कविता: सीमा सिंघल 'सदा'

सीमा सिंघल 'सदा'

बेटी 

बेटी बाबुल के दिल का टुकड़ा भैया की मुस्कान होती है,
आँगन की चिड़िया माँ की परछाईं घर की शान होती है!

खुशियों के पंख लगे होते हैं उसको घर के हर कोने में
रखती है अपनी निशानियाँ जो उसकी पहचान होती है!

माँ की दुलारी पापा की लाड़ली भैया की नखरीली वह
रूठती झगड़ती इतराती हुई करुणा की खान होती है!

भाई की राखी दूज का टीका मीलों दूर होकर भी जब
वह सजल नयनों से भेजकर हर्षाये तो सम्मान होती है!

संध्या वंदन कर एक दिया आँगन की तुलसी पे रखती,
मानो न मानो बेटी तो सदा दिल का अरमान होती है!

2 comments :

  1. बेटी माँ-पिता के दिल की धड़कन, उनकी जान होती है!
    भाव-विभोर करने वाली कविता सीमा जी! अतिसुन्दर!
    हार्दिक बधाई आपको!!!

    सस्नेह
    अनिता ललित

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    Replies
    1. हार्दिक आभार आपका .... सादर

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