व्यंग्य: ईमानदारी की फाइल चोरी

- अशोक गौतम

सह आचार्य, एससीईआरटी सोलन


जंबूद्वीप के साहबालयों, मंत्रालयों से तो आए दिन जरूरी विवादित फाइलें चोरी होती ही रहती हैं पर गत दिवस यमलोक में दातादीन के कर्मों की फाइल चित्रगुप्त के ऑफिस से चोरी हो गई।

वैसे मित्रों! जंबूद्वीप से विवादित फाइलों का चोरी होना कोई नई बात नहीं है। फाइलें चोरी होना तो यहाँ की आम बात है, यहाँ कभी फाइलें चोरी हो जाती हैं तो कभी फाइलवाले। पर चित्रगुप्त के ऑफिस से पहली बार किसी जीव के कर्मों की फाइल चोरी हुई थी सो यह बात पता न लगते हुए भी पूरे यमलोक में दबे मुँह हाहाकार मच गया। जंबूद्वीप में तो एक पत्थर उखाड़ो तो बीस चोर दाँत निपोरते निकल आते हैं पर अब यमलोक में भी चोर!
यमलोक में इस दुर्घटना के बाद जो भी दातादीन के कर्मों की फाइल यमलोक में चोरी करने की बात सुनता, वही दाँतों तले अपनी तो अपनी, उसके नजदीक जो भी होता, उसकी भी उंगलियाँ तक अपने नकली दाँतों तक के तले दबा लेता।

फाइल चोरी की इस खबर को सुनते गुनते यमलोक के सभी निवासियों, सियासियों की उंगलियाँ कटने लगीं तो यमराज परेशान हो उठे। दूसरी ओर ज्यों ही ये कटी फटी खबर जंबूद्वीप के मीडिया के कान तक वहाँ नरक काट रहे खबरिए के माध्यम से पहुँची तो वह अपने द्वीप की चोरियों की खबरें देना बंद कर यमलोक में हुई दातादीन के कर्मों की चोरी हुई फाइल को लेकर बौरा उठा।

देखते ही देखते दातादीन के कर्मों की फाइल की चोरी की खबर की तह तक पहुँचने व चोरी हुई फाइल पर हो रही कार्यवाही के ताजा अपडेट्स जनता को देने के लिए कुछ चैनलों के पत्रकार तो यमराज की बिना परमिशन के ही यमलोक से इस वारदात को लाइव कवर करने हेतु अपनी जान हथेली पर रख वहाँ जाने को अपनी फ्री का जर्नलिज्म करते टूटी कमर तक रस्सी से कसने लगे।

आखिर चित्रगुप्त को अब लगा कि अब यमलोकाधिपति यमराज को यह खबर बता ही जाए तो उन्होंने यमराज से गंभीर होते कहा, ‘सर! सर!’

‘क्या है चित्रगुप्त? यमराज ने रंगोली देखते टीवी की आवाज म्यूट कर पहली बार उदास चित्रगुप्त से पूछा। चित्रगुप्त के चेहरे पर आज पहली बार यमराज ने हवाइयाँ उड़ते हुए देखीं तो वे परेशान हो उठे। वे देख रहे थे कि युगों हो गए चित्रगुप्त को जीवों के कर्मों का लेखा जोखा रखते, पर इतने परेशान तो वे कभी भी न दिखे। जब देखो, बस  मुस्कुराते हुए ही दिखते थे।

‘सर! अपने रिकार्डरूम से दातादीन के कर्मों की फाइल कहीं चोरी हो गईं।’

‘यमलोक में चोरी?’

‘हाँ सर! पहली बार यमलोक में चोरी हुई है,’  कह वे यमराज के आगे झुके मस्तक।

‘दातादीन कब आने वाला है?’

‘सर दो चार दिनों में। वह यहाँ आकर अपने कर्मों की फाइल गायब देखेगा तो क्या उसे यह यकीन हो पाएगा कि वह हमारे लोक में आ गया है या मरने के बाद भी अपने लोक में ही है? सर! लगता है अब यमलोक की नाक कट जाएगी।’

‘जंबू द्वीप के मीडिया को इस बारे में पता तो नहीं चला है न अभी?’

‘कुछ कहा नहीं जा सकता सर! पर जहाँ न पहुँचे रवि वहाँ पहुँचे जंबूद्वीप का मीडिया।’

‘वह बंदा कैसा है?’

‘है तो सर वह निहायत किस्म का ईमानदार इंसान। सड़क तक में चलते चलते कदम फूंक फूंक कर रखता है कि कहीं पाँव के नीचे आकर कोई चींटी न मर जाए। वह तो बस इसी आस में मर रहा है कि वहाँ तो उसे ईमानदारी का कोई पुरस्कार नहीं मिला पर मरने के बाद तो उसकी ईमानदारी की हमारे यहाँ कोई पूछ होगी, पर... पर आप तो जानते हैं कि अपने यहाँ बंदे नहीं, उनके रिकार्ड ही बोलते हैं। मुझे उसके चरित्र पर किसी तरह की कोई शंका तो नहीं, फिर भी रिकार्ड तो रिकार्ड होता है न सर!’

‘पर उसकी फाइल गायब कौन कर सकता है? किसमें इतना दुस्साहस हो गया कि मरने के बाद भी फाइल चोरी कर ले जाए? अपने कर्मचारियों से इधर उधर फाइल ढुंढवाई? कहीं वह किसी अलमारी के पीछे ही तो नहीं गिर गई है?’

‘सर! सारे में देखी। जंबूद्वीप तक में ढुंढवा ली पर...’

‘उससे पहले कोई उसका दोस्त तो नहीं आया है जो मरने के बाद भी उसे तंग करना चाहता हो?’

‘आया तो है सर! वह अपने को दातादीन का खास दोस्त बता रहा था। हो सकता है ... पर हम जबूंद्वीप के नेताओं की तरह बिन सबूतों के दावे से यह कैसे कह सकते हैं कि? बिना सबूतों के एक दूसरे पर आरोप लगाना तो जंबूद्वीप के नेताओं का राजधर्म है, हमारा नहीं।’

‘तो ऐसा करो, अपने थाने में फाइल गुम होने की एफआईआर दर्ज करवा दो ताकि कम से कम जंबूद्वीप के अनाप शनाप बकने वाले मीडिया का मुँह तो तनिक बंद किया जा सके।’

‘पर सर! ऐसा करने पर कहीं हमारी व्यवस्था पर प्रश्न चिन्ह तो नहीं लग जाएगा?’

‘डियर चित्रगुप्त! प्रश्न चिन्ह तो वहाँ लगते हैं जहाँ उनके उत्तर हों। हमारे पास तो उन प्रश्नों के भी जीव को देने के उत्तर होते है जिन्हें वह सिरे से नकार अपने आप ही क्लीन चिट ले खारिज कर चुके होते हैं। डरो मत! सब ठीक हो जाएगा। नीचे से आए विपक्षी जीवों को इस काम में लगा दो। उन्हें पुरस्कार में कुर्सी देने की बात कहो। वे सब कर लेंगे,’ कह यमराज ने म्यूट किया टीवी पुनः एक्टिव मोड में कर दिया और रंगोली देखने में लीन हो गए।

गौतम निवास, अप्पर सेरी रोड, सोलन-173212, हिमाचल प्रदेश; चलभाष: ‌‌‌‌91 941 807 0089

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