काव्य: वर्षा सरन

वर्षा सरन

वर्षा सरन

बनारस

बनारस सी ठहरी हूँ
इसकी पतली गलियों की
भूलभुलैया में चहकी हूँ
गंगा की अविरल धाराओं में
अब आधी शुद्ध
आधी अशुद्ध
सी बहती हूँ
क्योंकि प्रदूषित सी लहरें
अब कुछ गमगीन हैं
कुछ बीमार
कुछ अश्रु छलकाने को
मज़बूर हैं
हर हर महादेव के जयकारों में
शक्ति को महसूस करती
शिव की अर्धांगिनी हूँ
पर अभी कुछ शक्तिहीन हूँ
मणिकर्णिका के घाट पर
जली तो बहुत
लेकिन लकड़ियों की राख में
अभी भी धधकती
निर्वाण को तरसी
मोक्ष से भटकी
वही समस्याग्रस्त
नारी के अन्तर्मन को
बयाँ करती
नारी की कलम से निकली
एक निरंतर चलती
गाथा हूँ
जो अब बनारस हो जाना चाहती है
शुद्ध और निर्मल
सशक्त और शाश्वत
शांत और मुक्त
मोक्ष की गंगा से नहाई
एक कहानी
जो बार बार न दोहराई जाए!


ये लहरें

सागर किनारे
लहरों का आना जाना
एक खामोश शाम को
लहरों का पैरों को चूम जाना
फिर फुर्ती से गायब हो जाना
गीले पैर...
पर आत्मा अभी भी सूखी
लहरों, तुम क्यों नहीं भिगोती मेरे अन्तर्मन को !
काश, तुम बात करतीं
काश हम सहेलियाँ होते
और मैं तुम्हें घंटों तक रोक पाती
फिर हम अपनी कहानियाँ कहते
और रोते, सुबकते
हँसते, गाते, गुनगुनाते
तब जाकर हम दोनों ही
संतुष्ट होते
फिर मैं तुमसे कहती
कल, फिर लंबे समय तक के लिए
फिर आना
मेरी रूह को छूना
मेरी आँखों में झाँकना
और मेरी सच्ची दोस्त बनी रहना
क्योंकि ,इंसानी दुनिया में
कुछ भी बेमतलब नहीं होता
ये तो कुदरत है
जो सारे गम, खुशियाँ मुफ्त में
बिना किसी शर्त के
प्यार से देती है!

1 comment :

  1. Ganges is the mother of all of us Indians,
    She takes the wrongs of all of us,
    and relieves us from the ill-effects of those wrongs,
    In the process of this cleansing, how-else can she be:
    If not as rightly penned by Poetess Varsha ji, who is versatile in it,
    Being the oldest city, the Banaras,
    is full of by lanes, as it never thought, it has to host even our generations,
    But always Ganga remains as mother,
    and she does cleanse wrongs of all of us,but she always remains right.

    Thanks Varsha ji, You are always right and beautiful in your writing like you are beautiful....

    -alur sudhakar

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