सम्पादकीय अक्टूबर 2016

अनुराग शर्मा
नमस्कार मित्रों,

बूंद-बूंद से सागर भरता है। एक एक अक्षर करके ग्रंथ रच जाते हैं। आप सभी रचनाकारों तथा पाठकों के सहयोग से आज देखते-देखते द्वैभाषिक पत्रिका सेतु का पांचवां अंक भी आपकी सेवा में प्रस्तुत है। हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में सेतु ने पहली काव्य प्रतियोगिता की घोषणा की थी। सेतु द्वारा दिये जा रहे नकद पुरस्कारों के साथ ही अंतर्राष्ट्रीय हिंदी समिति ने प्रतियोगिता के एक विजेता को (मताधिकाररहित) आजीवन सदस्यता का उपहार देने को सहमति दी है इसके लिये हम उनके आभारी हैं। आज इस प्रतियोगिता की अंतिम तिथि थी।

इस प्रतियोगिता में जिस प्रकार आपने अपेक्षा से कहीं अधिक रचनाएं भेजकर हमारा उत्साहवर्धन किया है, वह सेतु के सम्पादन मण्डल के लिये गर्व का विषय है। किंतु साथ ही मुझे यह कहते हुए संकोच भी हो रहा है कि कुछ प्रतियोगी रचनाओं के साथ-साथ प्रकाशन के लिये हमें भेजी गई अन्य कई रचनाएं भी यूनिकोड में न होने के कारण हम प्रयोग कर सकने में असमर्थ हैं। इसी कारण आज मैं एक बार फिर आपका ध्यान रचना भेजने के नियमों की ओर आकर्षित करना चाहता हूँ जिनका सारांश निम्न है:
सेतु में प्रकाशन के उद्देश्य से भेजी गई रचना यूनिकोड में टंकित, स्वरचित, मौलिक, व अप्रकाशित होनी चाहिये। पहली बार रचना भेजते समय उसके साथ लेखक का संक्षिप्त परिचय तथा स्पष्ट चित्र भी भेजें। रचना भेजने से पहले लेखकों से निवेदन (विस्तृत नियम) पढकर कृपया उनसे सहमति भी दें।
सेतु में प्रकाशित रचनाओं पर आपकी प्रतिक्रिया का भी स्वागत है। क्या अच्छा लगा क्या बुरा, और क्या-क्या पढना चाहेंगे, आदि, के बारे में आप अपने विचार बेझिझक हमें लिखें, चाहे ईमेल से या फिर वैबसाइट पर उपस्थित फ़ॉर्म भरकर।

नवम्बर मास द्वार पर दस्तक दे रहा है। उत्सवों का समय आरम्भ हो गया है, और साथ ही आ रहा है शीत का प्रकोप। अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखें और साथ ही ध्यान रखिये अपने उन भाई-बहनों का जो हमारी-आपकी तरह भाग्यवान नहीं हैं, जिनके पास रहने को घर या शीत से बचने को पर्याप्त वस्त्र नहीं हैं। जितना हो सके, उनकी सहायता करें। याद रहे बूंद-बूंद से ही सागर भरता है।

शुभकामनाओं सहित,
अनुराग शर्मा