पिता के नाम - ग़ज़ल

सचिन चौधरी 'शाश्वत'

दुनिया को बताते रहे मझधार पिताजी
मझधार में बनके रहे पतवार पिताजी

साया भी उन्हीं से है, सहारा भी उन्हीं का
बच्चों के लिए दर है और दीवार पिताजी

चूल्हा ना पड़े ठंडा कभी, इसलिए अक्सर
हँसकर गये हैं काम पर बीमार पिताजी

माँ की  बीमारी में, बच्चे , रोटी और बरतन
अक्सर निभाते माँ का भी किरदार पिताजी

हैं दोस्त, अलार्म, गुरु, पाबंदियाँ कभी
थप्पड़, नसीहतें, कभी अखबार पिताजी