जिंदगी को बयाँ करती कहानियों का संग्रह: सफर

समीक्षक: आचार्य नीरज शास्त्री

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पुस्तक: सफ़र (कथा संग्रह)
ISBN:978-93-83612-14-7
रचनाकार: राकेश चक्र
पृष्ठ: 192, मूल्य: ₹ 495.00 रुपये, प्रकाशन वर्ष: 2019
प्रकाशक: साधना एण्ड संस, दिल्ली
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       सफर डॉ राकेश चक्र द्वारा रचित और साधना एंड संस, दिल्ली  द्वारा प्रकाशित कहानी संग्रह है।  संग्रह का आवरण चित्र अति आकर्षक है। इस संग्रह में कुल 23 कहानियाँ हैं। ये कहानियाँ लेखक के अपने जीवन से जुड़ी कहानियाँ हैं। यह भी कहा जा सकता है कि ये कहानियाँ लेखक के अपने जीवन में घटित सत्य घटनाओं के शब्दारेख हैं जो कि उन घटनाओं को पूरी ईमानदारी से प्रदर्शित करने में समर्थ हैं।

    लेखक ने स्वयं इस सत्य को 'कुछ शब्द कहानी के लिए' के अंतर्गत स्वीकार किया है। वे लिखते हैं- "हर कहानी वर्तमान और यथार्थ का चित्रण कराती है। ये अनुभूतियों, भावनाओं, पीड़ाओं और खुशियों की बारीकी से पड़ताल कर बड़े फलक के कैनवास पर उकेर कर नई राह दिखाती हैं। मुश्किलों में आगे बढ़ाती हैं, न जाने क्या-क्या सिखा जाती हैं, क्या ऐसा भी होता है या हो सकता था? हम कभी-कभी दूसरों के बारे में नकारात्मक सोचते हैं लेकिन कहानी उसी यथार्थ का चित्रण कर हमें सकारात्मक ऊर्जा से भी ओत-प्रोत जाती है। अच्छे-बुरे चेहरों की पड़ताल करा जाती है।" 1 (पृष्ठ 7)

 
आचार्य नीरज शास्त्री
       इसमें कोई संदेह नहीं कि लेखक ने इन कहानियों को जिया है। पहली कहानी निलंबन में ओ. पी. वर्मा उप निरीक्षक अपनी विशिष्ट कार्य शैली में पीड़ित को न्याय दिलाना ही अपना कर्तव्य मानते हैं जिसके लिए निलंबित होने के बाद भी वह कप्तान साहब से पुरस्कार प्राप्त करते हैं।

'सत्य जानकर कप्तान की ऐसी आँखें खुलीं कि वे अपनी कुर्सी से यकायक उठे और बोले, "अच्छा तो यह बात है।"

     उन्होंने बसन्ती की जाँच आख्या निकलवायी तब क्षेत्र निरीक्षक टीकाराम द्वारा कही गई बात एकदम सत्य पाई गई।

      कप्तान ने अपनी त्रुटि का अहसास करते हुए क्षेत्र निरीक्षक टीकाराम से कहा," आज तो सत्य को जाने बिना ही न्याय के साथ बहुत बड़ा बलात्कार हो जाता।"
    कप्तान ने खड़े होकर वर्मा जी की पीठ थपथपाई।'2 (पृष्ठ 21)

     दूसरी कहानी 'हल्की सी मुस्कान' में एक स्त्री का कैंसर से जूझना दिखाया है।

      'बिन आहट' कहानी में शंकालु महिला द्वारा अपने निरपराध पति पर किए जाने वाले अत्याचार को व्यक्त किया गया है। लेखक के शब्दों में देखिए-
" हे ईश्वर तू मुझे शांति दे कि मेरी जुबान पर ताला लग जाए, इनके सम्मुख कुछ न बोले। मैं हँसते रोते एक दिन मौन हो जाऊँ, चिर निद्रा में सो जाऊँ ताकि इनका दिल खुशियाँ मना सके, घी के दिए जला सके।"3 (पृष्ठ 47)

      इसी प्रकार परी का जन्म, न्याय अभी मरा नहीं है, वकील साहब, अजनबी, गैराज, अमेरिकन लड़की, विमला, पापा कब लौटेंगे,सफर, फुलवा आदि कहानियाँ विषयवस्तु के आधार पर अच्छी हैं। सिमसिम बाबा इस संग्रह की सबसे प्रभावशाली कहानी है जो महानता का नकाब पहनकर घूमते अक्षम्य, घृणित काम-वासना में लिप्त नराधमों का मुखौटा उतारकर उनकी असलियत दिखाती है।

         चाहे हिन्दी कहानी के मर्मज्ञ  कहानी कला के तत्वों के आधार पर इस कहानी संग्रह को स्वीकृति न दें परंतु विषयवस्तु के आधार पर विद्वान लेखक डॉ राकेश चक्र का यह प्रथम कहानी संग्रह निश्चित ही स्वागत योग्य है।
192 पृष्ठीय इस संग्रह का मूल्य 495 रुपए अवश्य ही अधिक प्रतीक होता है।

       मुझे आशा है, भविष्य में आदरणीय लेखक का नया और परिमार्जित कथा संग्रह भी हमें प्राप्त होगा।
       अनेक शुभकामनाएँ!

2 comments :

  1. डॉ दिनेश पाठक शशि मथुराFebruary 1, 2022 at 2:44 AM

    बहुत ही सारगर्भित समीक्षा की हे आचार्य नीरज शास्त्री जी ने ।

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  2. समीक्षा प्रकाशन हेतु आदरणीय संपादक महोदय का विनम्र आभार।
    आचार्य नीरज शास्त्री

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