निकोला टेसला का प्रसिद्ध व्यवसायी जे.पी. मोर्गन जूनियर के नाम पत्र

मेहेर वान
सन 1934 में प्रसिद्ध वैज्ञानिक जब अपनी संपत्ति गँवाकर न्यू योर्क के होटल न्यू योर्कर के एक कमरे में अस्थाई रूप से रह रहे थे,  तब उन्होंने उस समय से सबसे अमीर अमेरिकी जे. पी. मोर्गन जूनियर को यह पत्र लिखा था। इसके पहले निकोला टेसला मोर्गन के पिता जे. पी. मोर्गन सीनियर के साथ वायरलैस-विद्युत संचार व्यवस्था के निर्माण सम्बन्धी प्रोजेक्ट पर काम कर चुके थे जो कि पूर्ण रूप से सफ़ल नहीं हुआ था और जो टावर्स बिद्युत संचार के लिये बनाये गये थे वह जलकर ध्वस्त हो चुके थे। जे.पी.मोर्गन सीनियर के मरने के बाद जब उनके कुर्सी जे.पी.मोर्गन जूनियर ने सम्हाली तो निकोला टेसला ने उन्हें यह पत्र लिखा था।

न्यूयॉर्कर होटल
29 नवम्बर, 1934

जे.पी. मोर्गन, 23 वाल स्ट्रीट, न्यूयॉर्क

प्रिय श्री मोर्गन,

मैंने हाल ही में कुछ अतुलनीय महत्ता की खोजें की हैं जो कि इस पत्र के साथ में संलग्न हैं. इनके व्यावहारिक अनुप्रयोगों का बेहतरीन भविष्य होना चाहिये।

उड़ने वाली मशीनों ने दुनियाँ का पूरी तरह से उत्साह भंग कर दिया है, इतना कि लंदन और पेरिस जैसे कुछ शहरों में लोग हवाई बम हमलों के डर से भयभीत हैं। मेरे द्वारा विकसित किये गये नये तरीके इस तरह के या अन्य किन्हीं और तरह के हमलों से बचाने के लिये पूरी तरह से सक्षम हैं।

आप जानते हैं कि मेरे वायरलेस उपकरण के विकास में आपके पिता जी ने किस तरह मुझे सहायता उपलब्ध करायी थी. इस मदद के बदले में उन्हें कुछ नहीं मिला, लेकिन मैंने उन्हें विश्वास दिलाया था कि अगर वह ज़िंदा होते तो मेरे आविष्कारों के विश्वब्यापी अनुप्रयोगों के बारे में जानकर संतुष्ट होते। मैं आज भी आभारपूर्वक आपके द्वारा की सहायता याद करता हूँ यद्यपि युद्ध ने मुझे उसी सफ़लता से वंचित कर दिया था जो मैंने खुद हासिल की थी। उन दो उपक्रमों में मैंने न सिर्फ़ अपनी सारी संपत्ति खो दी थी बल्कि कई वर्षों तक मैं सभी तरह के अनुचित तकाजे (कर्ज़) चुकाते रहने के लिए बाध्य हो गया था। थोड़े विश्वास से किसी भी तरह मैं पहले वाले कर्ज़ को चुकाने में कामयाब हो गया था जिससे भविष्य के एक यातनापूर्ण दु:स्वप्न का अंत हुआ था।

मेरी यह इन खोजों ने अत्यंत गंभीर प्रभाव छोड़े हैं, जो कि मैंने सीमित पैमाने पर प्रायोगिक तौर पर की हैं। इनमें से सबसे प्रभावशाली लन्दन की सुरक्षा सम्बन्धी समस्या है और इस सम्बन्ध में, मैं इंग्लैंड के कुछ प्रभावशाली दोस्तों को इसी उम्मीद के साथ लिख रहा हूँ कि मेरी यह योजना बिना किसी देरी के अंगीकार कर ली जायेगी। रूसी लोग जापानी अतिक्रमण के खिलाफ़ अपनी सीमाओं को सुरक्षित करने के समबन्ध में बहुत चिंतित हैं और मैंने उन्हें एक प्रस्ताव भेजा है जिस पर वह गंभीरता से विचार कर रहे हैं। मेरे वहाँ कई प्रशंसक है, खास तौर पर मेरे प्रत्यावर्ती धारा सम्बन्धी उपकरण के लिये जो कि एक हद तक बेजोड़ है। कुछ साल पहले लेनिन ने रूस आने के लिये मेरे समक्ष एक के बाद के दो बार बहुत ललचाने वाले प्रस्ताव रखे थे, लेकिन मैं अपने प्रयोगशाला के कार्यों में इतना उलझा हुआ था कि वहाँ नहीं जा सका।
निकोला टेसला

यह शब्दों में बयाँ नहीं किया जा सकता कि मैं कुछ सुविधाओं को पाने के लिये कितना परेशान हूँ जो कि उस समय आपके और आपके पिता जी के साम्राज्य के साथ अपनी भागीदारी को कई-गुना कर पाने के अवसर और उसके निराकरण के लिये मेरे पास हैं। मैं अब एक स्वप्नदृष्टा नहीं रहा बल्कि मैं लम्बे और मुश्किल परीक्षणों से पाये अनुभवों को पाने के बाद अब एक व्यवहारिक आदमी हो गया हूँ। यदि अब अपनी संपत्ति बचाने के लिए और विश्वस्यनीय ढ़ंग से (खोजों के) प्रचार  के लिये मेरे पास पच्चीस हज़ार डॉलर्स हों तो मैं कुछ ही समय में विशाल संपत्ति इकट्टी कर सकता हूँ। क्या आप मुझे इतना धन उधार दे सकने के इच्छुक हैं यदि मैं इन आविष्कारों को आपके पास गिरवी रखने का वादा करूँ?

श्रीमान मोर्गन, आप इस शाश्वत कार्य के लिये मेरी सहायता करने में अब भी सक्षम हैं, लेकिन आप इस विशेषाधिकार वाली स्थिति में कब तक रहेंगें? इस समय हम एक ऐसे राजनैतिक पार्टी के कब्ज़े में हैं जो कि खुले तौर पर और बेशर्मी से भीड़ की पूजा करती है और यह विश्वस्त है कि जनता के धन में से भले ही गैरबराबरी के साथ अरबों बहा देने से वह सत्ता में असीमित काल के लिये बनी रहेगी। लोकतांत्रिक सिद्धान्तों को ताक पर रख दिया गया है और व्यक्तिगत स्वतंत्रता और प्रोत्साहन को मजाक बना दिया गया है। अविराम गति (Perpetual Motion) सम्बन्धी योजना एक ऐसा ’नया समझौता’ है जो कि कभी सफ़ल नहीं होगा, लेकिन जनता के धन से पैसों की अबाध आपूर्ति करके इसके क्रियान्वयन का दिखावा किया गया है। बहुत सारे अपनाये गये तरीके मात्र मतदान पाने के ज़रिये मात्र हैं और कुछ तो स्थापित उद्योगों और निश्चित रूप से सामाजिक बराबरी के लिये खतरा हैं। इनका अगला कदम यदि अनिवार्य सैनिक सेवा नहीं होगा तो भारी कर (टैक्स) आरोपित करके जनता में पैसों का (बेमेल) वितरण हो सकता है।

हमेशा की तरह विश्वसनीय शुभकामनाओं और आदर के साथ
आपका सबसे विश्वसनीय,
निकोला टेसला

1 comment :

  1. बेहद खूबसूरत और प्रेरणादायी लेख,शिक्षाप्रद एवं कठिन समय में आशावादी होने के बल को दर्शाता हुआ।

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