आशियाने में सुख

नीरा त्यागी

नीरा त्यागी 
 किटी ने वरुणा को मीटिंग समाप्त होते ही फोन किया ....वरूणा की हेलो सुनते ही किटी लगातार बोलती गई-
"तुम घर पर हो नकहाँ रहती हो तुम? जब भी फोन करती हूँ आन्सर मशीन से ही बात होती है। मुझे अवाइड तो नहीं कर रही? कुश छुट्टियों में एक सप्ताह के लिए अपने पिता के पास हैं घर जाकर बोर हो जाउंगी। बहुत दिन हो गए मिले हुए, तुम्हारे घर के पास ओकवुड रोड पर मीटिंग में आई थी और अब पांच मिनट में तुम्हारे घर पहुँच रही हूँ"

वरुणा के हाँ या ना कहने की किटी ने ना तो हाँ या ना कहने की  गुंजाइश छोड़ी और ना ही वरूणा का जवाब सुनने का इंतज़ार किया। दस मिनट से पहले ही घंटी बज उठी... वरुणा दरवाज़ा खोलते ही बोली 
"अरे वाह बड़ी स्मार्ट लग रही हो..." 
किटी की घुटनों से ऊँची नीले- सफ़ेद धारियों की ड्रेस, पांच फुट आठ इंच की हाईट पर तीन इंच की पेन्सिल हील... 
"सी आई मेक अन एफ्फर्ट ..." किटी मुस्कुराते हुए बोली

सोफे पर बैठते ही किटी के जरूरत से ज्यादा भरे हुए शरीर की तहों से निकल कर, उसके लम्बे खड़े शरीर की स्मार्टनेस एकाएक सोफे पर पसर गई..."मुझे इस तरह मत देखो वरुणा! महीने भर से जिम नहीं गई यह जुकाम- खांसी पीछा नही छोड़ता। चलो पहले एक कप चाय दो फिर दोनों मिल कर खाना बनायेंगे..."  किटी ने सफ़ेद टीशू के बीच नाक दबा शु-शु की आवाजें निकालनी शुरू कर दी...."इंग्लिश चाय पियोगी या इन्डियन?" "वरूणा अदरक वाली इन्डियन टी खूब सारी चीनी और दूध डाल कर। तेरे पास जब भी आती हूँ अपनी डायबिटीज़ घर छोड़ आती हूं महीनो हुए इन्डियन टी पिए... अरे विपिन कहाँ है उसकी गाड़ी तो बाहर खड़ी है? " किटी ने गर्दन घुमा खिड़की से बाहर झांकते हुए पूछा  "वो बेडरूम में आराम कर रहा है ..." वरुणा ने रसोई जाने को मुड़ी और उसके पीछे-पीछे किटी भी चल दी .."कुछः कह तो नहीं रहा था मेरे आने के बारे में..." किटी ने पूछा "अरे नहीं क्या कहेगा वो... उसे मालूम ही नहीं तुम यहाँ हो  " वरुणा ने चाय के पतीले में पानी भरते जवाब दिया...  जब से किटी और कमल का तलाक हुआ है वह वरूणा से मिलने तभी आती है जब विपिन घर से बाहर हो... कमल और विपिन अच्छे दोस्त थे किन्तु अब वह एक दूसरे के संपर्क में नहीं हैं। 

अदरक वाली चाय की चुस्की और हल्दीराम की दाल-मोठ फांकने के बीच दोनों ने दफ्तर की राजनीति, घर का ख़त्म ना होने वाला काम, टीनेजर की विद्रोही प्रवृत्ति और नये गेजेट्स की मांग से लेकर सुख, सकून की तलाश की ढेर सारी बातें कर डाली और इन बातों का अर्थ समस्याओं का समाधान ढूँढना नहीं सिर्फ एक दूसरे को तसल्ली देना था।   

रसोई में हर शाम की तरह वही सदियों पुरानी खटर-पटर...  सिंक में पानी चलता हुआ, बर्तनों की आपस में टन-टन, दराज और दरवाजे की ढप-ढप, प्रेशर कुकर की शू-शू, माइक्रो वेव की ट्रीन-ट्रीनचापिंग बोर्ड पर दाल के छोंक के लिए प्याज और अदरक कटने की खट-खट। इसके बीच दोनों की हँसी और बातें और पता नहीं कब खाना तैयार। वरुणा फुल्के बना चुकी थी, पलथन का आटा चकले की गोलाई छोड़, उसके चारों और बिखरा हुआ और फर्श पर भी चप्पलों से चिपकता हुआ। फर्श पर आलू के छिलकों के छोटे मोटे अवशेष के साथ हरे धनिये के दो एक पत्ते भी पड़े हुए। वरुणा जीरा, प्याज को कढ़ाई से उठते गर्म घी के धुएं में डाल, झाड़ू उठाने को झुकी 
"अरे इस काम को खाना खाने के बाद कर लेती" सिंक में बर्तन खड़काती किटी ने कहा। 
"विपिन को फर्श पर जरा भी कुछ बिखरा बर्दाश्त नहीं होता, बेमतलब उसे गुस्सा आ जाएगा।" वरुणा सकेरते हुए बोली।  
उन्हे समझ नहीं आया यह हुआ क्याविपिन तूफ़ान की तरह रसोई में घुसा और ज्वाला मुखी की तरह फट कर दरवाजे से बाहर चला गया वरुणा जिसके ऊपर प्रहार हुआ वह हाथ में झाड़ू लिए वहीं फ्रीज़ हो गई। किटी जो सिंक के पास खड़ी बर्तन धो रही थी उसके शरीर की वो हालत थी जो हवा में पत्ते की होती है। किटी की धड़कनें उसी त्रासदी से भर गईं जिससे उसने कई वर्ष पहले झेल कर मुक्ति पा ली थी या यह सिर्फ उसका भ्रम था कि उसने त्रासदी से मुक्ति पा ली है। किस तरह कूट - कूट कर भीतर भरी है, एक कंकर किसी ने उठाया नहीं कि दर्द का दरिया भीतर उफान मारता हुआ आखों के सामने तांडव करने लगता है। 

कमल के साथ आठ वर्ष पहले भोगा नरक आज की हकीकत बन जाता है मगर कमल में कम से कम दूसरों के सामने खुद को सभ्य और सौम्य पुरुष साबित करने के सभी गुण थेउसे अपनी इमेज की चिंता थी। उसे मालूम था  कि सभी के सामने धीरे सेकिटी के दमन ना होने वाले व्यक्तित्व के कौन से बटन दबाए कि उसका अनियंत्रित, छिन्न-भिन्न, बेपरवाह, चुनौती देने वाला रूप मित्रों और रिश्तेदारों के सामने आये और वह सभी की सहानुभूति बटोरने में सफल रहे। वह कितनी मूर्ख थी! कमल की चाल न समझ सकी और उसकी एक चाल से किटी की दस बार मात हुई। कभी -कभी कमल की दी मानसिक और शारीरिक त्रासदी से वो डिप्रेशन में जाती, घर का और अपना ख्याल रखना छोड़ देती। डायबिटीज़ की दवाई लेना अक्सर भूल जाया करती, डायबिटीज़ के साथ उसका वज़न भी बढ़ जाता, एक ही जोड़े कपड़ों में दो-तीन दिन निकाल देती, फोन की घंटी बजती और उसके भीतर ना तो रिसीवर उठाने की और ना उसमें से आती आवाज़ झेलने की ताकत हुआ करती। दो वर्ष का  कुश ज़रा सी जिद करता तो उस पर चिल्ला पड़ती। उसकी मासूम आँखे पानी लिए नन्हे -नन्हे कदमों से दूसरे कमरे में दौड़ जातीं। 

फैला रसोई घर, वर्क -टाप पर खुले डिब्बे, मर्तबान, चाय और दूध से चिपकी चम्मचें, डाइनिंग टेबल पर डबलरोटी के कण, उघड़े पतीले में बची-खुची दाल, ऊपर तक भरा बदबूदार कूड़ेदान, सिंक में भरे सब्जी लगे बर्तन, बेडरूम में बिस्तर पर अस्त -व्यस्त कपड़े, कारपेट पर इधर-उधर निकाल कर फेंके मोज़े , बाथरूम के शीशे पर कुल्ले के छींटे, वाश बेसिन में चिपका टूथ-पेस्ट, गंदे कपड़ों की टोकरी, टाइल्स पर बालों की किरम काटी... घर के हाल को लेकर  कमल सभी के सामने उसे एक नाकाबिल पत्नी, गृहणी और मां साबित करने पर तुला रहता। उसका मन होता कमल एक बार उसे बांहों में भर ले और वह पिछले सप्ताह शरीर और आत्मा पर मिली सभी चोटें भुला दे। 

बेडरूम में फैले कपड़े वाशिंग मशीन में भरती, ड्रेसिंग टेबल के सामान को हटा, शीशे को पोंछ, नेल पालिश, लिपस्टिक, परफ्यूम, मास्च्राइज़र, आफ्टर शेव, ज्वेलरी सभी को करीने से लगा , पलंग को नंगा कर, उस पर इस्त्री की हुई चादर, तकिये और रजाई पर फूलदार रेशमी कवर चढ़ा, सभी सिलवटें हाथ से सहला थपथप की आवाज़ से दूर करती। वेक्यूम क्लीनर कमरे में आगे -पीछे दौड़ता, एयर फ्रेशनर से निकली लेवेंडर की खुशबू हवा में तैरती। बिस्तर में जाने से पहले शावर के नीचे अपनी सारी थकान पानी के साथ बहा कर, गीले बाल तकिये पर टिका, रजाई में सिकुड़े पाँव को सीधा करने के लिए पास लेटी देह से ऊष्मा चुराने की कोशिश में पाँव दोनों के बीच की अद्रश्य सीमाएं लांघने को आगे बढ़ते..  मगर वह बिस्तर से रजाई फेंक, स्प्रिंग की तरह कूद कर तमतमा उठता 
"यू स्मैल..." 
और तेज़ कदमो से कमरे से बाहर निकल जाता। वह लंबी लंबी सांस ले खुद को सूंघती, आँखों को तकिया भिगोने का और जुबान को नींद की गोली निगलने का मौका मिल जाता और वह सुबह तक के लिए बेहोश हो जाया करती। डाक्टर का दिया सिक- नोट एंटी-डिप्रेसेंट का असर, रात और दिन की नींद उसे दफ्तर और बाहर की दुनिया से दूर रखते। 

दो भाई ओर तीन बहनों में किटी सबसे छोटी थी। अपने अधिकारों के लिए लड़ना वह कोख में ही सीख कर आई, जब उसने भाई-बहनों को अपने छोटे होने का फायदा उठाने नहीं दिया तो कमल की क्रूरता को सहन करने के लिए सहिष्णुता कहाँ से लाती। फिर भी उसने उसे वर्षों तक कई बार माफ़ किया, वो एक अच्छा पिता है और वह नहीं चाहती कुश को वह अकेले बड़ा करे सिर्फ इसलिए उसने बर्दाश्त किया। गैस के बिल के लिए जुड़े पैसों को दोस्तों के साथ पब में उड़ा देना,  प्लास्टिक कार्ड दिखा कर वो पैसे खर्च करना जो बैंक में हैं ही नहीं और बिल आने पर उससे झगड़ना,  जितनी चादर हो उतने पैर फैलाना कमल को कभी नहीं आया। जब भी वो सेल में कम दामों पर कपड़े और सुपर मार्केट के बजाए बाज़ार से फल-सब्जी ढो कर लाती, कमल मुँह बिचका कर यही कहता- 
"यू पुअर इंडियन आर सो माइज़र..." 

वह अक्सर सोचती कि शादी से पहले वो क्रेस्टीना के साथ नौ वर्ष तक रहा क्या उसके साथ भी वह ऐसा ही बर्ताव करता होगा!! कमल ने बताया था हर इतवार को क्रेस्टीना के माता -पिता का उनके घर आना निश्चित था, वह उनके लिए हर इतवार को लंच तैयार करता, उन्हें उसके हाथ का बना रोस्ट चिकन बहुत पसंद था। वो जब भी अपने मम्मी-डैडी को कपूरथला से बुलाने की बात करती, वह हमेशा यह कह कर मना कर देता कि घर में एक्स्ट्रा बेडरूम नहीं है होटल में वो रहेंगे नहीं। आखिर कैनेडा से कमल के माता-पिता भी तो इसी घर में आकर रहते हैं। ऊपर से जब भी दोनों में झगड़ा होताकमल की मम्मी को यही कहतीं  
"तुझे किटी से बढ़िया लड़की मिल सकती है।" 

कुश के होने के बाद तक भी उन्होंने ऐसा कह कर बेटे पर लाड़ उड़ेलना नहीं छोड़ा। क्या करें क्रिस्टीना को घर वालों ने अपनाया नहीं अठारह वर्ष का कमल घर छोड़ कर चला गया था। अब पन्द्रह वर्षों बाद वापस मिला है तो इतने वर्षों का एकत्रित प्यार उस पर लुटाना जो है। वो भी तो मुँह बंद किये नहीं रहती, क्यों कहती है सास से कि 'छोंक के लिए चमचा भर नहींचम्मच भर घी डालो' 'प्रेशर कुकर भर कर नहीं इससे आधी दाल बनाओ' 'सिंक का नल धीरे खोलो, फर्श पर छपछप होती है' वो शायद उससे इन्ही बातों का बदला लेती हैं अक्सर कमल के सामने उससे यही कहती 
"उनकी कैनेडा वाली बहु तो कभी उनके सामने मुँह नहीं खोलती" 

कमल से उसने सोच-समझ कर शादी की थी। दोनों का पिछले जन्म के जीवन साथी वाले चैप्टर का इतिहास एक सा था, अंतर सिर्फ इतना था कि किटी का पन्द्रह दिन जितना लम्बा और कमल का नौ वर्ष लम्बा था।  
हेमंत एयर फ़ोर्स में फाइटर पायलेट था, शादी के बाद की पहली उड़ान उसकी आख़िरी उड़ान थी। उधर किटी का ऊँचा कद, गोरा-चिट्टा रंग, घुंघराले सुनहरे बाल, भूरी आँखे, हंसती थी तो नज़र उतारने के लिए गालों में गड्ढे पड़ते। जब भी गुरुद्वारे जाती लोग शादी की बात करते, जो उसका इतिहास नहीं जानते वो भी और जो जानते थे वो भी, कुँआरे लड़कों के रिश्ते सुझाते। उसे मालूम था उसका इतिहास उसके वर्तमान और भविष्य पर भारी पड़ेगा, इसलिए कोई ऐसा मिले जिसके इतिहास का पन्ना उसके पन्ने से मेल खाता हो।  

कमल की लन्दन वाली मौसी चंडीगढ़ में बुआ की लड़की की शादी में मम्मी से मिलीं, कितना लाड़-प्यार दिया था जब पहली बार किटी से मिली थी! उन दिनों कमल अपनी मौसी के पास लन्दन में रह रहा था क्रिस्टीना ने कमल को घर से निकाल दिया था उसके पास उन दिनों नौकरी भी नहीं थी और मौसी जल्द से जल्द अपनी ज़िम्मेदारी किसी और के हवाले करना चाहती थीं। अगले दिन उन्होंने किटी को कमल से मिलवाया, दरअसल उसकी मौसी उसे इसी उदेश्य से लन्दन से पंजाब लेकर आई थीं। उम्र अड़तीस वर्ष, उससे बारह वर्ष बड़ा होते हुए लगता नहीं था।  रंगे काले बाल, कमीज़ के दो खुले बटनडेनिम की ब्लू जींस और अनुभव से मिली स्मार्टनेस चेहरे की उम्र कम कर देते हैं। पहली मुलाक़ात में उसने कहा था 'इन्डियन वीमेन आर वीमेन आफ सब्सटेंस,  वह पहले किटी से क्यों नहीं मिला!' 

शादी के चार महीने बाद किटी कपूरथला से लन्दन गई और दो महीने बाद उसे ब्रेडफोर्ड में होमलेस होस्टल में जॉब मिल गया। कमल को पूरे सोलह महीने लगे नौकरी ढूँढने में और उसके लिए यह बात पचाना मुश्किल था कि किटी उससे ज्यादा कमाती है। कुश के होने के बाद उस पर नौकरी छोड़ने का दबाव बना रहा। 'घर का यह क्या हाल बना रखा है?'  'खुद को आईने में देखा है?' 'फोन क्यों नहीं उठा रही तुम?' 'वरुणा दरवाज़े से घुसते ही बोली' 

तुम बैठो तो सही पहले कुछ देर बात करो। किटी के आग्रह की परवाह किये बिना वरुणा कहती 
हाँ मुझे मालुम है तुम क्या कहोगी, कमल बुरा आदमी है, तुम्हें गाली देता है, हाथ उठाता है, अपनी सारी कमाई इधर-उधर उड़ा देता है, उसके क्रेडिट कार्ड का बिल हज़ारों में है, पार्किंग के फाइन उसने पे नहीं किये, उसकी माँ तुम्हें छोड़ने के लिए उकसाती है... लेकिन क्या तुम उसे छोड़ना चाहती हो? नहीं ना! घर और अपने आप को नेगलेक्ट करके तुम कमल से नहीं अपने आप से बदला ले रही हो। तुम यह घर छोड़ कर चली जाओ वह यही चाहता है ना? उसके पास तो नौकरी भी नहीं थी जब तुमने यह घर खरीदा था। कर दो उसे दान और ख़ोल दो दरवाज़े उस ब्लोंड के लिए जिसको वह रोज दफ्तर के लिए लिफ्ट देता है और तुम्हारी अनुपस्थिति में घर बुलाता है। वरुणा बोलती गई और किटी चुपचाप सुनती रही। 

कुश की मुस्कराहट, वरुणा की बातें, नौकरी, औरत के भीतर का योद्धा, किटी को सँभाल लेते। वो जिम ज्वाइन करती और ढीले हो गए ब्लाउज, स्कर्ट, जेकेट के बारे में सभी दोंस्तों को बताती।  

शनिवार का दिन था, कमल अपनी मौसी के घर लन्दन जाने की जिद कर रहा था। दोनों टेलिविज़न की आवाज़ से तेज़ चिल्ला रहे थे 

"मैं नहीं जाउंगी, . देयर इज नथिंग फार मी... एंड वी कांट अफ्फोर्ड द ट्रिप " किटी अड़ी हुई थी ब्रेडफोर्ड से लन्दन तीन सौ किलोमीटर दूरी के लिए पेट्रोल और वहाँ मौसी, उनके जवान बेटा- बेटी को रेस्टोरेंट में खाना खिलाने का फ़िज़ूल खर्च। वहाँ जाकर चाय भी खुद बनाओ, मौसी तो पुत्तर-पुत्तर का जाप लगाये सोफे पर से उसके पास से हिलने वाली नहीं। वो रसोई में गई नहीं बस कमल के कान में खुसर-फुसर... क्यों जाए वहाँ जहाँ उसकी कोई इज्ज़त नहीं। कमल के लिए मौसी से एक बार हाँ कर पीछे हटना उसकी शान के खिलाफ था। मौसी हर सूरत में उसके पुरुषार्थ को चुनौती देने वाली हैं, यदि वो खुद भी ना करेगा तो भी वो छूटते ही कहेंगी 

"किटी ने रोक दिया होगा।" 

अकेला जाएगा तो भी उसे सुनाएगी "वो तेरी बिलकुल नहीं सुनती" 
किटी नहीं चाहती इस्तेमाल होने के लिए वो वहाँ अकेला जाए...
"गो टू हेल बिच! यू डाई अलोन हेयर आई विल टेक कुश विद मी ..." चिंघाड़ता हुआ कमल सोते हुए कुश को उठाने के लिए बेडरूम की और मुड़ा। किटी ने आगे बढ़ कर उसका रास्ता रोकना चाहा, पर सब कुछ इतना जल्दी हुआ किटी को समझने का मौक़ा ही नहीं मिला। उसे सिर्फ याद है, गर्दन का कसना, दीवार में धम्म से आवाज़, चरखी सा घूमता सर, नाक से बहता टप -टप खून, उसकी सफेद टी शर्ट पर गोल-गोल लाल धब्बे। आज से पहले जिस नंबर को डायल करने की धमकी वो दसियों बार  दे चुकी थीकिटी ने वही फोन नंबर कांपते हाथों और सिसकियों  के बीच  दबा दिया। 

दस मिनट में ही पुलिस गई, किटी के लिए पुलिस ने एम्बुलेंस बुलानी चाही पर उसने मना कर दिया और कमल को पुलिस की गाड़ी ले गई, एक रात हवालात में रहा। किटी ने ग्रीवियस बोडिली हार्म के आरोप तो वापस ले लिए लेकिन कमल को बेघर कर दिया। तलाक लेने के लिए किटी को चंडी और चट्टान बनना जरूरी हो गया।कमल ने किटी को गैर जिम्मेदार, नाकाबिल पत्नी और माँ साबित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी और किटी ने उसे कंगाल करने में। 

आज उसे अपने आप पर हैरानी होती है कि कमल को सबक सिखाने के ज़नून में वो कितनी अंधी हो गई थी!  वरुणा ने कितना मना किया पर वह नहीं मानी। जब किश्त मैं दे रही हूँ तो उसके पास गाड़ी क्यों छोड़ दूँ? किटी आधी रात गए, कुश को सोता छोड़ चोरों की तरह घर से निकली। उसने पार्क प्लेस होटल के लिए टैक्सी ली। टैक्सीवाला बिगड़े मौसम और पेट्रोल के बढ़े दामो पर बात करता जा रहा था किन्तु उसे कुछ सुनाई नहीं दे रहा था। अपने चेहरे का रंग और घबराहट छुपाने के लिए वो ड्राइवर के बिलकुल पीछे वाली सीट पर बैठी थी और रियर मिरर से भी अपने को बचाए थी। होटल पहुँचते ही उसने होटल से आगे गाड़ी रोकने को कहा और टैक्सी का बिल चुका काँपते क़दमों और बेक़ाबू धड़कनों के साथ कार पार्क में घुसी। अँधेरे में उसने चोरों की तरह गाड़ी ढूँढी, इधर –उधर देख बटन दबाया, बी एम् डब्लू का दरवाज़ा खोल खुद को ड्राइविंग सीट पर धकेला और ज्यादा आवाज़ न हो उसे आहिस्ता से बंद किया। दरवाजा ठीक से बंद नहीं हुआदुबारा खोल फिर अपनी ओर खींचा। तीसरी बार में दरवाजा ठीक से बंद हुआ, जैसे ही गाड़ी स्टार्ट हुई उसने गाड़ी अंदर से बंद कर ली, उसे समझ नहीं आया अपनी ही गाड़ी को अपने ही घर लाना इतना डरावना भी हो सकता है। 

गाड़ी ले तो आई पर कई दिन तक वो रात में अचानक सोते से उठ जाती उसे आवाजें आती कोई बाहर का दरवाजा खटखटा रहा है, कोई गेराज का गेट खोल रहा है। किटी की इस करतूत पर नमक-मिर्च लगा, कमल ने मित्रों और पड़ोसियों से खूब सहानुभूति बटोरी। उस पर कीचड़ उछालने का उसे एक और कारण मिल गयाअब यह लड़ाई पति-पत्नी की नहीं, घर, बैंक बैलेंस, कार, टेलिविज़न, कुश का मेंटेनेंस, कुश की कस्टडी की और दो अहम के बीच थी। ऐसी परिस्थितियों में यदि कोई जीतता है तो दोनों तरफ के वकील। साल भर में तलाक हो गया। 
"आर यू आल राईट?" किटी ने जड़वत हुई वरुणा का हाथ पकड़ा और सिटिंग रूम में ले आई! दोनों चुपचाप एक दूसरे को ताक रही थीं। वरुणा के चेहरे का सफ़ेद रंग, आँखों में जमी पारदर्शी भीगी उदासी... ये सब उस वरुणा से कितने अलग थे जब वो उससे पहली बार मिली थी! उसे आज भी वो दिन याद है जब हांफती हुई किटी हाल में दाखिल हुई तो सबसे अपना लगने वाले एक चेहरे ने मुस्कुरा कर हाथ बढ़ाया था 
"माय नेम इज वरुणा, यौर्स?" 

उन दोनों कि बातें ऐसे शुरू हुई जैसे बरसों से बिछुड़ी आज अचानक मिल गई हों, अगले तीस मिनट में उन्होंने एक दूसरे के घर, परिवार, परिवेश, विदेश, स्वदेश के बारे में सब तहकीकात कर डाली। बातों ही बातों में किटी ने वरूणा को बताया उसे बेघर लोगों को बसाने का जॉब मिला है। उसे काम की तरफ से ही "डोमेस्टिक वायलेंस बाय नॉन मेन" की ट्रेनिंग पर भेजा गया। इससे पहले कि वरुणा अपने वहाँ होने का कारण बताती दस बज गए थे और ट्रेनिग शुरू होने का समय हो गया था। किटी को राहत मिली थी अब वह चौबीस औरतों के बीच अकेली भारतीय नहीं थी। मन ही मन हैरान हुई और वरुणा से एकाएक बहुत प्रभावित जब वरुणा ने खड़े होकर अपना परिचय दिया कि वहाँ पर आज वह इस कोर्स की ट्रेनर है वर्ना तो वरूणा को प्रोजेक्टर और लेपटाप सेट करते देख औरों की तरह उसने भी यही अनुमान लगाया था कि 'वह जरूर ट्रेनर की असिस्टेंट होगी।'

ट्रेनिंग की शुरुआत वरुणा ने एक प्रश्न से की थी
"हाव मनी आफ यू एक्सपीरिएंसड डोमेस्टिक वायलेंस?" एक बड़ा साधारण सवाल था लेकिन इसका उत्तर पच्चीस लोगों के सामने देने के लिए पच्चीस मंजिल से कूदने जितनी हिम्मत चाहिए। किटी ने कोशिश भी की लेकिन उसके हाथ ने पाँच खड़े हाथों के साथ खड़े होने से इनकार कर दिया।  

किटी यह हिम्मत कुछ वर्षों बाद तो जुटा पाई किन्तु वरूणा! कितना आत्मविश्वास था वरुणा के चेहरे और आवाज़ में! फिजिकल, इमोशनल, साइकोलोजिकल, सेक्सुअल, फाइनेंशल एब्यूज़ की परिभाषाएं जीवंत उदाहरण देकर समझाई थीं। वीडियो क्लिप देख कर एक महिला को रुलाई आने लगी तो वरुणा उसका हाथ पकड़ कर बाहर ले गई थी। लौट कर वह बता रही थी बच्चों और औरतों पर इसका क्या प्रभाव पड़ता है? 

किटी मन ही मन सोचती रही कि इस बारे में वो वरुणा से ज्यादा जानती हैवरुणा को क्या मालूम हिंसा की शिकार औरत पर क्या गुजरती है? कैसे कोई शब्दों के बाण से औरत के वजूद को पैरों तले रौंदता है, कैसे भीतर भड़कते शोलों को खुद के आंसुओं से बुझाना होता है, कैसे गर्दन पर पड़े नीले निशानों को स्कार्फ के लपेटों में छुपाया जाता है, कैसे गले की आवाज़ से दिल का हाल जान लेने वाली माँ से फोन पर झूठ बोलना है? जिसने तुम्हे दिन में प्रोस्टिट्यूट कहा हो कैसे उसके साथ बिस्तर साझा करना है? किटी यही सोचती रही वरुणा को कुछ भी मालूम नहीं, वो सिर्फ ट्रेनिंग दे रही है, अनुभव तो मेरे पास है। 

"ऐसी परिस्थितियों से निकलने के लिए औरतों के पास क्या विकल्प हैं? सरकार, पुलिस, वीमेन रेफियूज़ और अन्य एजेंसी किस तरह औरत की मदद कर सकते है? किटी को फिर महसूस हुआ विकल्प होते हुए भी कोई विकल्प नहीं है वीमेन रेफियूज़ चले जाना क्या आसान काम है दो मंजिले आरामदेह मकान से निकल कर चाल में रहने चल दो, जहाँ बिछे हुए पलंग के नीचे की जमीन को छोड़ कर हर इंच जमीन और छत किसी और परिवार के साथ बांटनी पड़ती है। रसोई के बर्तनों में खाना बनाना तो दूर उन्हें साफ़ करने का मन भी नहीं होता। कोरिडोर में लड़ते-झगड़ते बच्चों के झुंड, उनकी माँओं का एक दूसरे को गाली देना, रात देर तक क्लेश और कोहराम मचे रहना उसने यह अपनी आँखों से देखा है जब भी किसी पति द्वारा सताई बेघर औरत को लेकर वह वहाँ गई है .."
वरुणा चुप ना रह सकी और उसने बोल ही दिया  
"घर छोड़ने के बाद की जिंदगी का संघर्ष अक्सर औरतों को घर ना छोड़ने को मजबूर करता है वह खुद तो कष्ट उठा सकती है पर उसके साथ बच्चों को कितनी परेशानी होगी यह उन्हें बर्दाश्त नही होता।"  
वरुणा ने खुले दिल से किटी को वीमेन रेफियूज़ की वास्तविकता सभी से बांटने के लिए उत्साहित किया। यह उन दोनों की लंबी दोस्ती की शुरूआत थी और उस समय दोनों को यह नहीं मालूम था उन दोनों के बीच वेश भूषा, भाषा, प्रवास, संस्कार और संस्कृति की समानताओं के अलावा उनकी गृहस्थ जीवन में भी कितनी समानताएं हैं। वरुणा को हैरानी थी कि वो यह समानता पहले क्यों नहीं देख पाई और बरसों पुरानी दोस्ती के बावजूद वरूणा अपना नरक उससे क्यों नहीं बाँट पाई? वरुणा यहीं परदेस में पली- बढ़ी है वो छह वर्ष की थी जब उसके माता-पिता अफ्रीका से पहले लन्दन फिर ब्रेडफोर्ड में आकर बस गए थे। 

विपिन से वो ब्रेडफोर्ड यूनिवर्सिटी में मिली। वरुणा सोशल पॉलिसी में एम.ए. कर रही थी और विपिन ओवरसीज स्टूडेंट था वो भारत से टेक्सटाइल इंजीनियरिंग का कोर्स करने आया था। वह आर्थिक संकट में था, वरुणा ने अपने पिता से कह कर उनकी ग्रोसरी की दुकान में पार्टटाइम नौकरी लगवा दी। कुछ ही दिनों में विपिन ने पहले उसके मम्मी-पापा और फिर उसके दिल में जगह बना ली और कुछ ही महीने बाद वह परिवार का सदस्य बन गया। दो वर्ष पश्चात डिपोजिट के लिए अच्छी रकम जोड़ कर मकान खरीद लिया। 

विपिन को इंजीनियरिंग करने के बाद उसकी काबिलियत के अनुसार नौकरी नहीं मिली वह एक मिल में एडमिनिस्ट्रेटर का जॉब कर रहा था इस बात से वह काफी कुंठित रहता। वरुणा के आत्मविश्वास, गरिमा, अस्मिता, सहिष्णुता, विशाल ह्रदय और दोस्तों-रिश्तेदारों की प्रशंसा का पात्र होने ने उसे छोटा और असुरक्षित कर दिया था। सभी बातों पर अंकुश लगने लगे। अपनी कमियों और असफलता के लिए वरुणा को जिम्मेदार ठहराने लगा और हर बात में वरुणा को हीन साबित करना उसकी प्रवृत्ति बन गई। वरुणा चट्टान की तरह तो कभी साये की तरह उसके आगे-पीछे डटी रही।खामोशी उसका कवच और हथियार बना, किटी के सामने एक नयी वरुणा थी। वह उस वरुणा से कितनी भिन्न थी जो उसे पहली बार ट्रेनिंग रूम में मिली थी। बाहर और घर के भीतर की वरुणा दो अलग औरतें हैं साथ ही किटी ने आज देख लिया असंतोष और असुरक्षा की लपटों में झुलसता विपिन का व्यक्तित्व 
"वरुणा मुझे इतने वर्षों बाद समझ आया कमल से रिश्ता तोड़ने के बाद विपिन मुझे इतना नापसंद क्यों करता है"
"क्या मतलब है तुम्हारा?" 
"क्या तुम्हे नहीं लगता उसे डर है कि जो मैंने कमल के साथ किया कहीं तुम भी उसके साथ ऐसा ना कर दो। कहीं मैं उससे लड़ने के लिए तुम्हारी ताकत ना बन जाऊँ। कहीं मेरी स्वंत्रता तुम्हें भी ना रास आने लगे और तुम उससे रिश्ता तोड़ने की इच्छा करने लगो। मेरा वजूद उसके पुरुषार्थ के लिए एक चुनौती और धमकी है जिसे वो अपने घर से दूर रखना चाहता है ..."
"शायद.. खैर चलो तुम खाना खा लो।" वरुणा ने बात बदलते हुए कहा। 
"मुझे भूख नहीं है... मुझे नहीं मालूम मैं क्या करूँ? तुमने कभी मुझे बताया क्यों नहीं... मुझे लगा वह गुस्सा आने पर सिर्फ हवा में ही विष बाण छोड़ता है। तुम चाहो तो मैं पुलिस को फोन कर सकती हूँ, इन परिस्थितियों में शायद तुम अन्य औरतों से भी यही उम्मीद रखती हो, पर यह तुम्हारा घर है और निर्णय भी तुम्हारा होगा।
"मुझे इस बात का अफ़सोस है कि मेरे घर में तुम्हारा अपमान हुआ है पर अब तुम अपने घर जाओ" वरुणा ने धीरे से कहा।"
"मेरे जाने के बाद वो तुम्हारे साथ!!"
"वो मेरी समस्या है.... " वरुणा ने पलट कर जवाब दिया। 
किटी ने खड़े होकर अपना बैग उठाया और आगे बढ़ वरुणा को गले लगाकर धीरे से बोली 
"अपना ख्याल रखना।"
वरुणा किटी को बाहर कार तक छोड़ने आई। गाड़ी के आँखों से ओझल होने के बाद वरुणा को अपने भरे ब्लैडर का ख्याल आया। बाथरूम के शीशे में अपने चेहरे से बेचारगी धो डालने के लिए वो कई बार पानी फेंकती रही। वरुणा की पेट की भूख उसके भीतर मची उथल-पुथल ने निगल ली। अब तक तो वह बिना आँसू बहाये सब कुछ खामोश झेल गई लेकिन रात के अँधेरे में विपिन की देह का स्पर्शजैसे त्वचा पर सेंड पेपर रगड़ दिया हो, उसकी आत्मा तक छिल जायेगी।  वो सोचता है उसके गुनाह शरीर को ओढ़ कर बिस्तर की सिलवटों की तरह मिट जायेंगेवो चीखना चाहेगीवो अपने होंठों से उसके होंठ सी देगा। वो बर्फ की सिल्ली बनी रहेगी, वो उसकी छाती में सर छुपाने को जगह ढूंढेगा। उसकी आँखों के कोरों से बहती धार को वो अँधेरे में देख नहीं पायेगा और ना ही धड़कनो की खिडकी से कूद जाने की आगाज़ को वो सुन पायेगा। रेशमी, सफेद तकिये का भीगा कोना उसका दर्द सोखते हुए ना जाने कब उसे नयी सुबह के लिए सुला देगा। 

उसका ध्यान गर्दन पर लगी ताज़ा खरोंच पर जाता है, अँगुलियों से अपनी शर्ट के कालर थोड़ा ऊपर किए, अस्त-व्यस्त बालों को ब्रुश से सहेजा और वो बाहर निकली। रसोई में फिर से खटर-पटर शुरू है, बच्चों के कमरे से दनदनाता हुआ पॉप म्यूजिक हवा में गूंज रहा है। सिटिंग रूम में टेलिविज़न फोन हेकिंग और डबल डीप रिसेशन की खबरे उगल रहा है। अवेकाडो सलाद, आलू-गोभी, उड़द दाल से उठती भाप और हरे धनिये की महक, खीरे का रायता, रोटी, चावल टेबल पर प्लेट और कटलरी के साथ सज गया है.. 
"शिवानी और शिव नीचे आओ खाना ठंडा हो रहा है अपने पापा को भी बुला लो।" वरुणा ने सीढ़ियों के पास खड़े आवाज दी। वातावरण में चम्मचों और प्लेट्स की आवाज़ें सुखी परिवार के मंदिर की घंटी जैसी बज उठी हैं।