परिवर्तन लघुकथा

सुदर्शन
~सुदर्शन


किसी नगर में एक बेपरवाह, अभिमानी नवयुवक रहता था। उसका नाम सईद था। वह बड़ा ही सुंदर था - उसका रंग गोरा था, चेहरा-मोहरा भी अच्‍छा था और आँखों में मोहनी थी। परन्‍तु वह मूर्ख था।

जब वह बाजार जाता था तो रास्‍ते में एक बूढ़े फकीर को देखकर हँसा करता था।

उसकी कमर झुक गई थी, उसके सिर के, दाढ़ी के और मूँछों के बाल सफेद हो चुके थे और आँखों में यौवन की चमक के स्‍थान पर बुढ़ापे की उदासीनता थी।

वह बूढ़ा था। और सईद उसे देखकर हँसा करता था।

एक दिन सईद ने स्‍वप्‍न में देखा कि वह बूढ़ा हो गया और उसकी कमर झुक गई है। उसके सिर के, दाढ़ी के और मूँछों के बाल सफेद हो चुके हैं और आँखों में यौवन की शक्ति के स्‍थान पर बुढ़ापे की उदासीनता आ गई है।

जब वह जागा तो अपने स्‍वप्‍न पर देर तक हँसता रहा।

परन्‍तु बाजार जाते समय सहसा उसने बूढ़े फकीर के निस्‍तेज मुख के दर्पण में अपनी जवानी की छाया देखी और उसे पहचानने में दूर न लगी।

सईद वहाँ रुक गया और उस फकीर को देखकर उसके होंठों की हँसी होंठों पर मर गई।

आज, किसी नगर में एक युवक रहता है। उसका नाम सईद है।

वह बड़ा ही सुंदर है - उसका रंग गोरा है। चेहरा-मोहरा भी अच्‍छा है और आँखों में मोहनी है।

परन्‍तु अब वह मूर्ख नहीं रहा, न वह किसी बूढ़े को देखकर हँसता है।