मेजर शील्ड्स और वैज्ञानिक ओपेनहाइमर के पत्र

मेहेर वान

मेहेर वान


अमेरिकी परमाणु बम सम्बन्धी प्रोजेक्ट आइंस्टीन जैसे बड़े वैज्ञानिकों की अमेरिकी राष्ट्रपति को दी गई सलाहों के बाद सन 1939 में शुरु हुआ था। यह मनहाटन प्रोजेक्ट के नाम से जाना जाता है। इससे सम्बन्धित तमाम विभागों को कम से कम बारह जगहों पर स्थापित किया गया था। सभी निर्माण और अनुसंधान सम्बन्धी वैज्ञानिक प्रयोगशालायें लोस अलामोस, न्यू मैक्सिको में स्थित थीं और ट्रिनिटी में सन 1945 में इसके पहले फल का परीक्षण किया गया था। ऊटा में स्थित उड़ान परीक्षण विभाग ने बम को गिराने सम्बन्धी सभी तकनीकी गणनाओं और परीक्षणों को सम्पन्न किया था जिसमें मेजर सी. एस. शील्ड्स और कैप्टन सेंपल प्रमुख थे। अंततः अमेरिकी राषट्रपति ट्रुमेन ने जापान पर परमाणु बम गिराने की घोषणा की थी। इन बमों को बनाने के काम में कुल मिलाकर लभगभ एक लाख लोगों ने हिस्सेदारी की थी और इस प्रोजेक्ट में उस समय दो सौ करोड़ डॉलर्स खर्च हुये थे। हिरोशिमा और नागासाकी पर बमबारी के बाद उड़ान परीक्षण विभाग के मेजर शील्ड्स ने लोस अलामोस लेबोरेटरी के प्रमुख और “परमाणु बम के पिता” कहे जाने वाले वैज्ञानिक रॉबर्ट ओपेनहाइमर को अपनी डायरी की यह अंतिम प्रविष्टि भेजी जिसका जवाब ओपेनहाइमर ने पत्र लिखकर दिया था। डायरी की यह प्रविष्टि सन 1987 तक गोपनीय दस्तावेजों में से एक थी, अमेरिकी सरकार ने 30 नवम्बर 1987 को इस पर से गोपनीयता का प्रतिबन्ध हटा लिया था।
__________________________________________


हेडक्वार्टर्स वेंडोवर फ़ील्ड
उड़ान परीक्षण विभाग
वेंडोवर, ऊटा
30 अगस्त 1945

विषय: अंतिम डायरी- उड़ान परीक्षण विभाग, “किंगमैन”
सेवा में: डॉ. रॉबर्ट ओपेनहाइमर

1. मैं गर्व के एहसास के साथ उड़ान परीक्षण विभाग की डायरी में यह अंतिम प्रविष्टि दर्ज़ कर रहा हूँ। अपने अन्दर एक कार्य के अति-उत्तम तरीके से सम्पन्न हो जाने का संतोष हमेशा होता है तथा कैप्टन सैपल और मैं यह महसूस करते हैं कि हमने दुनिया में अब तक के सबसे महान सैन्य हथियार के इस्तेमाल को संभव करने में, छोटे स्तर पर ही सही, मगर योगदान किया है। परमाणु बम केवल एक बेहतरीन हथियार ही नहीं है बल्कि यह दुनिया में संभव शान्ति की सबसे शक्तिशाली युक्तियों में से एक है।

2. 14 अगस्त 1945 को हमारा मिशन समाप्त हो गया - एक मिशन जिसकी शुरुआत कैप्टन सैंपल और मैने फ़रवरी 1944 में की थी। हम दोनों लोग कितने बेवकूफ़ थे कि हम परमाणु बम और उसके प्रोजेक्ट पर कुछ ज़्यादा ही विश्वस्त थे और हमें इस बात पर गर्व भी होता था। हमें दिया गया यह कार्य बहुत आसान नहीं था। हमें बम गिराने की सटीक ऊँचाई से काफ़ी ऊपर के अक्षांश से एक ऐसे बम को एकदम सही स्थान पर बम गिराना था जो कि एक तकनीकी स्तर पर एक कु:स्वप्न जैसा था, इससे पहले शायद ही इस तरह के कार्य को अंजाम दिया गया होगा। हमें अपर्याप्त संसाधनों और कर्मचारियों के साथ-साथ तमाम विषम परिस्थितियों का सामना करना पड़ा और बहुत आलोचना झेलनी पड़ी। केवल हिरोशिमा में ही बम गिराने वाले ही नहीं बल्कि 509वें कम्पोजिट ग्रुप के 393वें बमबारी दस्ते के सैन्य दस्तावेजों में नतीजे स्पष्ट थे। स्वाभाविक रूप से तरबूजों, “द लिटिल बॉय” और “द फ़ेट मेन” बमों को गिराने सम्बन्धी तकनीकी गणना टेस्ट सेक्शन (परीक्षण अनुभाग) के द्वारा किये गये परीक्षणों के आधार पर की गई थी। इयोकर्न के 393वीं उड़ान दस्ते के अभिलेख साठ मील के विस्फोट विध्वंश की ओर इशारा करते हैं। उस समय के बाद कैप्टन सैंपल के प्रयासों और प्रशिक्षण के बाद उड़ान दस्ता के द्वारा यहाँ और देश के बाहर दोनों में किये जाने वाले विस्फोट विध्वंश में काफ़ी बढोत्तरी हुयी। दूसरी ओर नागासाकी में फोड़ा गया बम बमुश्किल सटीक था।

3. यह कार्य अपनी असफ़लताओं और निराशाओं के बिना अधूरा है। शायद जो बात हमारे दिमागों में किसी और बात से कहीं ज़्यादा बार आती है वह हमें पहले परमाणु बम को गिराने वाली टीम के रूप में नकार दिये जाने वाली निराशा है। जब पहले परीक्षण शुरु हुये थे और हमने ऐसे हथियार के बनाये जा सकने की संभावना को सिद्ध किया था, तब कैप्टन पार्सन ने हमें वचन दिया था, कि अगर यह सम्भव हो सका तो हम इसे गिरा सकेंगे। हम जैसा उस समय महसूस कर रहे थे वैसा ही अभी महसूस कर रहे हैं कि हमें कम प्रतिष्ठा मिली, कि हमने और प्रोजेक्ट के लोगों ने, जिन लोगों के हित में काम किया, उन्होंने हमारा उतना समर्थन नहीं किया।

4. ऊपर जाहिर की गई निराशा के बावजूद हम इस प्रोजेक्ट का हिस्सा बनाये जाने में गर्व महसूस करते हैं, हमें गर्व हैं कि इस शुरुआती सफ़लता में हमने अपने स्तर पर थोड़ा-बहुत ही सही मगर योगदान किया। हमें अब यह जाहिर करना है कि आपकी वैज्ञानिक उपलब्धि के लिये हमारे मन में असीम प्रशंसा है।

5. यह हमारे लिये गर्व और खुशी की बात है कि हमने आपके साथ काम किया।

क्लाइड स. शील्डस
मेजर, एसी
कमांडिंग ऑफ़ीसर
उड़ान परीक्षण विभाग
_______________________________________________________

पोस्ट ऑफ़िस बोक्स 1663
सन्ता एफ़.सी., न्यू मैक्सिको
08 सितम्बर 1945
मेजर सी.एस. शील्ड्स
हेडक्वार्टर्स वेन्डोवर फ़ील्ड
उड़ान परीक्षण विभाग
वेन्डोवर, ऊटा

प्रिय मेजर शील्ड्स,

अपनी अंतिम डायरी मुझे भेजने के लिये आपका शुक्रिया, जो कि इस पूरे धन्यवाद-रहित और कठिन प्रोजेक्ट के समय आपके और कैप्टन सेंपल को जोश से लबालब रखने वाले दर्शन को कितने अच्छी तरह से दर्शाती है। यद्यपि मनहाटन जिले और वायु सेना के सदस्यों के बीच तमाम पत्राचार हुआ है (यद्यपि मैं खुद कर्नल हेफ़्लिन को पत्र लिख चुका हूँ) जिसमें वायु सेना के सहकार, निपुणता और निष्ठा की तारीफ़े ही हैं, मैं आपको व्यक्तिगत तौर पर यह पत्र लिखना चाहता हूँ और मैं चाहता हूँ कि कैप्टन सेंपल भी इस पत्र को अपने लिये संबोधित समझें।

मेरे विचार से, मैं अच्छी तरह से जानता हूँ कि आपके कार्य के बारे में और इसके बमॊं को सही स्थान पर गिराने के सम्बन्ध में आपके कार्य की महत्ता का ज़िक्र आधिकारिक दस्तावेज़ों में दर्ज़ नहीं है। मेरे विचार से आप दोनों को एक प्रयोगशालीय विकास को एक ऐसे हथियार में बदलने की प्रक्रिया में सक्रिय भाग लेने के लिये वास्तविक रूप से गर्व का एहसास करना चाहिये जिसने युद्ध के समापन में अपनी भूमिका निभाई। मैं आप दोंनों को बधाई देना चाहता हूँ और आपका शुक्रगुज़ार हूँ, मुझे आशा है कि भविष्य में किन्हीं रास्तों पर हमारी पुनः मुलाकात होगी जब हम शायद उतनी हड़बड़ी में नहीं होंगे जैसे पिछली बार थे।

भवदीय
रोबर्ट जे. ओपेनहाइमर

No comments :

Post a Comment

We welcome your comments related to the article and the topic being discussed. We expect the comments to be courteous, and respectful of the author and other commenters. Setu reserves the right to moderate, remove or reject comments that contain foul language, insult, hatred, personal information or indicate bad intention. The views expressed in comments reflect those of the commenter, not the official views of the Setu editorial board. प्रकाशित रचना से सम्बंधित शालीन सम्वाद का स्वागत है।