके लिए काफी लाभदायक होगा और वे भारतीय संस्‍कृति की एक मजबूत समझ विकसित कर पाएँगे। उनके द्वारा हिंदी भाषा के प्रयोगों पर भी इसका प्रभाव स्‍पष्‍ट परिलक्षित होगा।
 
7.      भाषा सहायक (Language helper):
छात्रों को प्रतिदिन अपने भाषा सहायक के साथ बाहर निकलना चाहिए एवं विभिन्‍न प्रसंगों को देखकर अपने भाषा सहायक की मदद से चीजों को समझने का प्रयास करना चाहिए साथ ही अपने साथ हमेशा एक नोट पैड रखना चाहिए जिस विभिन्‍न परिदृश्‍यों में इस्‍तेमाल कर रहे भाषा को भाषा सहायक ( language helper ) की मदद से समझा जा सकता है।
 
8.      दृश्‍य संकेतन विधि‍ (Point listening technique ) : -
परिस्थिति के आधार पर वार्तालाप: छात्र समूह में तैयारी करके किसी परिस्थिति के आधार पर वार्तालाप प्रस्‍तुत कर सकते हैं। ऐसा करते-करते वे भाषा प्रयोग के सामाजिक नियमों से स्‍वाभाविक रूप से परिचित हो जाते हैं। उदाहरण के तौर पर यदि एक छात्र बीमार है वह डाक्‍टर के पास अपनी बातों को रखता है एक कृत्रिम परिस्थिति का निर्माण किया जाता है जिसमें एक छात्र बीमार है और सुझाव माँग रहा है। इस प्रकार की परिस्थिति भाषिक संस्‍कृति शिक्षण में सहायक होगी।

            अन्‍तत: इस पर सोचने की जरूरत है कि दुनिया और भारत में भी सांस्‍कृति भिन्‍नता के साथ सांस्‍कृतिक वैश्विकता का भी एक प्रभावशाली आधुनिक वातावरण है। निश्‍चय ही यह सांस्‍कृतिक सम्मिश्रण का युग है। इस पर भी विचार करने की जरूरत है कि दो भाषाओं के बीच विपरीत बिंदुओं के साथ कुछ साम्‍यमूलक बिंदु भी होते हैं। खासकर भारतीय समाजों में सांस्‍कृतिक भाषिक भिन्‍नता के साथ-साथ बुनियादी एकता के भी बहुत से सूत्र हैं। इसी परिप्रेक्ष्‍य में हिंदी भाषिक संस्‍कृति शिक्षण को देखने की जरूरत है । तभी हम हिंदी को एक वैश्विक भाषा के रूप अंगीकृत कर जाएँगे।

संदर्भ ग्रन्‍थ सूची :

  • नरोना, अंजली (2008) पढ़ना सीखने में किताबों का महत्त्व, एकलव्‍य प्रकाशन, बॉक्‍स कैरोगैटर्स एंड प्रिंटर्स, भोपाल
  • Asher, James.J(2000) Learning Another Language Through Sctions,Oaks productions, U.K

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