सारे जहाँ से अच्छा हिंदुस्तान हमारा

संहिता सुनकरा


संहिता शार्लेट, नार्थ कैरोलिना से हैं। माता-पिता आंध्र प्रदेश से हैं। ड्यूक विश्वविद्यालय में अर्थशास्त्र और कंप्यूटर विज्ञान पढ़ती हैं। हिंदी की द्वितीय वर्ष की छात्रा हैं। यात्रा करना पसंद है और अपनी यात्रा का अनुभव साझा करना भी पसंद है। भविष्य में अर्थशास्त्र में काम करना चाहती हैं। सम्पर्क: samhitha.sunkara@duke.edu


हमारा गाँव

हर तीन साल में मैं और मेरा परिवार भारत जाते हैं। हर बार हम गाँव में अपनी दादी के घर जाते हैं। मेरी चाची मेरी बहन और मुझे खेलने के लिए कृष्णा नदी के पास रेत में ले जाती हैं। एक बार जब हम रेत पर जा रही थीं एक आदमी ने हमें रोका और उसने मेरी चाची से पूछा: “क्या ये शिवाजी के बच्चे हैं?” मेरी चाची ने कहा “हाँ।” तब उसने कहा “शर्म की बात है कि उनका कोई बेटा नहीं है।” मेरे पिताजी इकलौते बेटे हैं इसलिए गाँव में सब लोग इस बात से निराश थे कि मेरे पिताजी की दो बेटियाँ हैं और कोई बेटा नहीं है।

भारतवंशी रचनाएँ
ऐसी सोच के कारण विदेशी लोग सोचते हैं कि भारत पिछड़ा है। विदेशी लोग सोचते हैं कि भारत गरीबी और लिंगभेद से भरा है। लेकिन पूरा भारत सेक्सिस्ट नहीं है। मेरी चाची महिलाओं के अधिकारों के लिए लड़ रही हैं। उन्होंने बहुत प्रगति की है और भारत में सिर्फ गरीबी ही नहीं है बल्कि  उस से ज्यादा भी कुछ है। आज मैं यह बताना चाहती हूँ कि कैसे विदेशी समाचार पत्र भारत के साथ न्याय नहीं करते। भारत जटिल है, और सुंदर भागों पर भी ध्यान देने को जरूरत है।

एक बार जब हम गाँव में थे मेरी दादी के घर के पास एक लड़ाई हो रही थी। गाँव के लोग रेत के ट्रकों पर चिल्ला रहे थे: “चले जाओ, यहाँ रेत से साँस लेने में मुश्किल हो रही है और रेत सड़कों को बर्बाद कर रहे हैं!” रेत के ट्रक चला रहे लोगों ने कहा: “हमें रेत बेचने और जीविकोपार्जन के लिए यहाँ ड्राइव करना पड़ता है।” इस लड़ाई के दौरान मेरी चाची और मैं अपने पोर्च पर बैठ गए और उन्होंने ट्रकवालों को समझाया: “प्रत्येक रेत ट्रक बारह लोगों के समान काम कर सकता है। यह रेत कंपनी की मदद करता है, लेकिन यह श्रमिकों को नुकसान पहुँचाता है।”

मेरी दादी लड़ाई देख रही हैं

इसने मुझे आर्थिक विकास के बारे में सिखाया। विकसित देश हमेशा सोचते हैं कि औद्योगिकीकरण अच्छा है। लेकिन औद्योगिकीकरण हमेशा नहीं ठीक है। कभी कभी औद्योगिकीकरण वातावरण को नुकसान पहुँचाता है इसलिए औद्योगिकीकरण से भारत का धीमा होना जरूरी नहीं है। कुछ लोग इसे भारत को अपने राष्ट्र की रक्षा के रूप में देख सकते हैं।

औद्योगिकीकरण के बिना गाँव अधिक शांतिपूर्ण और संपन्न हैं। प्रकृति गाँव में पनप रही है। गाँव में हर रात मैं और मेरी छोटी बहन घर की छत पर बैठकर गाय के झुंड को वापस जाते हुए देखते थे। सूरज उनके पैरों के ठीक पीछे दिखता था। आकाश मेरे हाथों पर मेंहदी की तरह गहरा नारंगी होता था। जब मैं साँस लेती थी तो चमेली की खुशबू आती थी। फिर हम नीचे आते थे और कपड़े सुखाने की रस्सी के पास कपड़ों को पीछे खेलते थे।

मैं, मेरी बहन और दादी छत पर बैठे हैं

रात में मेरी बहन, पिताजी और मैं पड़ोसियों को मिलते थे। सबके घर में नारियल का पेड़ और करी पत्ते के पौधे थे। जब हम पड़ोसियों से बात करते थे उसकी आँखों में चमक होती थी सब एक दूसरे की मदद करते थे और मैत्रीपूर्ण ढ़ंग से रहते थे। सबके घर के बाहर सुन्दर रंगोली होती और सब लोग बहुत खुशी से सभी का स्वागत करते हैं। यही गंगा-जमुनी तहजीब भारत की ताकत है।अमेरिका में बेहतर अर्थव्यवस्था हो सकती है; लेकिन भारत के गाँव के लोगों की सामाजिक एकता अधिक दिलचस्प है।

पापविनासनाम गाँव का दृश्य

अस्पताल का दौरा

कॉलेज की एक परियोजना के तहत में भारत वापस गई। यह परियोजना ड्यूक द्वारा आयोजित की गई थी। एक दिन हमने ताज महल की यात्रा करने की योजना बनाई। लेकिन हवाई अड्डे के लिए हमारी टैक्सी आने से पहले मुझे उल्टी आने वाली थी। मतलब मेरी तबियत ख़राब थी। मैंने अपने दोस्तों को मेरे बिना जाने के लिए कहा।
मेरा मेज़बान परिवार मुझे अस्पताल ले गया। अस्पताल बहुत छोटा था। अस्पताल में सिर्फ एक कमरा था। डॉक्टर ने मेरे हाथ की नाड़ी देखी। परीक्षण करके डॉक्टर ने नर्स से कहा कि “इसको इंजेक्शन दे दो।” मुझे कुछ बोलने की या इंजेक्शन के लिए मना करने की ताकत नहीं थी। इसलिए नर्स से इंजेक्शन लगवा लिया। फिर डॉक्टर ने दवाई पुराने कागज़ में पैक करके मुझे दी। कागज़ में पाँच अलग-अलग रंग और अलग-अलग आकार की दवाई थीं। डॉक्टर ने कहा पॉंचों गोलियाँ एक साथ ले लो। उन्होंने मुझे गोलियों के नाम या वे किसलिए थे यह नहीं बताया। लेकिन दवाई लेने के एक दिन के बाद मैं बिलकुल ठीक हो गई।

अगर भारत अमेरिका की तरह होता तो ऐसा कभी नहीं होता। यह अच्छी और बुरी दोनों बात है। गोलियाँ और इंजेक्शन बहुत खतरनाक हो सकता था। अमेरिका में मैंने बिना डॉक्टर के पर्चे और औपचारिक फार्मेसी के दवा नहीं ली होगी। लेकिन गोलियाँ ठीक थीं और मैं ठीक हो गई। भले ही वे अजीब थीं लेकिन दवाएँ खराब नहीं थीं। अगर मैं अमेरिका में होती तो मुझे कड़े नियमों के कारण जल्दी से जल्दी मदद नहीं मिलती। इसलिए अमेरिका की स्वास्थ्य प्रणाली बेहतर नहीं है। सब कुछ सफ़ेद और काला नहीं होता।

ताज महल

मैं बाद में ताजमहल देखने गई। जब मैं गई तो मुझे सबसे ज्यादा जो आश्चर्य हुआ वह उसकी सुंदरता नहीं थी बल्कि टिकट का सस्ता होना था। भारतीयों के लिए शुल्क लगभग एक डॉलर है और विदेशियों के लिए शुल्क पंद्रह डॉलर थे। ये सस्ते शुल्क एक स्मार्ट व्यवसाय नहीं है। ताज महल में आसानी से अधिक पैसे ले सकते हैं। अमेरिका में थॉमस जेफरसन के घर जाने का खर्च तीस डॉलर है और यह केवल 150 साल पुराना है। लेकिन भारत अन्य देशों की तरह अपनी सुंदरता से लाभ कमाने की कोशिश नहीं कर रहा है। भारत की प्राथमिकता सौंदर्य को देखने के लिए अधिक से अधिक लोगों का स्वागत करना है। यह एक शुद्ध मकसद है।

भारत के बारे में विदेशियों का दृष्टिकोण

अपनी परियोजना के दौरान मैं दिल्ली में अपने चचेरे भाई से भी मिली। जब हम एक साथ बैठे थे उसने मुझसे मेरे प्रोजेक्ट के बारे में पूछा। मैंने उससे कहा “हमारे विश्वविद्यालय ने हमें एक NGO की मदद करने के लिए भेजा जो गरीबी की समस्या को हल करने पर काम करते हैं।” मेरे चचेरे भाई ने कहा “लेकिन उन्होंने आपको भारत क्यों भेजा? अमेरिका में भी गरीबी और भुखमरी है।” मैंने उससे कहा “हाँ लेकिन वे चाहते थे कि हम भारत में गरीबी के बारे में जानें।” मेरे चचेरे भाई ने कहा “उन्होंने आपको हमारी गरीबी के बारे में जानने के लिए ही क्यों भेजा? क्यों नहीं हमारे बुद्धिमान शिक्षकों और प्रतिभाशाली विचारकों के बारे में जानने के लिए भेजा?”

फिर मैंने इसके बारे में सोचना शुरू कर दिया। भारत में गरीबी से अलावा भी बहुत कुछ है। विकसित देश केवल भारत की कमियों पर ध्यान केंद्रित करते हैं। लेकिन सच्चाई यह है कि कई चीज़ें हैं जिससे भारत अन्य देशों की तुलना में बेहतर है। हमें देशों के बारे में बोलने से पहले अधिक खुले दिमाग के होने की जरूरत है।

मेरे चचेरे भाई ने मुझे लंदन के अपने सहपाठी के बारे में बताया। जब उसका सहपाठी भारत आया तो उसके सहपाठी ने पूछा “क्या हम झुग्गियों को देख सकते हैं?” मेरे चचेरे भाई ने कहा “ठीक है लेकिन कई अन्य चीज़ें भी हम देख सकते हैं। उदाहरण के लिए हमारे संग्रहालय, हमारे पुरालेख, हमारी कला।” जैसा कि मेरा चचेरा भाई मुझे बता रहा था मैंने उसके चेहरे पर उदासी देखी।

चूंकि समाचार केवल बुरी चीजों पर केंद्रित होता है हमारा मानना है कि वे बुरी चीजें पूरे देश का प्रतिनिधित्व करती हैं। भारत के बारे में हमारी सोच बदलने का समय आ गया है। भारत और अन्य विकासशील देशों को उनकी सुंदरता के लिए याद किया जाना चाहिए न कि उनकी ख़ामियों के लिए।

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