बालकथा: आम की गुठली

अर्विना गहलोत

अर्विना गहलोत

जन्म 27 फरवरी, नगला दलपतपुर जिला बुलंदशहर
शिक्षा: एमएससी (वनस्पति विज्ञान), वैद्धविशारद
निवास: जिला गौतमबुद्ध नगर (उत्तर प्रदेश)
ईमेल: ashisharpit 01@gmail.com


सोनी और मोनी की मित्रता बहुत गहरी थी। दोनों के घर पास-पास ही थे। दोनों घरों के बीच बस छोटी सी दीवार थी जिसके पास खड़े होकर दोनों घंटों बातें किया करती। सोनी-मोनी साथ-साथ स्कूल जाती थीं।

एक दिन स्कूल जाने के समय सोनी अपने हाथों में आम की दो गुठलियाँ लेकर  मोनी के घर पहुँची। सोनी को देखते ही मोनी उछल पड़ी, "आज इतनी जल्दी? अभी तो स्कूल लगने में समय है। तुम्हारे हाथ में क्या है?"

"आम की गुठलियाँ।"

"क्या करोगी इनका?"

"स्कूल के बीच की कच्ची जमीन में इन्हें गाढ़ देंगे। इन से आम के पौधे उगेंगे। हम दोनों सखियों की तरह वे दोनों पौधे भी साथ साथ रहेंगे और ढेर सारे पंछी उन पर बसेरा करेंगे।"

"कितना अच्छा लगेगा हमें भी  छाया और फल मिलेंगे। फिर तो बड़ा मज़ा आयेगा, कच्ची अमियाँ खाने में"  मोनी अपने जूतों के फ़ीते बाँधते हुए बोली।

"मोनी, अब चलोगी या ख्याली पुलाव ही बनाती रहोगी?" सोनी ने मोनी के  कंधे पर एक धौल जमाया, "चलो  जल्दी, अब मुझसे इंतजार नहीं हो रहा। पंख होते तो उड़ कर स्कूल पहुँच जाती।"

"सोनी तुम ठहरी उड़न परी और हम ठहरे कछुए की चाल वाले।"

"बातें बनाना बंद कर और तेज चल वर्ना स्कूल की प्रार्थना की घंटी बज जायेगी और सारा प्लान खराब हो जाएगा।"

"न जी न, हम ऐसे नहीं होने देंगे। अब देखो मेरी चाल" कह कर मोनी ने अपने कदमों की रफ्तार बढ़ा दी।
बातें करते-करते दोनों स्कूल पहुँच गईं।

सोनी ने अपने बैग से एक छोटी खुरपी निकाली और दो गड्ढे तैयार कर लिए सोनी ने एक गुठली मोनी को दी। दोनों ने गुठलियों को बोकर मिट्टी से ढँक दिया। मोनी ढाक के पत्तों को मोड़कर उनमें पानी लाकर ताज़ा बोई गुठलियों पर झिड़क दिया। इतने में स्कूल की प्रार्थना की घंटी भी बज गई। सोनी और मोनी भागी और प्रार्थना में शामिल हो गईं।

अब तो नियम से सोनी और मोनी  रोज पानी देती और पौधे निकालने का इंतजार करती। एक दिन जब वे स्कूल पहुँची तो नन्हे-नन्हे पौधे देखकर उछल पड़ीं। समय बीतता गया और पौधों ने बड़े होकर घने छायादार वृक्षों  का  रुप ले लिया। बच्चों ने आम के पेड़ों का ही नाम सोनी और मोनी रख दिया।

प्राचार्य महोदय ने आम के वृक्षों के नीचे एक चबूतरा बनवा दिया। समय तो मानो पंख लगा कर कब उड़ गया पता ही नहीं चला। आज सोनी और मोनी का स्कूल में आखिरी दिन था। बारहवीं कक्षा में सोनी ने प्रथम और मोनी ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया था। इन्हीं आम के फलों से लदे वृक्षों की छाया में सम्मान समारोह आयोजित किया गया था।

प्राचार्य महोदय ने सोनी और मोनी को  सम्मानित करते हुए पर्यावरण संरक्षण के लिए दोनों को एक-एक ट्राफी प्रदान की जिस पर आम के वृक्ष बने थे। इतना सुंदर पुरस्कार देखकर दोनों की आँखे नम हो गई। समारोह खत्म होते ही वे आम के पेड़ों से लिपट गई। उन्होंने देखा कि आम के पेड़ों के नीचे एक नेम प्लेट लगी थी जिस पर उनके नाम अंकित थे। सभी बच्चों ने पेड़ के चारों तरफ घेरा ‌बनाकर तालियों से स्वागत किया प्राचार्य और अध्यापक गण गर्व का अनुभव कर रहे थे।

सोनी और मोनी ने अमिट यादें लेकर वृक्षों से विदा लेते हुए हाथ हिलाया। तभी पेड़ों ने अपनी डालियाँ हिलाकर कच्ची अमियाँ गिरा दी। सोनी और मोनी ने उपहार स्वरूप वो अमियाँ उठाली और अपने दोस्तों से विदा लेकर घर की और चल दीं।

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