ओमप्रकाश पाण्डेय 'नमन' की कविताएँ

ओमप्रकाश पांडेय "नमन"
नेता सियारों का

ये सत्ता का मद है
या नद है विकारों का
बह रहा मवाद है
इसमें संस्कारों का ...
गर्व अज्ञानता का
भ्रम है महानता का
कर्महीन स्वर है
हमारे कर्णधारों का ...
शेरों की खाल ओढ़े
देख लोमड़ियों के झुण्ड
होशियार बन बैठा
नेता सियारों का ...

हम गर दिल लगाएं

हम गर दिल लगाएं तो क्या कीजियेगा
अगर पास आएं तो क्या कीजियेगा ?

हम आँखें लड़ायें तो क्या कीजियेगा
मोहब्बत जताएं तो क्या कीजियेगा ?

हम गर मुस्कराएं तो क्या कीजियेगा
जो बाँहों में आएं तो क्या कीजियेगा ?

हम गर रूठ जाएँ तो क्या कीजियेगा
न मानें मनाएं तो क्या कीजियेगा ?

हम आंसू बहाएं तो क्या कीजियेगा
बगावत पे आएं तो क्या कीजियेगा ?

ख्वाबों का टूटा महल

ख्वाबों का टूटा महल लिख रहा हूँ
तेरी याद में इक गजल लिख रहा हूँ।

बहा है मेरी आँखों से जो बरसों
तेरी आँख का वही जल लिख रहा हूँ।

मेरी तन्हाईयाँ और तेरी इबादत
मोहब्बत का एक एक पल लिख रहा हूँ।

मेरी चाहतों की अबूझी कहानी
दिल कैसे हुआ है कत्ल लिख रहा हूँ।

बहुत कुछ है खोया तुझे चाहने में
कहानी वही आज कल लिख रहा हूँ।

परी तुम नहीं हो न हो हूर कोई
मैं फिर भी तुम्हे अपना कल लिख रहा हूँ।

बहाना

मेरा हंसना भी एक बहाना है
सारी दुनियाँ से गम छिपाना है।

दिल भले रो रहा है उसके लिए
अश्क उसको नहीं दिखाना है।

यार की अपनी होगी मजबूरी
उसपे तोहमत नहीं लगाना है।

पीठ में जिसने भोंका है खंजर
उसके घर फूल ले के जाना है।

बेवफा ही सही है यार मेरा
उसको एक बार फिर मनाना है।

वतन कितना अजीज है हमको
सारी दुनिया को यह बताना है।

कोई कितने भी लगा ले पहरे
दिल जिसपे आना है तो आना है।

प्रेम के हस्ताक्षर

मैं प्रेम हूँ
आँसू  हूँ
व्यथा हूँ
अनकही कथा हूँ।

मैं दर्द हूँ
करुणा हूँ
वेदना हूँ
अव्यक्त चेतना हूँ।

मैं गीत हूँ
ग़ज़ल हूँ
आस हूँ
अनबुझी  प्यास हूँ।

मैं आस्था हूँ
विश्वास हूँ
कल्पना का
अनन्त आकाश  हूँ।

मैं जहाँ भी हूँ
जैसा भी हूँ
तुम्हारा हूँ
तुम्हारे लिए हूँ ।