कैसे दीवाली - कवि प्रदीप

कैसे मनाएँ दीवाली हम लाला
अपना तो बारह महीने दीवाला।

मर-मर के हम तो रोज मेहनत करें
यारों को देखो तिजोरी भरें
दिन-रात हम तो गुलामी करें
फोकट में ये सांड खेती चरें
धन पे हमारे है सेठों का ताला
अपना तो बारह महीने दीवाला।

कैसे मनाएँ दीवाली हम लाला
अपना तो बारह महीने दीवाला।

हम खुद तो खिचड़ी ही खाते रहे
हलवा लफ़ंगे उड़ाते रहे
हम मुफ़्त झाड़ू लगाते रहे
गंगा में गदहे नहाते रहे
दाता तेरी अक्कल कू हे काय झाला
अपना तो बारह महीने दीवाला।

कैसे मनाएँ दीवाली हम लाला
अपना तो बारह महीने दीवाला।

(पण्डित रामचंद्र द्विवेदी "कवि प्रदीप")