सनातन सेतु: नये हस्ताक्षर

पिट्सबर्ग विश्वविद्यालय के छात्र मनोज नरावा तथा जॉर्ज गार्डनर की मातृभाषा हिन्दी नहीं है परंतु विद्यालय में उन्होंने अन्य विषयों के साथ हिंदी भाषा भी सीखी है। 'सनातन सेतु' उनकी पहली हिंदी रचना है।
सेतु का उद्देश्य दो दुर्गम स्थानों को जोड़ना है। पिट्सबर्ग को सेतुओं का शहर कहते हैं। पिट्सबर्ग में कई महत्वपूर्ण स्थान हैं। यहाँ कई विश्वविद्यालय भी हैं। स्क्विरल हिल में कार्नेगी मेलन यूनिवर्सिटी है। ओकलैंड में यूनिवर्सिटी ऑफ पिट्सबर्ग है। शहर के मध्य में ड्यूकेन यूनिवर्सिटी है। इन परिसरों में छात्र अलग अलग संपर्क का निर्माण करते हैं। ये संपर्क पूरे दुनिया में भी विस्तृत हो सकते है। जैसे सेतु इस्पात से बनते हैं, छात्रों के सेतु रिश्तों से बनते हैं। कुछ रिश्ते पेशे और  कुछ रिश्ते दोस्ती के होते हैं। रिश्ता एक छोटी सी कक्षा में भी शुरू हो सकता है। हमारा सेतु भी एक कक्षा में ही शुरू हुआ था।

“तुम किस महीने में पैदा हुए थे,” प्रोफेसर ने पूछा।

“अगस्त, नवंबर, दिसंबर,” छात्रों ने जवाब दिया।

लेकिन जब मेरी बारी थी, मैंने कहा, “अक्टूबर”।

उस समय में, मेरे पास की एक उत्साहित आवाज ने कहा, “क्या! किस तारीख?”

मैंने उत्तर दिया, “उन्नीस”।

वह बहुत उत्साहित होकर बोला, “मेरा जन्मदिन भी वही दिन है”

आगामी, हमारे प्रोफेसर ने हमें परिचय पेश करने के लिए एक छोटी सी प्रस्तुति देने के लिए कहा था।

 में ने उठ कर कहा, “मेरा नाम मनोज है”।

उसने बोला, “मेरा नाम जॉर्ज है”।

उस दिन के बाद, हमको पता हुआ कि केवल हमारे जन्मदिन ही नहीं बल्कि हमारे अन्य तरीके भी समान थे। हम दोनों विज्ञान के छात्र थे। हम दोनों चिकित्सा विज्ञान पढ़ना चाहते हैं। हमने कक्षा के बाहर साथ समय बिताना शुरू किया। हम एक दूसरे की संस्कृतियों के भी आदी हो गये।

वसंत की छुट्टियों के दौरान जॉर्ज ने मुझे न्यू जर्सी में अपने घर आने के लिए कहा था। जॉर्ज ने मुझे न्यूयॉर्क शहर दिखाया था और पर्यटन क्षेत्र दिखाया था। स्थानीय रेस्तरां भी ले गया था क्योंकि मैं एक पर्यटक था। वहाँ हमने पहली बार योगासन किया था। योग भारतीय संस्कृति का एक प्रमुख अंग है क्योंकि यह  शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है। जॉर्ज की वजह से, मैं अपनी संस्कृति का एक सेतु निर्माण करने में सक्षम हुआ था।

हालांकि विश्वविद्यालय समाप्त हो रहा है, मैं कैलिफ़ोर्निया लौट रहा हूँ और जॉर्ज न्यू जर्सी वापस जा रहा है। परंतु हमारी हिंदी कक्षा हमारी सेतु थी, एक सेतु जो देश के दो छोरों को जोड़ें, और दो संस्कृतियों को जोड़ें।

शिक्षा: असीम एवं अक्षय रिश्तों का सेतु हमेशा के लिये होता है।  
मनोज नरावा
मैं कूपर्टीनो, कैलिफ़ॉर्न्या से आया हूँ। मैं मायक्रोबायालॉजी और केमिस्ट्री पढ़ रहा हूँ और मैंने ऑर्थपीडिक्स में अनुसंधान किया है। स्नातक स्तर की पढ़ाई के बाद बर्कली विश्वविद्यालय में अध्ययन करूँगा। मैं डॉक्टर बनना चाहता हूँ।

जॉर्ज गार्डनर
मैं न्यू जर्सी से आया हूँ और मैं पिट्सबर्ग विश्वविधालय में वरिष्ठ हूँ। मैं मनोविज्ञान और तंत्रिका विज्ञान पढ़ रहा हूँ और मैंने तंत्रिका विज्ञान अनुसंधान किया है। स्नातक स्तर की पढ़ाई के बाद मैं कोलंबिया विश्वविद्यालय में अध्ययन करूँगा। मैं डॉक्टर बनना चाहता हूँ।