प्रिय डॉ. आइन्स्टाइन: क्या वैज्ञानिक प्रार्थना करते हैं?

मेहेर वान

मेहेर वान

प्रसिद्ध वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टाइन 20वीं शताब्दी के सबसे महान वैज्ञानिकों में से एक थे। वैज्ञानिक मामलों के अलावा उनकी राजनैतिक समझ बेहद सटीक थी। यह एक उत्सुकता का विषय था कि धर्म और ईश्वर सम्बन्धी विषय पर आइंस्टीन के क्या विचार हैं। सन 1936 में एक छात्रा ने अपनी कक्षा के बच्चों की तरफ़ उन्हें यह पत्र लिखा, जिसका आइंस्टीन ने तुरन्त जवाब दिया था। यह पत्र बेस्ट-सेलर किताब “लेटर्स ऑफ़ नोट” से लिया गया है।
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द रिवरसाइड चर्च,

19 जनवरी, 1936,

मेरे प्रिय डॉ. आइन्स्टाइन,
हमने अपनी रविवार वाली कक्षा में यह सवाल उठाया है: क्या वैज्ञानिक प्रार्थना करते हैं? यह इस तरह पूछने पर शुरु हुआ कि क्या हमें विज्ञान और धर्म दोनों पर विश्वास करना चाहिये। हम इस प्रश्न का उत्तर जानने की कोशिश में वैज्ञानिकों और अन्य महत्वपूर्ण व्यक्तित्वों को पत्र लिख रहे हैं।

हम अपने को अनुग्रहीत महसूस करेंगें यदि आप हमारे प्रश्न का उत्तर देंगे. क्या वैज्ञानिक प्रार्थना करते हैं, और वे किसलिये प्रार्थना करते हैं?

हम छठी कक्षा में पढ़ते हैं, मिस एलिस की कक्षा में।

सादर

फिलिस

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24 जनवरी, 1936

प्यारी फिलिस,
मैं तुम्हारे प्रश्न का उत्तर यथासंभव सरलता से देने की कोशिश करूंगा। मेरा उत्तर यह है: 

वैज्ञानिकों का विश्वास है कि मानवीय मामलों सम्बन्धी सहित हर एक घटना प्रकृति के नियमों के कारण घटती है। अतएव, एक वैज्ञानिक का झुकाव इस विश्वास की ओर नहीं हो सकता कि घटनाओं का क्रम प्रार्थना यानि कि एक अलौकिक इच्छा के द्वारा प्रभावित किया जा सकता है।

यद्यपि, हमें यह ज़रूर कुबूल करना चाहिये कि हमारा प्राकृतिक नियमों सम्बन्धी वास्तविक ज्ञान अपूर्ण है, इसलिये अंततः निर्णायक परमात्मा के अस्तित्व का विश्वास एक तरह की आस्था पर निर्भर करता है। इस तरह के विश्वास विज्ञान की आधुनिक उपलब्धियों के बावजूद बड़े स्तर पर फ़ैले हुये हैं।

लेकिन यह भी कि वे सभी, जो कि वैज्ञानिक शोधकार्य में लगे हुये हैं, इस तथ्य को लेकर आश्वस्त हो जाते हैं कि कोई आत्मा ब्रह्मांड के नियमों में प्रकट होती है, जो कि मनुष्य से बेहद श्रेष्ठतर है। इस तरह से, वैज्ञानिक खोज एक विशेष प्रकार के धार्मिक एहसास की ओर ले जाती है जो कि निश्चित तौर पर किसी अत्यंत अनुभवहीन व्यक्ति की धार्मिकता से बहुत अलग होती है।

सौहार्दपूर्ण शुभकामनाओं के साथ,
आपका
अल्बर्ट आइंस्टाइन

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