नारी तू नारायणी - कविता

लावण्या शाह  
बिटिया तू तो ब्याही भली बिदेस
ना वा घर ताकौ ना ये घर थारो

पर पूरा जग समाया थारी कोख !
तू शाश्वत संगीत, तुका का अभंग !

तू ही घट घट, एक ऊंकार बीज
तू टंकार, शिवोहम नाद, गर्जन

आदि अनादि भेद छिपाए उर में
आदि देव की भाव समाधि तू !

हे नारी तू नारायणी भवतारिणी !