संस्मरण: देवकी चाची

डॉ सुमन सिंह

स्त्री रोग विशेषज्ञ, हाजीपुर, बिहार, भारत

     बचपन की बात है पर मुझे आज भी अच्छी तरह याद है, सर्दी की वह सुबह। कोई आठ बजे रहे होंगे, किसी ने आकर खबर दी कि देवकी चाची नहा कर आंगन में बैठी थीं और अचानक बैठे बैठे ही गिर गईं और उनका निधन हो गया। माँ और बाबूजी तुरन्त उनके घर की ओर दौड़े। मैं भी उनके संग दौड़ चली। हमारे उनके घर पहुँचने तक और भी कई लोग आ चुके थे। वहीं आंगन में उन्हें लिटा दिया गया था। जाड़े की हल्की धूप में लग रहा था मानो वो सो रही हों।

              देवकी चाची हमारे रिश्ते में थीं, और हमारे घर से कुछ मकानों की दूरी पर अपने पुश्तैनी मकान में अकेली रहा करती थीं। लम्बा कद, गौर वर्ण, दमकता सुंदर चेहरा, करीने से सँवरे बाल, हमेशा धुली हुई साड़ी पहने। वे निःसंतान थीं और पति का साथ भी नहीं था। उनके रूखे स्वभाव, तेज कर्कश आवाज और गालियों की बौछार से सभी डरते थे। माँ कहती थी कि वे तो अपनी मुंडेर पर कौवे भी ना बैठने दें। ... पर मैं बेरोकटोक उनके घर आती जाती थी। वे मेरे आने का इंतजार भी करती थीं। सोमवारी मेले से उन्होंने मेरे लिए खिलौने भी खरीदे थे, जिनसे मैं अपनी माँ से छुपकर उनके घर पर खेला करती थी। मेरे लिए नारियल की मिठाई, अनरसे की गोली, बसोंधि, जलेबी, रंगीन चूड़ियाँ, रंग बिरंगे क्लिप भी खरीद कर रखती थीं वे। सात भाई बहनों में मंझली होने की वजह से माँ का प्यार मुझे कंजूसी से मिलता था। हर चीज सब में बँटकर मिलती थी। पर यहाँ, हर चीज पर मेरा आधिपत्य था, मुझे पूरा स्नेह और सुकून मिलता था। उनके घर देर हो जाने पर वे मुझे पहुँचाने मेरे संग मेरे घर चली आती थीं। मुझे डाँट से बचाने के लिए कितनी बार उन्होंने माँ से झूठ भी कहा था ... और... आज...

          सभी शांतिपूर्वक उनकी अंतिम विदाई की तैयारी कर रहे थे। कोई क्रंदन नहीं, कोई विलाप नहीं। पर मेरा अबोध मन जोर-जोर से रोने को कर रहा था। मुझे महसूस हो रहा था कि मेरा कुछ खो रहा है, जो फिर कभी लौटकर नहीं आने वाला है। श्रीराम नाम के साथ सब उन्हें लेकर चल दिये ... मैं चुपचाप उदास बस देखती रह गई।

          आज समझ पाती हूँ कि उनका कड़क स्वभाव ही उनका अस्त्र था, जिसके भय से कोई उन्हें छूने का साहस नहीं कर पाता था। सख्त कवच के अंदर बिल्कुल तन्हा एक दिल था, जिसमें प्रेम और ममता का अथाह सागर छिपा था, जिसके एहसास से इतने बरसों के बाद भी मेरी आँखें नम हो जाती हैं।

No comments :

Post a Comment

We welcome your comments related to the article and the topic being discussed. We expect the comments to be courteous, and respectful of the author and other commenters. Setu reserves the right to moderate, remove or reject comments that contain foul language, insult, hatred, personal information or indicate bad intention. The views expressed in comments reflect those of the commenter, not the official views of the Setu editorial board. प्रकाशित रचना से सम्बंधित शालीन सम्वाद का स्वागत है।