काव्य-प्रहेलिका: तीन बालपहेलियाँ

नूरेनिशाँ  

1. काम समय से जो कर पाए 
मैं ना होती जग में सारे,
बन ना पाते काम तुम्हारे।
टिक-टिक करके चलती जाऊँ,
लोगों को मैं समय बताऊँ।
काम समय से जो कर पाए,
वो ही मेरा नाम बताए।

2. झंडा ऊँचा वो लहराए  
चलती जाऊँ, चलती जाऊँ,
लोगों को मैं नज़र न आऊँ।
मैं केवल एहसास कराऊँ,
पर सबकी साँसें चलवाऊँ।
जो भी मेरा नाम बताए,
झंडा ऊँचा वो लहराए।

3. जंगल का राजा कहलाऊँ 
हरे-भरे हैं सारे जंगल,
जंगल का राजा कहलाऊँ।
घोड़ा, गधा, हिरन या भालू,
जब चाहूँ तब चट कर जाऊँ।
नाम बताओ, यदि तुम मेरा,
तुमको वन की सैर कराऊँ।

ज़रा सोचिये और बूझिये इन तीन पहेलियों के उत्तर