स्वास्थ्य: पटाखों से जलने पर क्या करें?

डॉ. गोविंद माधव

डॉ. गोविंद माधव, एम. डी.

बारूद, धुआँ और अंगारों की गर्मी त्वचा को परत दर परत हानि पहुँचाती है। अगर सिर्फ ऊपर की चमड़ी जली है तो लालिमा के साथ जलन होगी। थोड़ा और अंदर तक जलने पर फफोले होंगे और जलन के साथ तेज़ दर्द भी होगा। मगर ज्यादा अंदर तक उष्मा के प्रवेश से त्वचा की पूरी परत बर्बाद हो जाती है, अंदर के सफेद उत्तक या मांस दिखने लग जाते हैं मगर आश्चर्य कि दर्द बिल्कुल कम।  जितना गहरा घाव, दर्द उसके मुताबिक बिल्कुल नहीं। कारण कि दर्द को दिमाग तक ले जाने वाली नसें / नर्व (nerve) भी जल जाती हैं, तो मन को खबर कौन पहुँचाए कि कितना नुकसान हुआ है और कितना विलाप करना है।

अब अगर ये समझ गए कि त्वचा का नुकसान कितना हुआ है तो आते हैं उपचार पर।  सबसे पहले त्वचा की गर्मी कम की जाए।  ठंडा पानी ज्यादा से ज्यादा। अगर संभव हो तो भरी बाल्टी में जला अंग डूबा दिया जाय या नल खोल के जल प्रवाह त्वचा पर रखा जाए तो बहुत अच्छा।

अब उपाय संक्रमण यानी जीवाणुओं के इनफ़ैक्शन (infection) को रोकने के लिए। त्वचा रूपी बाउंड्री के टूटते ही जीवाणुओं की फौज शरीर में घुसपैठ की कोशिश में लग जाती हैं। आखिर अंदर उन्हे मुफ्त में खाना पानी और आश्रय जो मिलने वाला है, जहाँ वे फ़ुल स्पीड से प्रजनन कर पाएंगे। उनकी संख्या बढ़ेगी तो त्वचा की कोशिकाओं को मिलने वाले पोषण का एक बड़ा हिस्सा छिन जाएगा,  फिर जख्म भरने के कार्यक्रम में बाधा।  जीवाणुओं और हमारी कोशिकाओं का युद्ध भी साथ साथ चलेगा।  और युद्ध में योद्धा तो दोनों तरफ से मरते हैं।  अलग बात है कि जीवाणुओं की लाशें  भी हमारी कोशिकाओं के लिए जहर का ही काम करती हैं, आत्मघाती हमलावर की तरह।

कुछ दवाइयाँ ऐसी हैं जो चुन चुन कर सिर्फ उन सजीव कोशिकाओं को मारती है जो एक खास तरीके से या फिर बहुत तेज़ी से प्रजनन करती हैं जैसे कि ये जीवाणु। एंटीबायोटिक कही जाने वाली ये दवाइयाँ हमारी अपनी कोशिकाओं को ज्यादा नुकसान नहीं पहुँचाती हैं। सील्वरेक्स या सल्फ़ाडायज़ाइन (Sulfadiazine) ऐसे ही एंटीबायोटिक का नाम है जिसका लेप या मरहम जलने से पैदा होने वाले ज़ख़्म के लिए सबसे उपयोगी है। एंटिसेप्टिक ड्रेसिंग ( Antiseptic dressing) भी एक अस्थायी बाउंड्री का काम करती है घुसपैठियों को रोकने के लिए।

अगर जख्म का क्षेत्रफल ज्यादा बड़ा हो तो लाख कोशिश के बावजूद जीवाणु हमारे खून के प्रवाह में घुसपैठ कर पूरे शरीर में फैलने लगते हैं।  इस स्थिति को सेप्सिस (sepsis) कहा जाता है।  अब दुश्मन हमारी धमनियों में है तो सिर्फ सीमा पर सैनिक तैनात करने से काम नहीं चलने वाला।  हमें ज्यादा पावरफुल हथियार यानी एंटीबायोटिक सीधे खून में पहुंचाने होंगे टैब्लेट और इंजेक्शन के जरिए, घाव की गंभीरता के हिसाब से।

त्वचा का एक और काम होता है शरीर से पानी की नियंत्रित मात्रा को पसीने के रूप में बाहर निकलना। शरीर के तापमान को नियंत्रित करने के लिए भी यह जरूरी है।  पर जलने से यदि त्वचा के बड़े क्षेत्रफल का नुकसान हुआ है तो अब पानी भी ज्यादा खर्च हो जाएगा।  नंगे मांसपेशियों और ऊतक से बहुत तेज़ी से पानी भाप बन कर उड़ता रहेगा।  इसीलिए खूब पानी पीना है।  सिर्फ पीने से काम न चले तो नसों से चढ़ाने की नौबत भी आती है।

ज्यादा जले मांस के टुकड़े अगर खून के बहाव में शामिल हो गए तो ये वृक्क (गुर्दा या किडनी) की संकरी धमनियों में फँस सकते हैं।  यह रुकावट वहाँ ट्रेफिक जाम कर के वृक्क के काम में बाधा पहुंचा सकती है। नतीजा, वृक्क का फेल होना। खुशकिस्मती से अधिकतर मामलों में ये गड़बड़ी अस्थायी होती है और 5-7 डायलिसिस (Dialysi)s के बाद पहले जैसी स्थिति आ जाती है। मूत्र की घटती मात्रा या बदलता रंग हमें इस स्थिति से अवगत कराता है।

खैर, ज़ख़्म का क्षेत्रफल ही सबसे बड़ा पैमाना है दुर्घटना की गंभीरता का।  बड़े पैमाने पर हुए नुकसान के लिए अस्पताल में भर्ती होना चाहिए और गहन चिकित्सा की सहायता ली जानी चाहिए।

युद्ध हो या बीमारी या कोई दुर्घटना... जितना इससे बचा जा सके वही बेहतर है क्योंकि बाद में सिर्फ नुकसान की भरपाई की कोशिश भर होती है, जख्म के दाग दीवार के दरार की तरह जिन्दगी भर त्वचा पर काबिज़ रहते हैं अपनी याद दिलाते रहने के लिए...।
सम्पादकीय नोट: रांची, झारखण्ड निवासी डॉ. गोविंद माधव, एमबीबीएस, एमडी (मेडिसिन) द्वारा आरम्भ किया गया यह नया स्तम्भ सेतु के पाठकों को स्वास्थ्य, सुरक्षा सम्बन्धी जानकारी देने के उद्देश्य से सेतु के आगामी अंकों का स्थायी अंग होगा। शिक्षा और व्यवसाय से चिकित्सक डॉ. माधव साहित्यकार भी हैं।

No comments :

Post a Comment

We welcome your comments related to the article and the topic being discussed. We expect the comments to be courteous, and respectful of the author and other commenters. Setu reserves the right to moderate, remove or reject comments that contain foul language, insult, hatred, personal information or indicate bad intention. The views expressed in comments reflect those of the commenter, not the official views of the Setu editorial board. प्रकाशित रचना से सम्बंधित शालीन सम्वाद का स्वागत है।