अविनाश मिश्र की छह कविताएँ

१- स्थितियाँ कैसी भी हों 
कभी-कभी सफलता पूरी मिलती है 
कभी-कभी अधूरी मिलती है 
कभी-कभी नहीं मिलती है 

स्थितियाँ कैसी भी हों
मैं सफलता से आसक्त 
और असफलता से विचलित नहीं होता 

स्थितियाँ कैसी भी हों
मैं कभी सागर से भरा प्याला नहीं तोड़ता 
कभी ऊंची आवाज में बात नहीं करता 

स्थितियाँ कैसी भी हों
यह मेरा उत्तर नहीं 
मेरा प्रश्न है :
‘मैं क्या कर सकता हूं’
***

२- उम्मीदें उपस्थित हैं 

मुझे दुनिया से उम्मीदें हैं
दुनिया को मुझसे

कभी-कभी  
यहां कोई उम्मीद नहीं होती 
कभी-कभी होती हैं 
उम्मीदें  

क्या नहीं है वहां  
जहां हैं उम्मीदें
*** 

३- अपराध-कथा 

एक रात मैंने अपनी आवाज खोकर 
आंखें बंद कीं 
नींद नहीं थी वहां
प्रायश्चित था— 
बेआवाज हो चुकने पर 

अगली सुबह 
बदला जा चुका था मेरा इतिहास 

सारे उजालों में 
अपने हिस्से की मनुष्यता के लिए भटका मैं 
मुझे इनकार मिला 
***

४- सभ्यता 

शुद्ध उच्चारण से नहीं चलता व्यवसाय
गलतियां कभी भी सुधारी जा सकती हैं 
इसलिए वे होती ही रहती हैं 

मैं यहां तक पहुंचा हूं 
इसमें किसी का कोई हाथ नहीं 
हालांकि मैं उद्धृत करता हूं 
बहुत जगहों पर बहुत सारे नाम 
लेकिन कृतज्ञताबोध अब जाता रहा है   
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५- फिर हमने यह देखा 
रघुवीर सहाय के प्रति 

चिंताएं कुछ अपनी कम नहीं हुईं 
सब हैं अब तक वैसी की वैसी
हां कुछ बदलीं पर मरहम नहीं हुईं 

वह कील अब भी रोज निकलती है 
इस दुःख को अब भी रोज समझना पड़ता है 
टीस भला ये क्यों नहीं पिघलती है  

पास का कागज कम पड़ता जाता है 
‘अपमान, अकेलापन, फाका, बीमारी’
वक्त यही बस लिखना सिखलाता है?

हक के लिए हम अब तक लड़ते हैं 
सारे महीने लगते हैं लंबे-लंबे 
पैसे अब भी हमको कम पड़ते हैं 

हम जब-जब कहते हैं अब अच्छा होगा 
समय और कठिन होता जाता है 
हमारा कहना आखिर कब सच्चा होगा? 
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६- विरुद्ध प्रस्थान 
एक शिखर पुरुष का आत्मवक्तव्य

मेरे लिए सब कुछ अपने व्यापक वैभव में भी उदासीन है 
मेरे जानशीं मेरी नाउम्मीदियों को खारिज करते रहते हैं
जबकि उम्मीदें उनसे भी उतनी ही दूर हैं

वे उम्र के साथ सब कुछ सीख लेने के भ्रम में हैं 
यह आवारगी उन पर जंचती है और मेरे जख्म मुझ पर 

सारे दर्द बेहद सलीके से रहते हैं मेरे साथ 

मैं मृत्यु पर सबसे कम सोचता हूं
मेरे आस-पास जीवित बने रहने के लिए
वाजिब वजहें और योजनाएं मौजूद हैं 
मेरे खब्त ने मेरे बाल जल्द ही दूधिया कर दिए हैं
लेकिन सारी धुनें अब भी अपनी जगह स्थिर हैं
बीती हुई प्रेमिकाएं मेरी झुर्रियां सहलाती हैं
मैं अडिग रहता हूं एक पूर्वाग्रह पर 

मेरे बाद अगर तुम मुझे पढ़ना तब इस तथ्य पर गौर मत करना  
कि कई गोरखधंधों में मैं भी शामिल था... 
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