बुन्देलखण्ड की शिक्षा: वर्तमान परिदृश्य, समस्याएँ एवं समाधान

- पुनीत बिसारिया

प्रस्तावना:
बुन्देलखण्ड क्षेत्र भारत का हृदय स्थल है उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में विभक्त बुन्देलखण्ड अंचल के उत्तर प्रदेश राज्य की सीमा को प्रशासनिक सुविधा की दृष्टि से दो मण्डलों-झाँसी मण्डल तथा चित्रकूट मण्डल में विभक्त किया गया है, जिनमें कुल सात जनपद सम्मिलित हैं। ये सात जिले झाँसी, ललितपुर, जालौन, बांदा, हमीरपुर, चित्रकूट और महोबा हैं, जो अपने प्राकृतिक सौन्दर्य, पुरातात्विक संपदा, शौर्य से परिपूर्ण इतिहास तथा साहित्यिक उत्कृष्टता के लिए विख्यात हैं झाँसी मण्डल के अंतर्गत झाँसी, ललितपुर और जालौन जिले आते हैं तथा चित्रकूट मण्डल के अंतर्गत बांदा, हमीरपुर, चित्रकूट और महोबा जिले आते हैं बुन्देलखण्ड उत्तर भारत को दक्षिण भारत से जोड़ने का संधि स्थल भी है, किन्तु दुर्भाग्य का विषय है कि बुन्देलखण्ड अंचल में ज्ञान की ज्योति अभी तक पूरी तरह नहीं प्रज्वलित की जा सकी है फलतः बुन्देलखण्ड परिक्षेत्र आजादी के 73 वर्ष बीत जाने के बावजूद आज भी शिक्षा के क्षेत्र में बहुत पिछड़ा है।

प्राथमिक शिक्षा:
प्राथमिक शिक्षा किसी भी विद्यार्थी की शिक्षा की नींव होती है यदि शिक्षा रूपी भवन की नींव ही कमजोर होगी तो उस पर बनने वाला ज्ञान का प्रासाद कितना कमजोर और जर्जर होगा, इसकी स्वतः कल्पना की जा सकती है अतएव यदि बुन्देलखण्ड अंचल में ज्ञान की ज्योति जलानी है तथा यहाँ ज्ञानवान एवं मेधावी विद्यार्थी तैयार करने हैं तो हमें शिक्षा की नींव अर्थात प्राथमिक शिक्षा को सुदृढ़ करना ही होगा
बुन्देलखण्ड अंचल के अनेक क्षेत्र दुर्गम और भौगोलिक रूप से पठारी क्षेत्र होने के कारण यहाँ के अनेक क्षेत्रों में या तो प्राथमिक विद्यालय नहीं हैं और यदि हैं भी तो वहाँ मूलभूत  सुविधाओं के अभाव में शिक्षक न तो रहना पसंद करते हैं और न ही वहाँ के प्राथमिक विद्यालयों में नियुक्त होकर जाना पसंद करते हैं यदि प्राथमिक विद्यालय हैं भी तो दुर्भाग्य का विषय है कि आजादी के 73 वर्ष बीत जाने के बावजूद बुन्देलखण्ड परिक्षेत्र के इन सात जनपदों में निवास करने वाले बालक/बालिकाओं के लिए उपलब्ध प्राथमिक विद्यालयों में आज भी समुचित प्राथमिक शिक्षा की सुविधाओं का घोर अभाव है।

वर्तमान परिदृश्य:
वर्ष 2011 की जनगणना के आंकड़ों के अनुसार उत्तर प्रदेश स्थित बुन्देलखण्ड क्षेत्र के सभी सात जिलों में साक्षरता की स्थिति निम्नवत है-
तालिका-1
बुन्देलखण्ड के सात जिलों में साक्षरता की स्थिति
जिले/ मण्डल का नाम
पुरुष साक्षरता दर
महिला साक्षरता दर
औसत
झाँसी
88.35
74.10
81.22
ललितपुर
89.12
75.06
82.09
जालौन
83.48
62.46
72.97
झाँसी मण्डल
86.98
70.54
78.76
महोबा
75.83
53.22
64.53
हमीरपुर
79.76
55.95
67.86
चित्रकूट
75.80
52.74
64.27
बांदा
77.78
53.67
65.73
चित्रकूट मण्डल
77.29
53.90
65.60
             (स्रोत: भारत की जनगणना 2011 की वेबसाइट)

तालिका-1 से स्पष्ट है कि बुन्देलखण्ड अंचल के सभी जिलों में पुरुष और महिला साक्षरता की दर में काफी अंतर है, जिसे कम करने की आवश्यकता है अनेक जिलों में यह अंतर 20 से 24 प्रतिशत की खतरनाक दर तक है जैसे-जालौन में यह अंतर लगभग 21 प्रतिशत, महोबा में 22 प्रतिशत से अधिक, हमीरपुर में लगभग 24 प्रतिशत, चित्रकूट में 24 प्रतिशत और बांदा में 24 प्रतिशत से अधिक है, जिसे कम करने की ज़रूरत है इसके लिए इन जनपदों में प्राथमिक स्तर पर बालिका शिक्षा पर विशेष अभियान चलाने की आवश्यकता है उत्तर प्रदेश में पुरुष साक्षरता की दर 77.28 प्रतिशत तथा महिला साक्षरता दर 57.18 प्रतिशत है एवं उत्तर प्रदेश की औसत साक्षरता दर 67.23 प्रतिशत है, जबकि भारत में पुरुष साक्षरता की दर 82.14 प्रतिशत तथा महिला साक्षरता दर 65.46 प्रतिशत है एवं देश  की औसत साक्षरता दर 73.80 प्रतिशत है इस दृष्टि से भी बुन्देलखण्ड अंचल के महोबा, बांदा और हमीरपुर जिलों की औसत साक्षरता को बढ़ाने हेतु विशेष प्रयास किये जाने की ज़रूरत है महिलाओं की साक्षरता की दृष्टि से महोबा, हमीरपुर, चित्रकूट तथा बांदा जिलों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है पुरुषों की साक्षरता की दृष्टि से महोबा और चित्रकूट पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है आश्चर्यजनक रूप से झाँसी, ललितपुर और जालौन जिलों की साक्षरता दर अपेक्षाकृत बेहतर है समग्रतः महोबा, हमीरपुर, चित्रकूट तथा बांदा जिलों की साक्षरता को बढाने हेतु आवश्यक उपाय किये जाने चाहिए

बुन्देलखण्ड परिक्षेत्र में प्राथमिक शिक्षा की जो वर्तमान समस्याएँ हैं, उन्हें हम निम्नांकित सात वर्गों में विभाजित करते हैं-

समस्याएँ:
1.     प्राथमिक शिक्षक नियुक्ति प्राप्त करने के बाद बुन्देलखण्ड परिक्षेत्र के दुर्गम एवं दूरस्थ अंचलों में पढ़ाने जाने से इतराते हैं और या तो वे येनकेन प्रकारेण अपना स्थानान्तरण नगरीय इलाकों में अथवा हाईवे पर स्थित प्राथमिक विद्यालयों में कराकर मुख्यालय से प्रतिदिन आने-जाने की व्यवस्था करते हैं, जिससे उनका अधिकांश समय आने-जाने में व्यतीत हो जाता है और वे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने में रुचि नहीं ले पाते
2.     वित्तविहीन शिक्षक, संविदा शिक्षक, शिक्षा मित्र आदि की व्यवस्था में रहकर शिक्षक अपने भविष्य के प्रति आशंकित रहता है और वह अपना शत प्रतिशत योगदान नहीं दे पाता
3.     प्राथमिक शिक्षक पर राजनैतिक दबाव अत्यधिक रहते हैं और उनका काफी समय शिक्षणेत्तर कार्यों में व्यतीत होता है
4.       प्राथमिक स्तर पर बनने वाले मिड डे मील को बनवाने तथा बंटवाने में भी समय का अपव्यय होता है मिड डे मील की गुणवत्ता में कमी की शिकायतें भी अक्सर देखने को मिलती हैं
5.     बुन्देलखण्ड क्षेत्र में स्थित प्राथमिक विद्यालयों में मूलभूत सुविधाओं जैसे कक्ष, फर्नीचर, ब्लैकबोर्ड, स्टेशनरी, शौचालय, विद्युत संयोजन, पेयजल, कंप्यूटर, इण्टरनेट, छात्रावास, शिक्षकों एवं कर्मचारियों हेतु आवास आदि का अभाव रहता है
6.      प्राथमिक शिक्षा मातृभाषा में न दिए जाने तथा पारम्परिक ढर्रे पर दिए जाने अथवा अंग्रेज़ी माध्यम से दिए जाने के कारण अक्सर विद्यार्थियों में अध्ययन के प्रति रुचि नहीं रहती है
7.     ज्ञान देने के नाम पर खुले तथाकथित अंग्रेजी माध्यम से शिक्षा देने वाले निजी स्कूल अधकचरे ज्ञान प्राप्त शिक्षकों की नियुक्ति कर नौनिहालों के भविष्य से खिलवाड़ कर रहे हैं

अतः प्राथमिक शिक्षा में व्याप्त उपर्युक्त समस्याओं के समाधान के लिए निम्नांकित सुझाव प्रस्तुत हैं -

समाधान:
1.     बुन्देलखण्ड क्षेत्र में प्राथमिक शिक्षा के विकास के लिए सभी प्राथमिक विद्यालयों में ‘लर्न बाइ फन स्कीम’ शुरू की जानी चाहिए, जिससे खेल-खेल में विद्यार्थी ज्ञानार्जन कर सकें
2.     सभी प्राथमिक विद्यालयों में स्मार्ट क्लास रूम बनाकर फिल्मों, एनीमेशन, कठपुतली आदि से शिक्षा दी जानी चाहिए
3.     सभी प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षण कक्षों में में सीसीटीवी लगाकर ब्लॉक, तहसील या जनपद स्तर पर इनका अनुश्रवण किया  जाना चाहिए
4.     सभी प्राथमिक विद्यालयों में इण्टरनेट की सुविधा देकर कम से कम सप्ताह में एक बार देश-प्रदेश के अन्य प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षकों के ऑनलाइन व्याख्यान आयोजित कराए जाने चाहिए 
5.     प्राथमिक शिक्षा से जुड़े शिक्षकों की निर्धारित अवधि में विद्यालयों में उपस्थिति कड़ाई से सुनिश्चित की जानी चाहिए
6.     प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षकों को शिक्षा की नवीनतम तकनीक का ज्ञान देने हेतु विश्वविद्यालय स्तर पर अथवा निकटस्थ राजकीय अथवा अनुदानित महाविद्यालयों में कार्यशाला अथवा अभिमुखीकरण कार्यक्रम आयोजित किया जाना चाहिए
7.     प्राथमिक विद्यालयों में समय-समय पर माध्यमिक तथा उच्च शिक्षा से जुड़े शिक्षकों को आमंत्रित कर उनके व्याख्यान आयोजित किए जाने चाहिए
8.     प्राथमिक विद्यालयों में आधारभूत संरचना के विकास, छात्र/शिक्षक अनुपात हेतु निर्धारित प्रावधान कड़ाई से लागू किए जाने की ज़रूरत है बुन्देलखण्ड में प्राथमिक शिक्षा में शिक्षकों एवं कर्मचारियों की भारी कमी है प्रधानाचार्यों, शिक्षकों एवं कर्मचारियों की आवश्यकता को देखते हुए नियुक्ति की जानी चाहिए   
9.     प्राथमिक विद्यालयों में मूलभूत सुविधाओं जैसे कक्ष, फर्नीचर, ब्लैकबोर्ड, स्टेशनरी, शौचालय, पेयजल, कंप्यूटर, इण्टरनेट, छात्रावास आदि की आवश्यकतानुसार व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए    
10. प्राथमिक विद्यालयों में मिड डे मील के घपलों को रोकने के लिए इसकी व्यवस्था ग्राम प्रधान के स्थान पर उपजिलाधिकारी के माध्यम से बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा ग्राम प्रधान/नगर पंचायत अध्यक्ष/ नगर पालिका अध्यक्ष/मेयर की देखरेख में सुनिश्चित की जानी चाहिए और समय-समय पर इसकी जांच सोशल ऑडिट अथवा जिलाधिकारी द्वारा कराई जानी चाहिए
11. प्राथमिक विद्यालयों में ही प्रधानाचार्यों, शिक्षकों तथा कर्मचारियों की अनिवार्य आवासीय व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि विद्यालयों में शिक्षकों के न आने, मुख्यालय से रोज़ आने-जाने के कारण विलम्बित होने अथवा समय पर न उपस्थित रहने की समस्या खत्म की जा सके
12. प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ने हेतु प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से तहसील स्तर पर शिक्षा जागरूकता मेलों का आयोजन किया जाना चाहिए
13. शिक्षण का माध्यम अंग्रेजी के स्थान पर हिन्दी होना चाहिये तथा निजी स्कूलों में भी अंग्रेजी माध्यम की बाढ़ पर कड़ाई से रोक लगाई जानी चाहिए कक्षा 6 से पहले किसी भी विद्यालय में अंग्रेजी का शिक्षण नहीं कराया जाना चाहिए इसके स्थान पर संस्कृत की मूलभूत जानकारी दी जानी चाहिए 
14. तथाकथित अंग्रेजी माध्यम से शिक्षा देने वाले स्कूल अधकचरे ज्ञान प्राप्त शिक्षकों की नियुक्ति कर नौनिहालों के भविष्य से खिलवाड़ कर रहे हैं इनमें भी नियुक्ति हेतु सरकारी विद्यालयों जैसी न्यूनतम अर्हता अनिवार्य की जानी चाहिए तथा इनके पाठ्यक्रम, शिक्षकों की संख्या, कर्मचारी, वेतन आदि का समुचित नियमन प्रदेश सरकार द्वारा किया जाना चाहिए
15. सभी प्राथमिक विद्यालयों में नैतिक मूल्यों, संस्कारों तथा स्वच्छता एवं स्वास्थ्य के लिए अलग से एक पीरियड होना चाहिए
16. बुन्देलखण्ड के बच्चों को बुन्देली संस्कृति तथा बुन्देलखण्ड के महापुरुषों की विशेष रूप से जानकारी दी जानी चाहिए
17.  बुन्देलखण्ड की जलवायु सौर ऊर्जा के लिए उपयुक्त है अतः बुन्देलखण्ड के सभी प्राथमिक विद्यालयों में अनिवार्य रूप से सोलर पैनल लगाए जाने चाहिए

बुन्देलखण्ड परिक्षेत्र के प्रत्येक जनपद में प्राथमिक शिक्षा में व्याप्त उपर्युक्त समस्याएँ एवं उनके समाधान हेतु प्रस्तुत किए गए सुझावों पर यदि कार्य किया जायेगा तो शीघ्र ही प्राथमिक शिक्षा के स्तर में गुणात्मक सुधार दिखाई देगा एवं बुन्देलखण्ड के छात्र/छात्राएँ गुणवत्तापूर्ण प्राथमिक शिक्षा प्राप्त कर सकेंगे तथा उत्कृष्ट प्राथमिक शिक्षा के फलस्वरूप उन छात्र/छात्राओं को बेहतर तैयारी के साथ माध्यमिक शिक्षा प्राप्त करने का सुअवसर प्राप्त होगा एवं ज्ञानवर्धन के साथ स्वरोजगार प्राप्त करने हेतु भी उन्हें अवसर प्राप्त होंगे। इन समस्याओं के समाधान से बुन्देलखण्ड के सातों जनपदों के छात्र-छात्राओं को गुणवत्तापूर्ण, संस्कारयुक्त शिक्षा प्राप्त होगी।

माध्यमिक शिक्षा:
बुन्देलखण्ड परिक्षेत्र आज भी माध्यमिक शिक्षा में बहुत पिछड़ा है। यहाँ के निवासियों में बहुत कम लोग ही माध्यमिक शिक्षा प्राप्त कर पाते हैं। यहाँ के अधिकतर विद्यार्थी प्राथमिक शिक्षा प्राप्त करने के बाद पढ़ाई छोड़ देते हैं यदि वे माध्यमिक शिक्षा प्राप्त करने जाते भी हैं तो ऐसा वे ज्ञानार्जन हेतु न करके छात्रवृत्ति प्राप्त करने के उद्देश्य से करते हैं इसी का परिणाम है कि बुन्देलखण्ड माध्यमिक शिक्षा की दृष्टि से बहुत ही पिछड़ा हुआ है और बुंदेलखण्ड परिक्षेत्र के सभी सात जनपदों में माध्यमिक शिक्षा की स्थिति बहुत ही गंभीर एवं चिन्तनीय बनी हुई है।

वर्तमान परिदृश्य:
उत्तर प्रदेश स्थित बुन्देलखण्ड क्षेत्र के सभी सात जिलों में वर्तमान समय में संचालित माध्यमिक विद्यालयों  की स्थिति निम्नवत है-
तालिका-2
बुन्देलखण्ड के सात जिलों में माध्यमिक विद्यालयों की स्थिति
जिले/मण्डल का नाम
राजकीय विद्यालयों की संख्या

सहायता प्राप्त विद्यालयों की संख्या

वित्तविहीन विद्यालयों की संख्या
जिले में  विद्यालयों की कुल संख्या

हाईस्कूल + इण्टरकॉलेज =योग
हाईस्कूल + इण्टरकॉलेज =योग
हाईस्कूल + इण्टरकॉलेज =योग
राजकीय+ सहायता प्राप्त+ वित्तविहीन =योग
झाँसी
19+16=35
25+23=48
49+104=153
35+48+153=236
ललितपुर
31+07=38
06+05=11
20+41=61
38+11+61=110
जालौन
15+13=28
24+39=63
54+92=146
28+63+146=237
झाँसी मण्डल
65+36=101
55+67=122
123+237=360
101+122+360=583
महोबा
20+13=33
05+05=10
28+24=52
33+10+52=95
हमीरपुर
16+14=30
10+12=22
34+56=90
30+22+90=142
चित्रकूट
22+07=29
03+13=16
16+48=64
29+16+64=109
बांदा
28+16=44
13+17=30
36+53=89
44+30+89=163
चित्रकूट मण्डल
86+50=136
31+47=78
114+181=295
136+78+295=509
                                                            (स्रोत: संयुक्त शिक्षा निदेशक, झाँसी तथा चित्रकूट मण्डल)

उपर्युक्त तालिका से स्पष्ट है कि बुन्देलखण्ड परिक्षेत्र में माध्यमिक विद्यालयों की कमी है ऐसा प्रतीत होता है कि बुन्देलखण्ड की माध्यमिक शिक्षा की लगभग आधी व्यवस्था वित्तविहीन विद्यालयों के रहमोकरम पर है, जो अत्यंत गंभीर स्थिति का संकेतक है
आइये, अब सत्र 2019-20 में उत्तर प्रदेश स्थित बुन्देलखण्ड अंचल के सभी सात जिलों एवं दोनों मण्डलों में छात्र/छात्राओं के नामांकन की स्थिति देखते हैं-

बुन्देलखण्ड के सात जिलों के माध्यमिक विद्यालयों में सत्र 2019-20 में नामांकन की स्थिति:
तालिका-3
जिले/मण्डल का नाम
विद्यालयों की कुल संख्या

सत्र 2019-20 में नामांकन
झाँसी
236
106193
ललितपुर
110
65899
जालौन
237
106970
झाँसी मण्डल
583
279062
महोबा
95
39857
हमीरपुर
142
72280
चित्रकूट
109
55458
बांदा
163
83514
चित्रकूट मण्डल
509
251109
                                                  (स्रोत: संयुक्त शिक्षा निदेशक, झाँसी तथा चित्रकूट मण्डल)

उपर्युक्त तालिका से स्पष्ट है कि बुन्देलखण्ड परिक्षेत्र में माध्यमिक विद्यालयों की कमी है तथा नामांकन की स्थिति में सुधार की भी गुंजाइश है ऐसा प्रतीत होता है कि झाँसी मण्डल की तुलना में चित्रकूट मण्डल पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है

बुन्देलखण्ड के सात जिलों के राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में सत्र 2019-20 में शिक्षकों की स्थिति
तालिका-4
जिले/मण्डल का नाम
प्रधानाचार्यों की  संख्या
कार्यरत
(रिक्त)

प्रधानाध्यापकों की  संख्या
कार्यरत
(रिक्त)

प्रवक्ताओं की  संख्या
कार्यरत
(रिक्त)

सहायक अध्यापकों की  संख्या
कार्यरत
(रिक्त)
झाँसी मण्डल
04
 (11)
20
(03)
33
(127)
161
(170)
चित्रकूट मण्डल
86
(50)
136
(01)
49
(39)
48
(55)
बुन्देलखण्ड क्षेत्र
90
(61)
156
(04)
82
(166)
209
(225)
                                                  (स्रोत: संयुक्त शिक्षा निदेशक, झाँसी तथा चित्रकूट मण्डल)

तालिका 4 से स्पष्ट है कि बुन्देलखण्ड के सात जिलों के राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में सत्र 2019-20 में शिक्षकों की स्थिति संतोषजनक नहीं है और इन सभी जिलों में प्रधानाचार्यों, प्रधानाध्यापकों, प्रवक्ताओं तथा सहायक अध्यापकों के अनेक पद रिक्त हैं झाँसी मण्डल में राजकीय माध्यमिक विद्यालयों की संख्या बढ़ाई जानी चाहिए, जबकि चित्रकूट मण्डल में रिक्त पदों को भरे जाने पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है

बुन्देलखण्ड के सात जिलों के राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में सत्र 2019-20 में विद्युत संयोजन तथा शौचालयों की स्थिति
तालिका-5
जिले/मण्डल का नाम
राजकीय माध्यमिक विद्यालयों की  संख्या

विद्युत संयोजन युक्त राजकीय माध्यमिक विद्यालयों की  संख्या

विद्युत संयोजन रहित राजकीय माध्यमिक विद्यालयों की  संख्या

शौचालय युक्त राजकीय माध्यमिक विद्यालयों की  संख्या

शौचालय रहित राजकीय माध्यमिक विद्यालयों की  संख्या

झाँसी मण्डल
101
52
49
97
39
चित्रकूट मण्डल
236
88
48
102
34
बुन्देलखण्ड क्षेत्र
337
140
97
199
73
                                                            (स्रोत: संयुक्त शिक्षा निदेशक, झाँसी तथा चित्रकूट मण्डल)

बुन्देलखण्ड के सात जिलों के राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में सत्र 2019-20 में स्वच्छ पेयजल तथा आरओ एवं वाटर कूलर पेयजल सुविधा की स्थिति
तालिका-6
जिले/मण्डल का नाम
राजकीय माध्यमिक विद्यालयों की  संख्या

स्वच्छ पेयजल  युक्त राजकीय माध्यमिक विद्यालयों की  संख्या

स्वच्छ पेयजल  रहित राजकीय माध्यमिक विद्यालयों की  संख्या

आरओ एवं वाटर कूलर पेयजल सुविधा युक्त राजकीय माध्यमिक विद्यालयों की  संख्या

आरओ एवं वाटर कूलर पेयजल सुविधा रहित राजकीय माध्यमिक विद्यालयों की  संख्या

झाँसी मण्डल
101
94
42
15
86
चित्रकूट मण्डल
236
117
19
25
111
बुन्देलखण्ड क्षेत्र
337
211
61
40
197
                                                            (स्रोत: संयुक्त शिक्षा निदेशक, झाँसी तथा चित्रकूट मण्डल)

बुन्देलखण्ड के सात जिलों के राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में सत्र 2019-20 में फर्नीचर तथा छात्रावास सुविधा की स्थिति
तालिका-7
जिले/मण्डल का नाम
राजकीय माध्यमिक विद्यालयों की  संख्या

फर्नीचर युक्त राजकीय माध्यमिक विद्यालयों की  संख्या

फर्नीचर रहित राजकीय माध्यमिक विद्यालयों की  संख्या

छात्रावास युक्त राजकीय माध्यमिक विद्यालयों की  संख्या

झाँसी मण्डल
101
73
28
09
चित्रकूट मण्डल
236
78
58
11
बुन्देलखण्ड क्षेत्र
337
151
86
20
                                                            (स्रोत: संयुक्त शिक्षा निदेशक, झाँसी तथा चित्रकूट मण्डल)

तालिका संख्या 5, तालिका संख्या 6 तथा तालिका संख्या 7 का अवलोकन करने से यह स्पष्ट हो जाता है कि बुन्देलखण्ड के सभी सात जिलों में स्थित राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में शौचालय, विद्युत संयोजन, स्वच्छ पेयजल तथा आरओ एवं वाटर कूलर और छात्रावास जैसी मूलभूत सुविधाओं का नितांत अभाव है

समस्याएँ: 
माध्यमिक शिक्षा में वर्तमान में जो गंभीर समस्याएँ हैं, वे निम्नांकित हैं-

1.      बुंदेलखण्ड के प्रत्येक जनपद में पढ़ने वाले छात्र/छात्राओं की संख्या की तुलना में उच्च और उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों तथा इण्टर कालेजों का अत्यंत अभाव है। वर्तमान नामांकन की स्थिति को देखते हुए नियमानुसार झाँसी में 101, ललितपुर में 10, जालौन में 14, बांदा में 06, महोबा में 08, चित्रकूट में 03 हाई स्कूल खोले जाने की आवश्यकता है तथा झाँसी मण्डल में 20 एवं चित्रकूट मण्डल में 11 इण्टर कॉलेजों  की और आवश्यकता है
2.      बुंदेलखण्ड के प्रत्येक जनपद में जितने इण्टरमीडिएट कालेज तथा उच्च और उच्चतर माध्यमिक विद्यालय वर्तमान में संचालित हैं, उनमें छात्र-शिक्षक अनुपात असंतुलित है और यहाँ के उच्च माध्यमिक विद्यालयों तथा इण्टर कालेजों में शिक्षकों का अत्यंत अभाव है। वर्तमान नामांकन की स्थिति को देखते हुए झाँसी मण्डल में लगभग 1000 तथा चित्रकूट मण्डल में लगभग 1200 शिक्षकों की कमी है
3.      बुंदेलखण्ड में संचालित उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों तथा इण्टर कालेजों में आवश्यक संसाधनों जैसे फर्नीचर, पुस्तकालय, प्रसाधन, पेयजल, विद्युत, कंप्यूटर, बैठने के लिए कक्षों एवं छात्रावासों का नितांत अभाव है।
4.      बुंदेलखण्ड के प्रत्येक जनपद में सर्वशिक्षा अभियान के तहत जूनियर हाईस्कूल से हाईस्कूल के रूप में उच्चीकृत किए गए विद्यालयों में से अधिकांश हाईस्कूलों में मात्र एक-एक शिक्षक कार्यरत है, वही प्रधानाचार्य के दायित्व का निर्वहन कर रहा है और शिक्षक के रूप में वही अकेला कक्षाएं भी ले रहा है, जो व्यावहारिकता की दृष्टि से असंभव कार्य है, जिससे पठन-पाठन की व्यवस्था लगभग समाप्तप्राय है।
5.      सम्पूर्ण बुंदेलखण्ड में माध्यमिक स्तर पर कृषि शिक्षा का पूर्णरूपेण अभाव है। बुंदेलखण्ड में उन्नत कृषि तथा आधुनिकतम कृषि प्रविधियों की जानकारी न हो पाने के कारण यहाँ की कृषि आज भी परम्परागत तरीके से की जा रही है और आधुनिकतम कृषि के ज्ञान से यहाँ के किसान वंचित हैं  
6.      बुंदेलखण्ड के प्रत्येक जनपद में माध्यमिक स्तर पर संगीत, कला, शारीरिक शिक्षा, गृहविज्ञान, सिलाई, परम्परागत कुटीर उद्योगों के संरक्षण जैसे व्यावसायिक पाठ्यक्रमों तथा हस्तशिल्प, काष्ठ कला, चर्मकला, पाककला आदि विषयों  की शिक्षा एवं रोजगारोन्मुखी शिक्षा का पूर्णरूपेण अभाव है।
7.     दुर्गम और भौगोलिक रूप से पठारी क्षेत्र होने के कारण बुन्देलखण्ड के विद्यार्थी आवागमन की समुचित सुविधा न होने के कारण माध्यमिक शिक्षा से वंचित रह जाते हैं

अतः माध्यमिक शिक्षा में व्याप्त उपर्युक्त समस्याओं के समाधान के लिए निम्नांकित सुझाव प्रस्तुत हैं -

समाधान:
1.      बुन्देलखण्ड के प्रत्येक जनपद में नियमानुसार प्रत्येक पांच किलोमीटर पर एक माध्यमिक अथवा उच्च माध्यमिक विद्यालय या इण्टर कॉलेज खोला जाना सुनिश्चित किया जाना चाहिए इसके लिए मुख्यमंत्री त्वरित विकास योजना कार्यक्रम के अन्तर्गत विकास खण्ड स्तर पर एक-एक छात्रों तथा एक-एक छात्राओं के राजकीय इण्टर कालेज की स्थापना की जा सकती है।
2.      सभी माध्यमिक अथवा उच्च माध्यमिक विद्यालयों तथा इण्टर कॉलेजों के शिक्षण कक्षों में सीसीटीवी लगाकर ब्लॉक, तहसील या जनपद स्तर पर इनका अनुश्रवण किया  जाना चाहिए
3.      सभी माध्यमिक, उच्च माध्यमिक विद्यालयों तथा इण्टर कॉलेजों में इण्टरनेट की सुविधा देकर कम से कम सप्ताह में एक बार देश-प्रदेश के अन्य माध्यमिक अथवा उच्च माध्यमिक विद्यालय या इण्टर कॉलेजों के शिक्षकों के ऑनलाइन व्याख्यान आयोजित कराए जाने चाहिए
4.     बुन्देलखण्ड के दुर्गम और भौगोलिक रूप से पठारी क्षेत्र में स्थित विद्यालयों तक आवागमन में विद्यार्थियों की सुविधा हेतु  स्कूल बसें चलाई जानी चाहिए
5.      बुंदेलखण्ड के प्रत्येक जनपद में जो माध्यमिक, उच्च माध्यमिक विद्यालय तथा इण्टर कालेज वर्तमान समय में संचालित हैं, उनमें छात्र-शिक्षक अनुपात हेतु निर्धारित प्रावधान के अनुरूप सभी अनुदानित एवं राजकीय माध्यमिक, उच्च माध्यमिक विद्यालयों तथा इण्टर कॉलेजों में शिक्षकों की नियुक्ति की जानी चाहिए बुंदेलखण्ड के प्रत्येक जनपद में सर्वशिक्षा अभियान के तहत जूनियर हाईस्कूल से हाईस्कूल के रूप में उच्चीकृत किए गए विद्यालयों में भी छात्रांकन के अनुसार शिक्षकों की नियुक्ति की जानी चाहिए
6.      बुंदेलखण्ड के प्रत्येक जनपद में संचालित माध्यमिक, उच्च माध्यमिक विद्यालयों तथा इण्टर कॉलेजों में आवश्यक संसाधनों, जैसे- फर्नीचर, पुस्तकालय, प्रसाधन, पेयजल, विद्युत, कंप्यूटर, इण्टरनेट की व्यवस्था की जानी चाहिए एवं बैठने के लिए कक्षों तथा रहने के लिए छात्रावासों एवं शिक्षक-कर्मचारी आवासों का निर्माण कराया जाना चाहिए। सभी माध्यमिक विद्यालयों में आधारभूत संरचना के विकास हेतु निर्धारित प्रावधान कड़ाई से लागू किए जाने की ज़रूरत है
7.      बुंदेलखण्ड के प्रत्येक जनपद में माध्यमिक स्तर पर वर्तमान में संचालित सभी माध्यमिक, उच्च माध्यमिक विद्यालय तथा इण्टर कॉलेजों में अनिवार्य रूप से कृषि विज्ञान तथा शारीरिक शिक्षा की पढ़ाई प्रारम्भ की जानी चाहिए एवं इसके लिए कृषि विज्ञान तथा शारीरिक शिक्षा के शिक्षकों की नियुक्ति की जानी चाहिए
8.      बुंदेलखण्ड के प्रत्येक जनपद में माध्यमिक स्तर पर संचालित राजकीय तथा अनुदानित इण्टर कालेजों में संगीत, कला, शारीरिक शिक्षा, गृहविज्ञान, सिलाई जैसे व्यावसायिक पाठ्यक्रम शुरू किये जाने चाहिए तथा हस्तशिल्प, काष्ठ कला, चर्मकला, पाककला आदि विषयों की शिक्षा एवं रोजगारोन्मुखी शिक्षा प्रारम्भ की जानी चाहिए तथा इन विषयों के विशेषज्ञ शिक्षकों की नियुक्ति की जानी चाहिए
9.       माध्यमिक शिक्षा में वित्तविहीन शिक्षक की परंपरा खत्म की जानी चाहिए तथा वित्तविहीन विद्यालयों को अनुदान दिया जाना चाहिए, ताकि शिक्षा की गुणवत्ता सुधारी जा सके
10.  माध्यमिक शिक्षा के विद्यार्थियों को अन्ना प्रथा के दुष्प्रभावों तथा पराली जलाने के प्रदूषण से होने वाली हानियों के विषय में जागरूक करने हेतु समय-समय पर प्रबोधन कार्यक्रम किए जाने चाहिए इसके लिए माध्यमिक शिक्षा के राष्ट्रीय सेवा योजना, स्काउट एवं गाइड तथा एनसीसी के विद्यार्थियों को विशेष प्रशिक्षण भी दिया जा सकता है
11.  सभी माध्यमिक विद्यालयों में उच्च शिक्षा से जुड़े शिक्षकों को आमंत्रित कर उनके विशेष व्याख्यान आयोजित  कराए जाने चाहिए
12.  माध्यमिक शिक्षा में बुंदेलखण्ड के विद्यार्थियों की कमज़ोर आर्थिक स्थिति को देखते हुए शुल्क में कमी की जानी चाहिए
13.  सभी माध्यमिक विद्यालयों में स्मार्ट क्लास रूम बनाकर फिल्मों, ज्ञान दर्शन, कार्टून, कठपुतली  आदि से शिक्षा दी जानी चाहिए
14.  सभी माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों को शिक्षा की नवीनतम तकनीक का ज्ञान देने हेतु विश्वविद्यालय स्तर पर कार्यशाला अथवा अभिमुखीकरण कार्यक्रम आयोजित किया जाना चाहिए
15.  ग्रामीण क्षेत्रों में विद्यार्थियों के आवागमन हेतु स्कूल बसों की व्यवस्था की जानी चाहिए, ताकि विद्यार्थियों विशेषकर छात्राओं की संख्या में वृद्धि हो सके
16.  समस्त माध्यमिक विद्यालयों में ही प्रधानाचार्यों, शिक्षकों तथा कर्मचारियों की अनिवार्य आवासीय व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि विद्यालयों में शिक्षकों के न आने अथवा समय पर न उपस्थित रहने की समस्या खत्म की जा सके
17.  दूरस्थ अंचलों में स्थित विद्यालयों विशेषकर राजकीय इण्टर कॉलेजों में छात्रावास अवश्य होने चाहिए
18.  प्रत्येक तहसील में करियर तथा गाइडेंस सेल की स्थापना की जानी चाहिए, जो माध्यमिक स्तर के विद्यार्थियों को भविष्य के लिए परामर्श तथा रोज़गार की जानकारी दे सके 
19.  बुन्देलखण्ड की जलवायु सौर ऊर्जा के लिए उपयुक्त है अतः बुन्देलखण्ड के सभी माध्यमिक विद्यालयों में विद्युत आपूर्ति के लिए अनिवार्य रूप से सोलर पैनल लगाए जाने चाहिए
बुन्देलखण्ड परिक्षेत्र के प्रत्येक जनपद में माध्यमिक शिक्षा में व्याप्त उपर्युक्त समस्याएँ एवं उनके समाधान हेतु प्रस्तुत किए गए सुझावों पर यदि कार्य किया जायेगा तो शीघ्र ही माध्यमिक शिक्षा के स्तर में गुणात्मक सुधार दिखाई देगा एवं बुन्देलखण्ड के छात्र/छात्राएँ श्रेष्ठ माध्यमिक शिक्षा प्राप्त कर सकेंगे तथा माध्यमिक शिक्षा के फलस्वरूप उन छात्र/छात्राओं को उच्च शिक्षा प्राप्त करने का सुअवसर प्राप्त होगा एवं ज्ञानवर्धन के साथ स्वरोजगार प्राप्त करने हेतु भी उन्हें अवसर प्राप्त होंगे। इन समस्याओं के समाधान से बुन्देलखण्ड के सातों जनपदों में उच्चशिक्षा के स्तर में सुधार होगा एवं इन छात्र-छात्राओं को गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा प्राप्त होगी।

उच्च शिक्षा:
बुन्देलखण्ड परिक्षेत्र आजादी के 73 वर्ष बाद आज भी प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षा की भाँति ही उच्च शिक्षा में भी बहुत पिछड़ा है। यहाँ के निवासियों में 10 प्रतिशत से कम लोग ही उच्च शिक्षा प्राप्त कर पाते हैं। उच्च शिक्षा के अभाव में विकास की दृष्टि से कृषि, कला, पर्यटन, संस्कृति, रोजगार आदि में यहाँ के निवासी अभी भी बहुत पीछे हैं। आजादी के पूर्व तथा आजादी के पश्चात भी यहाँ उच्च शिक्षण संस्थानों का बहुत अभाव रहा है, जिस कारण यहाँ के निवासी उच्च शिक्षा से वंचित रहे हैं। फलस्वरूप बुंदेलखण्ड के निवासी देश के उच्च पदों पर अभी भी नहीं पहुँच सके हैं, अतएव यदि बुन्देलखण्ड का समग्र विकास करना है तो निश्चित रूप से यहाँ के निवासियों को गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा प्रदान करने के विषय में विचार करना पड़ेगा।

वर्तमान परिदृश्य:
           उत्तर प्रदेश की सीमा के अंतर्गत आने वाले सात जिलों के लिए झांसी में बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 26 अगस्त, सन 1975 को स्थापित किया गया था वर्तमान समय में बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय के झाँसी स्थित परिसर में निम्नांकित संकाय संचालित हैं-
1.      कला संकाय
2.      विज्ञान संकाय
3.      वाणिज्य संकाय
4.      शिक्षा संकाय
5.      अभियांत्रिकी संकाय
6.      चिकित्सा संकाय
7.      विधि संकाय
बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय परिसर में कुल 37 संस्थान तथा विभाग हैं, जिनके माध्यम से विभिन्न पाठ्यक्रमों में 15000 से अधिक विद्यार्थी अध्ययनरत हैं, जिनका विवरण निम्नवत है-
1.      हिन्दी विभाग
2.      अर्थशास्त्र विभाग
3.      अटलबिहारी वाजपेयी खाद्य प्रौद्योगिकी संस्थान
4.      डॉ एस आर रंगनाथन पुस्तकालय विज्ञान संस्थान
5.      व्यापार प्रशासन संस्थान
6.      पर्यटन और होटल प्रबंधन संस्थान
7.      भूविज्ञान विभाग
8.      गणित विज्ञान एवं कंप्यूटर अनुप्रयोग संस्थान
9.      शिक्षा संस्थान
10.  डॉ एपीजे  अब्दुल कलाम फोरेंसिक विज्ञान एवं अपराध विज्ञान संस्थान
11.  कृषि विज्ञान संस्थान
12.  गृह विज्ञान संस्थान
13.  अंग्रेजी विभाग
14.  ललित कला विभाग
15.  भास्कर पत्रकारिता और जनसंचार संस्थान
16.  डॉ बीआर आम्बेडकर समाज विज्ञान संस्थान
17.  पर्यावरण एवं विकास अध्ययन संस्थान
18.  जैवचिकित्सा विज्ञान विभाग
19.  जैव रसायन विभाग  
20.  जैव प्रौद्योगिकी संस्थान
21.  सूक्ष्मजैविकी संस्थान
22.  वनस्पति विज्ञान विभाग
23.  रसायनविज्ञान विभाग
24.  भौतिक विज्ञान विभाग
25.  जंतुविज्ञान विभाग
26.  मेजर ध्यानचंद शारीरिक शिक्षा संस्थान
27.  आर्किटेक्चर तथा नगर नियोजन संस्थान
28.  खाद्य प्रौद्योगिकी अभियांत्रिकी संस्थान
29.  बाबू जगजीवन राम विधि विज्ञान संस्थान
30.  इन्स्ट्रमेंटल एवं कण्ट्रोल अभियांत्रिकी संस्थान
31.  इलेक्ट्रॉनिक्स एवं कम्युनिकेशन अभियांत्रिकी संस्थान
32.  कम्पूटर विज्ञान एवं अभियांत्रिकी विभाग
33.  मैकेनिकल अभियांत्रिकी संस्थान
34.  फार्मेसी विज्ञान संस्थान
35.  पुनर्वास विज्ञान संस्थान
36.  कम्पूटर विज्ञान एवं सूचना संस्थान
37.  फिजियोथेरेपी विभाग
इनके अतिरिक्त वर्तमान में बुन्देलखण्ड परिक्षेत्र के सातों जनपदों में सवा दो लाख से अधिक विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा प्रदान कर रहे शिक्षण संस्थानों का विवरण इस प्रकार है-


  • अ.   झाँसी नपद
  • 1-          सभी सात जनपदों हेतु विश्वविद्यालय  -           01
  • 2-          कृषि विश्वविद्यालय                          -           01
  • 3-          मेडिकल कालेज                                -           01
  • 4-          इंजीनियरिंग कालेज                          -           01
  • 5-          सहायता प्राप्त महाविद्यालय              -           04
  • 6-          राजकीय आयुर्वेद महाविद्यालय                     -         01
  • 7-          स्ववित्तपोषित महाविद्यालय               -           64
  • 8-       राजकीय महाविद्यालय                      -           02
  • 9-          स्ववित्तपोषित इंजीनियरिंग कॉलेज       -           01
  • 10-       स्ववित्तपोषित आयुर्वेदिक कॉलेज                     -         01
  • ब. ललितपुर जनपद
  • 1-          सहायता प्राप्त महाविद्यालय              -           01
  • 2-          राजकीय महाविद्यालय                      -           04
  • 3-          स्ववित्तपोषित महाविद्यालय               -           25
  • स. जालौन जनपद
  • 1-          सहायता प्राप्त महाविद्यालय              -           04
  • 2-          राजकीय महाविद्यालय                      -           01
  • 3-          स्ववित्तपोषित महाविद्यालय               -           79
  • द. हमीरपुर जनपद      
  • 1-          राजकीय महाविद्यालय                      -           04
  • 2-          सहायता प्राप्त महाविद्यालय              -           01
  • 3-          स्ववित्तपोषित महाविद्यालय               -           10
  • य. महोबा जनपद
  • 1-          राजकीय महाविद्यालय                      -           02
  • 2-          स्ववित्तपोषित महाविद्यालय               -           23
  • र. बांदा जनपद
  • 1-          सहायता प्राप्त महाविद्यालय              -           02
  • 2-          राजकीय महाविद्यालय                      -           02
  • 3-          स्ववित्तपोषित महाविद्यालय               -           66
  • 4-       कृषि विश्वविद्यालय                          -           01
  • 5-       राजकीय एलोपेथिक महाविद्यालय       -           01
  • ल. चित्रकूट जनपद
  • 1-          सहायता प्राप्त महाविद्यालय              -           01
  • 2-          राजकीय महाविद्यालय                      -           02
  • 3-          स्ववित्तपोषित महाविद्यालय               -           21
उपर्युक्त सात जनपदों में विस्तीर्ण बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय, झाँसी से सम्बद्ध महाविद्यालय एवं संस्थान यहाँ की उच्च शिक्षा की पूर्ति कर रहे हैं लेकिन यहाँ यह ध्यान देने योग्य तथ्य है कि बुन्देलखण्ड क्षेत्र में विश्वविद्यालय, झाँसी से सम्बद्ध मात्र 13 अनुदानित महाविद्यालय, 19 राजकीय महाविद्यालय तथा 03 राजकीय आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज संचालित हैं, जबकि स्ववित्तपोषित योजनान्तर्गत यहाँ 316  महाविद्यालय तथा एक स्ववित्तपोषित आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज संचालित है इससे स्पष्ट है कि उत्तर प्रदेश की सीमा के अंतर्गत आने वाले बुन्देलखण्ड अंचल की लगभग सम्पूर्ण शिक्षा व्यवस्था स्ववित्तपोषित योजना के हवाले है इससे भी दुखद पहलू यह है कि स्वयं बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय, झाँसी भी अपने प्रारम्भ की तिथि से ही स्ववित्तपोषित की भांति कार्य कर रहा है क्योंकि इसे उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से एक रुपए का भी अनुदान प्राप्त नहीं होता और इस विश्वविद्यालय के परिसर में भी मात्र 8 विभाग नियमित हैं, शेष 29 स्ववित्तपोषित योजनान्तर्गत ही संचालित हैं लेकिन यहाँ के किसी भी विभाग के वेतन और भत्ते सरकार द्वारा नहीं दिए जाते परिणामतः ललितपुर से कालपी तक, कर्वी से हमीरपुर तक, जालौन से महोबा तक और बांदा से झाँसी तक विस्तीर्ण इस विश्वविद्यालय को छात्रों पर लगाये जाने वाले शुल्क से ही अपने सभी खर्चे पूरे करने पड़ते हैं बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय द्वारा संचालित पाठ्यक्रमों के अधिक शुल्क होने का एकमात्र कारण यही है

समस्याएँ:
आजादी के 73 वर्ष बाद बुन्देलखण्ड परिक्षेत्र के सात जनपदों में निवास करने वाले युवा छात्र-छात्राओं के लिए आज भी उच्च शिक्षा का अभाव हैं। आज भी यहाँ के निवासी संसाधनों के अभाव में चिकित्सा शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगारपरक शिक्षा से वंचित हैं। उच्च शिक्षा की जो वर्तमान समस्याएँ हैं, उन्हें हम निम्नांकित छः वर्गों में विभाजित करते हैं-
1.     बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय, झाँसी उत्तर प्रदेश के बुन्देलखण्ड अंचल का एकमात्र विश्वविद्यालय है, किन्तु दुर्भाग्य की बात है कि उत्तर प्रदेश शासन द्वारा इस विश्वविद्यालय को एक रुपए का भी अनुदान नहीं दिया जाता, जबकि उत्तर प्रदेश के अन्य विश्वविद्यालयों को वेतन/पेंशन आदि के लिए उत्तर प्रदेश सरकार अनुदान देती है इस कारण बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय को अपने लगभग सभी व्ययों की प्रतिपूर्ति छात्र/छात्राओं से लिए जाने वाले शुल्क से करनी पड़ती है इस कारण बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय पर आर्थिक दबाव रहता है और वह छात्र/छात्राओं से अधिक शुल्क लेने पर विवश होता है यदि उत्तर प्रदेश सरकार इस ओर ध्यान दे तो बुन्देलखण्ड जैसे पिछड़े और निर्धन अंचल में उच्च शिक्षा सस्ती और सर्वसुलभ हो सकती है
2.     बुन्देलखण्ड परिक्षेत्र में चिकित्सा, इंजीनियरिंग, तकनीकी एवं रोजगारपरक शिक्षा संस्थानों का नितांत अभाव है, जिसके कारण यहाँ के सुयोग्य विद्यार्थी इस क्षेत्र में ज्ञानार्जन से वंचित रह जाते हैं।
3.     सरकार द्वारा बुन्देलखण्ड परिक्षेत्र में स्थापित एवं संचालित राजकीय महाविद्यालयों में संसाधनों एवं सुविधाओं का अभाव है, जिससे उच्च शिक्षा का स्वप्न यहाँ के विद्यार्थियों के लिए पूर्ण नहीं हो पा रहा है
4.     उत्तर प्रदेश स्थित बुन्देलखण्ड अंचल के सभी सातों जनपदों हेतु पारंपरिक तथा वोकेशनल शिक्षा देने के लिए एक भी केन्द्रीय विश्वविद्यालय नहीं है, जिससे यहाँ के विद्यार्थी को अनेक महत्त्वपूर्ण पाठ्यक्रमों से वंचित रहना पड़ता है
5.     सहायता प्राप्त (अनुदानित) तथा राजकीय महाविद्यालयों में शिक्षकों तथा प्राचार्यों के रिक्त दों पर नियुक्ति न होना एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के पद खाली होना भी ज्ञानार्जन की एक बड़ी बाधा है, जिससे विद्यार्थी सिर्फ डिग्री लेने तक सीमित रह जाते हैं । सम्पूर्ण बुन्देलखण्ड परिक्षेत्र के 13 अनुदानित महाविद्यालयों में से सिर्फ 01 पंडित जवाहरलाल नेहरू कॉलेज, बांदा में ही स्थाई प्राचार्य कार्यरत हैं, शेष 12 महाविद्यालयों में प्रबंध तंत्र कार्यवाहक प्राचार्यों के माध्यम से मनमाने ढंग से काम कर रहे हैं अनेक में तो प्राचार्य-शिक्षक विवाद अथवा प्रबंध समितियों की वैधता के विवाद चल रहे हैं, जिनसे उच्च शिक्षा की हुन्वात्ता प्रभावित हो रही है अधिकांश राजकीय महाविद्यालयों में भी ऐसे ही हालात हैं  
6.     स्ववित्तपोषित योजनान्तर्गत संचालित महाविद्यालयों में अनुमोदन के अनुसार भौतिक रूप से शिक्षकों का अभाव रहता है एवं उनके स्थान पर अयोग्य शिक्षकों द्वारा अध्यापन कार्य कराना अथवा कक्षाओं का संचालित न होना भी उच्च शिक्षा की गुणवत्ता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े करता है।
              उपर्युक्त छः तरह की समस्याओं के कारण बुन्देलखण्ड परिक्षेत्र का युवा आज भी गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा से वंचित है।

       अतः उच्च शिक्षा में व्याप्त उपर्युक्त समस्याओं के समाधान के लिए निम्नांकित सुझाव प्रस्तुत हैं -

समाधान:
1.      बुन्देलखण्ड के प्रत्येक जनपद में एक मेडिकल कॉलेज, एक इंजीनियरिंग कॉलेज, एक वोकेशनल कॉलेज, एक क्रीड़ा महाविद्यालय, एक संगीत एवं नाट्य महाविद्यालय तथा एक कृषि महाविद्यालय की स्थापना की जानी चाहिए, जिससे इस परिक्षेत्र के युवाओं को इन विषयों की उच्च शिक्षा प्राप्त हो सके।
2.      सरकार द्वारा स्थापित एवं संचालित राजकीय महाविद्यालयों तथा अनुदानित महाविद्यालयों में मानक के अनुसार शिक्षकों की नियुक्ति की जाए एवं छात्र/छात्राओं के लिए अध्ययन-अध्यापन के संसाधन बढ़ाये जाएँ तथा नये रोजगारपरक पाठ्यक्रम खोले जाएँ
3.     उत्तर प्रदेश की सीमा में अवस्थित बुन्देलखण्ड के विद्यर्थियों के पारम्परिक विषयों के अध्ययन हेतु बुन्देलखण्ड परिक्षेत्र में एक भी केन्द्रीय विश्वविद्यालय नहीं है अतः उत्तर प्रदेश शासन द्वारा बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय, झाँसी को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा दिये जाने हेतु सिफ़ारिश करनी चाहिए, अन्यथा की स्थिति में उत्तर प्रदेश शासन द्वारा इसे समुचित शासकीय सहायता तथा वेतन एवं पेंशन आदि व्ययों हेतु राजकीय कोषागार से अनुदान देना चाहिए, ताकि विश्वविद्यालय तथा महाविद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थियों को शुल्क के बोझ से राहत मिल सके बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय, झाँसी को वेतन एवं पेंशन आदि व्ययों हेतु राजकीय कोषागार से लगभग 20 करोड़ रुपए प्रति वर्ष के अनुदान से इस समस्या का स्थाई समाधान किया जा सकता है 
4.      सहायता प्राप्त अनुदानित तथा राजकीय महाविद्यालयों में खाली पड़े हुए शिक्षकों के पदों को आयोग के माध्यम से तुरन्त भरा जाना चाहिए एवं इनमें संचालित सभी स्ववित्तपोषित पाठयक्रमों को अनुदानित पाठ्यक्रमों की सूची में लिया जाना चाहिए। बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय में संचालित सभी 29 स्ववित्तपोषित विभागों के सभी पाठ्यक्रम को भी अनुदानित पाठ्यक्रमों की सूची में लिया जाना चाहिए।
5.     स्ववित्तपोषित महाविद्यालयों की नियमावली बनायी जाय। जिला स्तर पर जिलाधिकारी की अध्यक्षता में महाविद्यालयों हेतु निरीक्षण समिति गठित की जाय। इस समिति द्वारा प्रति सप्ताह महाविद्यालयों का औचक निरीक्षण कर जिन शिक्षकों का अनुमोदन है, उनकी उपस्थिति सुनिश्चित की जाये एवं अध्ययन-अध्यापन सुनिश्चित कराया जाए। सभी महाविद्यालयों के शिक्षण कक्षों में सीसीटीवी लगाकर ब्लॉक, तहसील, जनपद और विश्वविद्यालय स्तर पर इनका अनुश्रवण किया  जाना चाहिए
6.     बुंदेलखण्ड के विद्यार्थियों की कमज़ोर आर्थिक स्थिति को देखते हुए उच्च शिक्षा में शुल्क में कमी की जानी चाहिए तथा प्रतिपूर्ति हेतु स्ववित्तपोषित महाविद्यालयों में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा शिक्षकों के वेतन हेतु अनुदान की व्यवस्था की जानी चाहिए बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय के 29 स्ववित्तपोषित विभागों के शिक्षकों हेतु भी उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा शिक्षकों के वेतन हेतु अनुदान की व्यवस्था की जानी चाहिए
7.     सभी उच्च शिक्षा संस्थानों में आधारभूत संरचना के विकास, छात्र/शिक्षक अनुपात हेतु निर्धारित प्रावधान कड़ाई से लागू किए जाने की ज़रूरत है
8.     अन्ना प्रथा तथा पराली जलाना बुन्देलखण्ड की बड़ी समस्या रही है अतः सभी उच्च शिक्षा के विद्यार्थियों को अन्ना प्रथा के दुष्प्रभावों तथा पराली जलाने से होने वाले प्रदूषण पर जागरूक करने हेतु समय-समय पर प्रबोधन कार्यक्रम किए जाने चाहिए इसके लिए राष्ट्रीय सेवा योजना, रोवर्स एवं रेंजर्स तथा एनसीसी के विद्यार्थियों को विशेष प्रशिक्षण भी दिया जा सकता है
9.     उच्च शिक्षा में स्ववित्त पोषित शिक्षक की परंपरा खत्म की जानी चाहिए
10. बुन्देलखण्ड की संस्कृति को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग में बुन्देली संग्रहालय, महर्षि वेद व्यास, चाणक्य, महारानी लक्ष्मीबाई, ईसुरी, राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त, गोस्वामी तुलसीदास, आचार्य केशवदास तथा वृंदावनलाल वर्मा शोध पीठ की स्थापना की जानी चाहिए एवं बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय में संस्कृत विभाग और योग तथा ज्योतिर्विज्ञान विभाग स्थापित किए जाने चाहिए
11. बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय में अकाल, पेयजल तथा कृषकों की अन्य समस्याओं का समाधान करने हेतु भूविज्ञान विभाग में एक शोधपीठ का गठन किया जाना चाहिए तथा खेलों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शारीरिक शिक्षा विभाग में हॉकी के जादूगर मेजर ध्यान चंद की स्मृति में मेजर ध्यान चंद शोध पीठ की स्थापना की जानी चाहिए 
12. बुन्देलखण्ड के समृद्ध पुरातात्विक इतिहास को खोजने के लिए इस अंचल में पुरातात्विक उत्खनन की आवश्यकता है तथा बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय में प्राचीन, मध्यकालीन तथा आधुनिक इतिहास के अध्ययन हेतु विभाग खोलकर पाठ्यक्रम आरंभ किए जाने चाहिए
13.  बुन्देलखण्ड की समृद्ध वैदिक परंपरा हेतु इस अंचल में पुरातात्विक उत्खनन की आवश्यकता है तथा बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय में प्राचीन, मध्यकालीन तथा आधुनिक इतिहास के अध्ययन हेतु पाठ्यक्रम आरंभ किए जाने चाहिए
14.  बुन्देलखण्ड के सभी उच्च शिक्षण संस्थानों में स्मार्ट क्लास रूम बनाकर फिल्मों, ज्ञान दर्शन आदि से शिक्षा दी जा चाहिए
15.  सभी उच्च शिक्षा संस्थानों में स्किल डेवलपमेंट, सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट इत्यादि के पाठ्यक्रम तथा पारम्परिक पाठ्यक्रमों के साथ-साथ किये जा सकने वाले सर्टिफिकेट कोर्स भी शुरू किये जाने चाहिए 
16. सभी उच्च शिक्षा संस्थानों में ही शिक्षकों की अनिवार्य आवासीय व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में शिक्षकों के न आने अथवा समय पर न उपस्थित रहने की समस्या खत्म की जा सके
17.  ग्रामीण क्षेत्रों में विद्यार्थियों के आवागमन हेतु स्कूल बसों की व्यवस्था की जाए, ताकि विद्यार्थियों विशेषकर छात्राओं की संख्या में वृद्धि हो सके
18.  प्रत्येक तहसील में करियर तथा गाइडेंस सेल की स्थापना की जानी चाहिए, जो विश्वविद्यालय स्तर के विद्यार्थियों को भविष्य के लिए परामर्श तथा रोज़गार की जानकारी दे सके 
19.  उत्तर प्रदेश के प्रमुख सचिव स्तर के अधिकारी की अध्यक्षता में एक समिति गठित की जानी चाहिए, जो उपर्युक्त बिन्दुओं की प्रतिमाह समीक्षा करे।
इन समस्याओं के समाधान से बुन्देलखण्ड के सातों जनपदों में उच्चशिक्षा के स्तर में सुधार होगा एवं इन सात जनपदों के छात्र-छात्राओं को गुणवत्तापूर्ण युक्त उच्च शिक्षा प्राप्त होगी।

*सदस्य प्राथमिक, माध्यमिक एवं उच्च शिक्षा समिति, बुन्देलखण्ड विकास बोर्ड एवं अध्यक्ष-हिन्दी विभाग तथा अध्यक्ष/निदेशक-शिक्षा संस्थान, बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय, झाँसी, उत्तर प्रदेश  

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