भौतिकविद पियरे और मेरी क्यूरी का प्रेम

मेहेर वान

मेहेर वान

प्रसिद्ध भौतिकविद पियरे क्यूरी (1859 1906) और मेरी क्यूरी एक दूसरे के लिए सिर्फ पति-पत्नी नहीं थे। सन 1903 में इस जोड़े को संयुक्त रूप से भौतिकी का नोबेल पुरस्कार प्राप्त हुआ था। शादी से पहले, पोलेंड में जन्मी मेरी क्यूरी न सिर्फ सुन्दर थीं बल्कि बौद्धिक रूप से पियरे क्यूरी के बराबर थीं। पियरे क्यूरी ने मेरी के समक्ष कई बार शादी का प्रस्ताव रखा, उन तमाम प्रस्तावों में एक यह पत्र यहाँ प्रस्तुत है। शुरुआत में उनके इन प्रस्तावों को मेरी अस्वीकार करती रहीं मगर बाद में दोनों ने ख़ुशी-ख़ुशी साथ रहने का फैसला किया और 1895 में शादी की। सन 1906 की एक सड़क दुर्धटना में पियरे क्यूरी की अकस्मात् मृत्यु हो गई, उस समय वह मात्र 47 वर्ष के थे। बाद में मेरी क्यूरी ने पियरे क्यूरी के बारे में कुछ संस्मरण लिखे। उन संस्मरणों का एक अंश यहाँ प्रस्तुत है। 
मेरी क्यूरी के संस्मरणों का यह अंश किताब Pierre Curie: With Autobiographical Notes by Marie Curie (pp. 72-77) से लिया गया है.
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पियरे क्यूरी से भेंट
-मेरी क्यूरी

“सबसे पहली बार मैं पियरे क्यूरी से सन 1894 के बसंत में मिली थी... एक पोलिश भौतिकविद, जिन्हें मैं जानती थी और जो पियरे क्यूरी की बहुत तारीफ़ करते थे, ने हमें अपने परिवार के साथ एक शाम बिताने के लिए आमंत्रित किया था।

मैं जैसे ही कमरे में घुसी, पियरे क्यूरी बालकनी में खुलने वाली एक फ्रेंच खिड़की के सामने खड़े होकर बाहर की और देख रहे थे। वह मुझे काफी कम उम्र के महसूस हुए थे, यद्यपि वह उस समय पैंतीस वर्ष के थे। मैं उनके चेहरे की स्पष्ट भावपूर्ण अभिव्यक्ति और उनके पूरे मनोभाव में अनासक्ति के आंशिक-संकेत  से गहरे प्रभावित हो गई थी। उनका अपेक्षाकृत धीमा और विचार-पूर्ण बोलचाल, उनकी सादगी, और उनकी अकस्मात गंभीर और ताजा मुस्कराहट, उनका प्रेरित आत्मविश्वास। हमारा वार्तालाप शुरू होते ही मित्रवत हो गया। शुरुआत में यह कुछ खास वैज्ञानिक मामलों पर केन्द्रित था जिनपर मैं सहर्ष उनकी राय जानने को इच्छुक थी। फिर हमने कुछ सामाजिक और मानवतावादी विषयों पर चर्चा की जिनमें हम दोनों की रुचि थी। हमारे पैतृक देशों में अंतर होने के बावजूद, उनकी और मेरी धारणाओं के बीच एक आश्चर्यजनक रक्त-सम्बन्धी रिश्ता था, बेशक यह हमारे परिवारों के उस नैतिक माहौल के प्रति लगाव का फल हो सकता है जिसमें हमारी परवरिश हुई थी।

हम भौतिकी परिषद और प्रयोगशाला में पुनः मिले। तब उन्होंने कहा कि वह शायद मुझसे मिलेंगे। पियरे क्यूरी मुझसे मिलने आये और उन्होंने मेरे छात्र जीवन के प्रति सादगीपूर्ण और सच्ची सहानुभूति प्रदर्शित की। जल्द ही उन्हें वैज्ञानिक शोधकार्य को पूर्णतया समर्पित अपने पवित्र-अस्तित्व के सपने के बारे में मुझसे वार्तालाप करने की आदत पड़ गई, और उन्होंने मुझसे उस जीवन को साझा करने का प्रस्ताव रखा। यद्यपि, मेरे लिए ऐसा कोई निर्णय लेना आसान नहीं था, जिसका मतलब मुझे अपने देश और परिवार से विलग होना हो और मेरी प्रिय, कुछ खास सामाजिक परियोजनाओं का परित्याग करना हो। पोलेंड के उत्पीड़न के जरिये उपजे राष्ट्रवाद के वातावरण में पले-बढ़े होने के कारण, मेरे देश के तमाम युवाओं की तरह मेरी भी इच्छा थी कि मैं अपने देश की राष्ट्रीय भावना के संरक्षण करने में अपना योगदान दूँ।

1894 के साल के दौरान, पियरे क्यूरी ने मुझे कई ख़त लिखे जो कि मुझे अपने स्वरूपों में प्रशंसनीय लगे। उनमें से कोई भी पत्र बहुत लंबा नहीं था, क्योंकि उन्हें संक्षिप्त अभिव्यक्ति की आदत थी, लेकिन सभी पत्र निष्ठा भावना में लिखे गए थे और उनमें यह चिंता साफ़ दिखती थी कि उनका इच्छित जीवन-साथी उन्हें ठीक वैसा ही समझ ले जैसे कि वो थे। यहाँ उनकी कुछ पंक्तियाँ उद्धृत करना उचित होगा जिनमें वह हमारी शादी की सम्भावनाओं को देख रहे थे।     

हमने एक-दूसरे से वादा किया है- क्या ऐसा नहीं है?- कि हम कम से कम एक दूसरे के बेहतरीन दोस्त रहेंगे। अगर तुम अपना मन नहीं बदलती हो! यह कोई भी वादे ऐसे नहीं हैं जिन्हें निभाना अनिवार्य हो; ऐसी कोई भी बात, इच्छा पर थोपी नहीं जा सकती। यह बहुत ही बेहतरीन बात होगी कि हम अपने सपनों में सम्मोहित होकर एक-दूसरे के साथ अपनी जिंदगी गुजारें: तुम्हारा राष्ट्रवादी सपना, हमारा मानवतावादी सपना, और हमारा वैज्ञानिक सपना; ये ठीक वैसी बात है, जिस पर विश्वास करने हिम्मत जुटाने में मुझे मुश्किल होती है।

इन सब में सबसे तर्कसंगत सपना, मेरी समझ में अंतिम सपना है। इससे मेरा मतलब यह है कि हम सामाजिक क्रम को तोड़ पाने में असमर्थ हैं और यद्यपि अगर ऐसा नहीं भी होता तो हम यह नहीं जानते कि हमें कार्रवाई के रूप में, ज़रूरी नहीं कि किस दिशा में, क्या करना चाहिए; हमें इस मामले में भी सुनिश्चित नहीं होना चाहिए कि हम अपरिहार्य विकास को अवरुद्ध करके समाज के लिए अच्छा करने से अधिक नुकसान न करें। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से, इसके विपरीत, हम कुछ करने की आशा कर सकते हैं; यहाँ की ज़मीन हमारे लिए अधिक आसान है, और हमारे द्वारा की गई कोई भी खोज, भले ही वह छोटी हो, अर्जित किया हुआ ज्ञान ही सिद्ध होगी।

इस पत्र  से कोई भी समझ सकता है की पियरे क्यूरी के लिए भविष्य की और देखने का केवल एक ही रास्ता था। उन्होंने अपना जीवन विज्ञान को समर्पित कर दिया था: उन्हें ऐसे जीवन साथी की ज़रूरत महसूस हो रही थी, जो उनका यह सपना उनके साथ जी सके।”
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पियरे क्यूरी का पूरा पत्र इस प्रकार है जिसका ज़िक्र मेरी क्यूरी ने अपने इस संस्मरण में किया है-
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10 अगस्त 1894

तुम्हारी खबर मिलने से अधिक ख़ुशी मुझे कुछ और नहीं दे सकता है। तुम्हारी खबर मिले बिना गुज़रे दो महीने मेरे लिए अत्यधिक अप्रिय रहे हैं: कहना यह है कि तुम्हारे संक्षिप्त संदेश का अत्यधिक स्वागत है।

मुझे आशा है कि तुम अच्छे वातावरण का एक भण्डार इकट्ठा कर रही हो कि तुम अक्टूबर में हमारे पास आ जाओगी। मेरे बारे में, मैं सोचता हूँ कि मैं कहीं नहीं जाऊँगा; मैं गाँव में ही रहूँगा, जहाँ मैं पूरा दिन खुली हुई खिड़की या बगीचे में बिताता हूँ।

हमने एक-दूसरे से वादा किया है- क्या ऐसा नहीं है?- कि हम कम से कम एक दूसरे के बेहतरीन दोस्त रहेंगे। अगर तुम अपना मन नहीं बदलती हो! यह कोई भी वादे ऐसे नहीं हैं जिन्हें निभाना अनिवार्य हो; ऐसी कोई भी बात, इच्छा पर थोपी नहीं जा सकती। यह बहुत ही बेहतरीन बात होगी कि हम अपने सपनों में सम्मोहित होकर एक-दूसरे के साथ जिंदगी गुजारें: तुम्हारा राष्ट्रवादी सपना, हमारा मानवतावादी सपना, और हमारा वैज्ञानिक सपना; ये ठीक वैसी बात है, जिस पर विश्वास करने हिम्मत जुटाने में मुझे मुश्किल होती है।

इन सब में सबसे तर्कसंगत सपना, मेरी समझ में अंतिम सपना है। इससे मेरा मतलब यह है कि हम सामाजिक क्रम को तोड़ पाने में असमर्थ हैं और यद्यपि अगर ऐसा नहीं भी होता तो हम यह नहीं जानते कि हमें कार्रवाई के रूप में, ज़रूरी नहीं कि किस दिशा में, क्या करना चाहिए; हमें इस मामले में भी सुनिश्चित नहीं होना चाहिए कि हम अपरिहार्य विकास को अवरुद्ध करके समाज के लिए अच्छा करने से अधिक नुकसान न करें। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से, इसके विपरीत, हम कुछ करने की आशा कर सकते हैं; यहाँ की ज़मीन हमारे लिए अधिक आसान है, और हमारे द्वारा की गई कोई भी खोज, भले ही वह छोटी हो, अर्जित किया हुआ ज्ञान ही सिद्ध होगी।

देखो यह कैसे फलीभूत होता है: इस पर हमारी सहमति है कि हम बेहतरीन दोस्त रहेंगे, लेकिन अगर तुम एक साल में फ्रांस छोड़ देती हो तो यह सर्वथा दो प्राणियों की एक प्लेटोनिक/अव्यवहार्य दोस्ती रह जायेगी, जो शायद एक दूसरे को पुनः कभी नहीं मिलेंगे। क्या मेरे साथ रहना तुम्हारे लिए अच्छा नहीं होगा? मुझे पता है कि यह प्रश्न तुम्हें गुस्सा दिला देता है, और यह कि तुम इस बारे में दोबारा कभी बात नहीं करना चाहती- और इसके बाद भी कि मैं खुद को सभी तरह से तुम्हारे लिए अयोग्य महसूस करता हूँ।
मुझे सोचता हूँ कि फ्रिबोर्ग में अवसर मिलने पर तुमसे मिलने की इजाजत मांग लूँ। लेकिन यदि मैं गलत नहीं हूँ तो तुम वहाँ केवल एक दिन के लिए ही रुकी हो और उस दिन तुम बेशक अपने दोस्तों के साथ समय बिताओगी।
 भरोसा करो, तुम्हें सम्पूर्ण समर्पित
पियरे क्यूरी
पुनश्च: मुझे बहुत अधिक ख़ुशी होगी यदि तुम मुझे पत्र लिखकर भरोसा दिलाओगी कि तुम अक्तूबर में वापस आओगी। यदि तुम मुझे सिआउक्स में पत्र लिखोगी तो वह मुझ तक बहुत जल्दी पहुँचेगा:
पियरे क्यूरी, 13 रियु डेस सैब्लोंस, सिआउक्स (सेइन)

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