पत्र जिसके कारण अमेरिका में परमाणु बम बनाने की प्रक्रिया तेज़ हुई

अल्बर्ट आइंस्टीन का फ़्रेंकलिन रुज़वेल्ट के नाम पत्र

-मेहेर वान

मेहेर वान
इस पत्र को अमेरिका में नाभिकीय हथियार बनाने की अंधी दौड़ की शुरुआत का महत्वपूर्ण कारण माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि यह पत्र लियो सीलार्ड ने तत्कालीन अमरीकी राष्ट्रपति रुज़्वेल्ट के नाम अल्बर्ट आइंसटीन की तरफ़ से लिखा था, वैज्ञानिक लियो सीलार्ड ने नाभिकीय श्रंखला अभिक्रिया की खोज की थी। हालाँकि आइंसटीन ने इस पत्र के सभी परिणामों की पूरी ज़िम्मेदारी खुद स्वीकार की थी। आइंसटीन ने इस पत्र को “अपने जीवन की सबसे बड़ी ग़लती” माना था। अल्बर्ट आइंस्टीन के इस पत्र को अमेरिकी राष्ट्रपति रुज़्वेल्ट ने गंभीरता से लिया था और परिणामस्वरूप अमेरिका के परमाणु बम निर्माण सम्बन्धी “मेनहेटन प्रोजेक्ट” की शुरुआत हुई थी।

अल्बर्ट आइन्स्टीन
ओल्ड ग्रोव रोड, नसाऊ प्वाइन्ट, पेकोनिक, लॉन्ग आइलैन्ड
2 अगस्त, 1939

सेवा में,
फ़्रेंकलिन डी. रूज़्वेल्ट
राष्ट्पति, संयुक्त राज्य अमेरिका,
ह्वाइट हाउस, वाशिन्गटन, डी.सी.

श्रीमान्,
ए. फ़र्मी और एल. सीलार्ड के द्वारा किया गया कुछ नवीनतम कार्य, जो कि मुझे पान्डुलिपि के रूप में भेजा गया है; मुझे आशान्वित करता है कि यूरेनियम तत्व, निकट भविष्य में ऊर्ज़ा के नवीनतम और महत्वपूर्ण स्त्रोत के रूप में परिवर्तित किया जा सकेगा। इस बीच उभरकर सामने आयी॑ परिस्थितियों के कुछ पहलू आँखें खुली रखने और आवश्यकता पड़ने पर प्रशासन की ओर से त्वरित प्रतिक्रिया की पुकार करते प्रतीत होते हैं। अत: मुझे विश्वास है कि निम्नलिखित तथ्यों और सिफ़ारिशों की ओर आपका ध्यान खींचना मेरा कर्तव्य है।

पिछ्ले चार महीनों में, फ़्राँस के जुलियट और अमेरिका के फ़र्मी और सीलार्ड के शोध कार्य के ज़रिये यह सम्भव हो चुका है – कि यूरेनियम के अत्यधिक द्रव्यमान में नाभिकीय-अभिक्रिया स्थापित करना संभव है, जिसके द्वारा अत्यधिक मात्रा में ऊर्जा और रेडियम जैसे तत्व उत्पन्न हो सकेंगे। प्रतीत होता है, कि ऐसा निकट भविष्य मे संभव हो सकेगा।

यह नया तथ्य (परमाणु) बमों के निर्माण का रास्ता तैयार करेगा और ये कल्पनीय है (यद्यपि बहुत कम निश्चित) कि अत्यधिक, अप्रत्याशित क्षमता वाले नई तरह के बमों का निर्माण भी किया जा सकेगा। नाव के द्वारा ले जाकर, किसी बन्दरगाह पर यदि इस तरह के केवल एक बम का विस्फ़ोट किया जाये, तो यह बन्दरगाह और उसके आस-पास की कुछ बस्तियों को बहुत अच्छी तरह से ध्वस्त कर सकता है। हाँलाकि, ये बम हवाई यातायात के लिये काफ़ी भारी सिद्ध होंगे।

संयुक्त राष्ट्र के पास युरेनियम के अयस्क अत्यधिक घटिया और काफ़ी कम मात्रा में हैं। कनाडा और पूर्व चेकोस्लोवाकिया में (यूरेनियम के) कुछ अच्छे अयस्क हैं, जबकि युरेनियम का सबसे महत्वपूर्ण स्त्रोत बेल्ज़ियन कॉन्गो है।

परिस्थिति को ध्यान में रखते हुए आप ऐसी आशा कर सकते हैं, कि प्रशासन और अमेरिका में काम कर रहे भौतिकविदों के बीच आपसी रिश्ते स्थायी रहेगें। इस स्थिति को प्राप्त करने का आपके लिये एक सम्भव रास्ता यह हो सकता है, कि इस कार्य से सम्बन्धित किसी व्यक्ति को यह कार्य सोंप दें, जिस पर आपको भरोसा हो, हालाँकि जो व्यक्ति कार्यालयी क्षमता से परे अपनी सेवायें भी दे सके। उसके कुछ कार्य निम्नलिखित भी हो सकते हैं :-
(क) सरकारी विभागों से सम्बन्ध रखकर तात्कलिक प्रगति के बारे में उन्हें अवगत रखना, सरकारी क्रियाकलापों के लिये सिफ़ारिश करना; विशेष रूप से युरेनियम अयस्क की पूर्ति की सुरक्षा की समस्या की ओर संयुक्त राष्ट्र का ध्यान आकर्षित करना।
(ख) विश्वविद्यालयी प्रयोगशालाओं में सीमित बज़ट के साथ हो रहे प्रायोगिक कार्य (अनुसन्धान) की गति को तेज़ करना। यदि इस तरह के आर्थिक सहयोग की आवश्यक्ता है तो आपके और उसके व्यक्तिगत सम्बन्धों के ज़रिये जो लोग इस समस्या के लिये सहयोग के इच्छुक हैं, उनसे आर्थिक सहयोग उपलब्ध कराना और इसके साथ ही उन औद्योगिक प्रयोगशालाओं की सहकारिता को भी प्राप्त करना, जिनके पास आवश्यक उपकरण उपलब्ध है॑।
मैं समझता हूँ कि जर्मनी, वास्तव में चेकोस्लोवाकिया की खदानों से यूरेनियम की बिक्री बन्द कर चुका है, जिन पर कि उसने पहले कब्ज़ा किया था। उसके (जर्मनी) इस ज़रूरी कदम को इस तरह समझा जाना चाहिये, कि जर्मनी के प्रति (उप) राष्ट्र सचिव का पुत्र वॉन वीज़सेकर (प्रसिद्ध और अत्यन्त प्रतिभाशाली नाभिकीय भौतिकविद) कैसर-विल्हेम इन्स्टीट्यूट, बर्लिन से सम्बन्धित है। जहाँ युरेनियम पर अमेरिका में किया गया कुछ (शोध) कार्य पुनः दोहराया जा रहा है।

आपका आत्मीय
अल्बर्ट आइन्स्टीन

राष्ट्रपति रुज़वेल्ट का प्रो. आइंसटीन को जवाब
अक्टूबर 19, 1939

मेरे प्रिय प्रोफ़ेसर,
आपके हालिया पत्र और रोचक और आवश्यक संलग्नक के लिये आपका धन्यवाद देना चाहता हूँ।
मुझे यह आँकड़े इतने महत्वपूर्ण लगे कि मैंने यूरेनियम तत्व के सम्बन्ध में आपके सुझावों की संभावनाओं को विस्तार से जाँच करने के लिये एक बोर्ड का गठन कर दिया है जिसमें मानक ब्यूरो के प्रमुख और थल सेना और नौसेना से चयनित प्रतिनिधि शामिल हैं।
मुझे यह कहते हुये खुशी हो रही है कि डॉ. साच्स इस कमेटी के साथ काम और सहयोग करेंगे और मैं यह महसूस करता हूँ कि यह इस विषय को संभालने का सबसे व्यावहारिक और प्रभावशाली तरीका है।

कृपया मेरी ओर से धन्यवाद स्वीकार करें।
फ़्रेंकलिन रुज़वेल्ट