अम्मा - लघुकथा

वर्षा सरन

पूस की सर्दी, ठंडी बर्फीली हवाएँ और सीलन भरी सर्द रातें, लेकिन अम्मा थीं कि धीरे धीरे चल कर सारे घरेलू काम काज निपटाती थीं। उनकी बिवाइयाँ कटी फटी थीं, और हाथ पत्थर की तरह सख्त। कमर थोड़ी सी झुक गयी थी और आँखें चमकहीन हुई जाती थीं, लेकिन कमज़ोर नज़र उनकी सिलाई के आड़े न आती थी। बुनाई तो वो कमाल की करती थीं। दो-दो बहुएँ थीं उनकी, और शादी के लायक पोता-पोती लेकिन अम्मा तब भी अपना सारा काम खुद करती थीं, आत्मसम्मानी जो ठहरी, वो मेरी माँ थीं और प्यार से मैं उन्हें माँ, अम्मा कहा करती थी।
वर्षा सरन

घर जाती तो झटपट वो चाय का पानी चढ़ा देतीं और मेरे लिए खाना बनाने लग जातीं। वैसे मेरी ससुराल दो तीन किलोमीटर ही दूर थी और मैं महीने दो महीने में उनसे मिलने आ जाया करती। अम्मा की एक आदत थी पुरानी बातों को याद कर कर के सुनाना, उनकी बातें, उनकी यादें मुझे रट सी गयी थीं मैं अम्मा को बाहों में भरती और उनकी यादों को रिक्त स्थान की तरह पूरा करती फिर दोनों हँस पड़ते।

कभी कभी अम्मा की रिसती हुई बिवाइयों में क्रैक क्रीम मल देती लेकिन पहले पेडिक्योर जरूर करती। अम्मा की चाँदनी बालों को कलर करती तो अम्मा बहुत खुश होती, और पुराने ज़माने के गाने गा-गा कर बालों को संवारती। अम्मा को गाने का बहुत शौक था, गाती भी उम्दा थी। लेकिन पापा ने कभी उनकी रचनात्मकता की कद्र नहीं की। यूँ तो अम्मा को खाना बनाना पसंद न था लेकिन उनके हाथ का खाना आज भी याद आता है।

अम्मा यूँ ही काम करते करते एक दिन नहीं रही और उनकी बहुएँ शायद मन ही मन खुश भी हों लेकिन अब जब घर जाती हूँ तो मायका, मायका सा नहीं लगता एक करीने से सजा खंडहर लगता है, हर कोने में माँ दिखती है, घूमती फिरती, गाने गुनगुनाती, या चिड़चिड़ाती भी। मन भारी हो जाता है लगता है अभी रो दूँगी, लेकिन आँसुओं को आँखों में रोक लेती हूँ और लाल पनीली हो आयी आँखों को रुमाल से पोंछ कर, परदे को पकड़ कर धीरे से मन में ही रो लेती हूँ।

अब बहुत ही कम जाती हूँ मायके क्योंकि मायका तो माँ से, मेरा मतलब अम्मा से ही होता है, है न!

9 comments :

  1. सुरेंद्र कुमार अरोड़ाJanuary 2, 2018 at 3:21 AM

    अच्छा होता की आप यह भी बतातीं कि आपकी सासू माँ के बाद आपकी ननद का मायका कौन सा है और कैसा है ........सुरेंद्र कुमार अरोड़ा

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  2. आपकी कथा संवेदनापुर्ण बहुत अच्छी है लेकिन माफी चाहुंगा लघुकथा की जो परिभाषा साहित्य मे दी गई है उसके इनुसार हम इसे लघुकथा नही कह सकते

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  3. आपकी लघुकथा है तो अच्छी भावो से भरी
    मगर माफी चाहुंगा लघुकथा की परिभाषा अनुसार यह लघुकथा नही कहला सकती

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  4. अच्छी कहानी है पर मेरे विचार में लघुकथा नहीं है।

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  5. अच्छी भावभिव्यक्ति परंतु लघु कथा कहना गलत होगा

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  6. कथा कम संस्मरण अधिक है लेकिन जो.भी लिखा गया उम्दा है ।

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  7. राजेश आहूजाJanuary 24, 2018 at 3:53 AM

    वर्षा जी, आपने लिखा बहुत अच्छा है लेकिन क्षमा चाहूँगा, यह लघुकथा नहीं है।

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  8. राजेश आहूजाJanuary 24, 2018 at 3:56 AM

    वर्षा जी, आपने लिखा बहुत अच्छा है लेकिन क्षमा चाहूँगा, यह लघुकथा नहीं है।

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  9. बहुत खूब

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