क्षणिकाएँ - सपना मांगलिक


सपना मांगलिक

1
बंदूक की नोक पर
गिरी लाश सपनों की
उसकी कुछ उसके अपनों की
जिस धर्म की कर रहे थे वो रवायतें
मालूम नहीं थी बेचारी को उसकी आयतें

2
लावारिस घूमती माँ
घर किसके जा बसती?
बेटों ने बसा ही ली थी
अपनी-अपनी गृहस्थी

3
नेता बनने की शर्त पहली
पार्टी को चढ़ावा चढाओ
और चढ़ावे के स्तर का ही
पार्टी से टिकट पाओ

4
पीड़िता के दर्द का अनुभव
उसने अपने अंदाज में बोला
गलती मात्र यह हुई कि
मीडिया के सामने मुँह खोला

5
कभी करें घोर बकवास
चीर हरण सरीखे वाद विवाद
संसद में प्रतिबंधित हुआ
इनदिनों हास परिहास

6
अखबार पढ़ते ही पत्नी चिल्लाई
अजी सुनते हो
करोड़पति हो रहे हैं सबके पति
पश्चिम में सिद्धिपति,
दक्षिण में लक्ष्मी पति
और उत्तर में रुक्मीपति

7
चुनाव का देख नतीजा
नेताजी का सिर भन्नाया
हमने ही दिया बाई फाई का प्रलोभन
और हम तक ही नेटवर्क नहीं आया

8
शिक्षा मंत्रालय ने जबसे
ग्रेड नीति पांचवी तक सिमटाई
ट्यूशन के विरोधियों ने
अपने ही घर पर
ट्यूटरों की जमात लगाईं

9
जिन्दगी और मौत
खेल रही हैं शतरंज
लगाए बैठी हैं घात
विरोधी को दें कब पटखनी
करके शय और मात

10
पिंजरे के पंछी का
पिंजरे में घुट रहा दम
उड़ने को बेताव वह फड़फड़ाने लगा पंख
जब मालिक ने खा तरस पिंजरा खोला
तो मोह के इस पिंजरे से
उसने चिपका लिए थे पंख
घबरा उठा देखकर नभ अनंत
जैसे मानव अपना अंत

11
पति का ध्यान, सम्मान
सास ससुर की सेवा
ननदों का आदर सत्कार
उसे परवाह कहाँ तनिक है
शायद नई बहू आधुनिक है

12
शाम के धुंधलके में
किसी चीज पर पडा पाँव
शायद कोई जीव था निष्प्राण
मैंने घबराकार पैर हटाया
नीचे एक कुचला हुआ
घायल रिश्ता पाया
भर रहा था जो आखिरी साँस
कराह रहा था अकेला
बुदबुदा रहा था होठों में
दुनिया एक मेला

13
चील कौओं के लाश से
स्वार्थपूर्ति के अनुबंध
आ रही सड़ांध इनसे
बढती जा रही दुर्गन्ध
मत खोलो मतलब की खिडकियों को
इनसे झाँक रहे हैं बेहया सम्बन्ध

14
आस्तीन के साँपों से ज्यादा
जहरीले होते हैं संदेह के साँप
आस्तीन में फडफडाते साँप को
महसूस कर सकते हैं
मगर किसी दिमाग में
कुंडली मार बैठे हुए नाग को
भला कैसे पकड़ोगे आप
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