काव्य: मोहित त्रिपाठी

मोहित त्रिपाठी
दीपों के उज्वल धवल तरंग

अलोक पर्व के अद्भुत रंग,
अम्बर अवनि पर ला रहा
लिए अनंत नक्षत्र तारागण,
अनेक सजीले रूप रंग ,
श्रृंगार सजाए अंग-अंग
दीपों के उज्वल धवल तरंग।
प्रगति पथ पे सब बढ़े संग,
रह जाये न कोई भी पीछे
हो मन में सबके अनंत उमंग,
दीपों के उज्वल धवल तरंग।
जीवन के हर क्षण को आओ,
सब मिल जुल कर जी लें
संसार के हर कण को आओ,
हम सब जगमग कर लें
जीवन में भरलें विविध रंग,
दीपों के उज्वल धवल तरंग।
घर द्वार सब अपने सजाते हैं,
सब साथ संध्या वंदन कर
प्रभु आप को शीश नवाते हैं ,
हर्षोल्लाष देख भूलोक का
स्वर्ग में देवराज रह गए दंग,
दीपों के उज्वल धवल तरंग।
श्री पूज कर श्रेयश का वर,
है आज मांगता हर एक नर,
लुट चुका जलधि का रत्नागार
देवासुरों का लोभ अनंग,
दीपों के उज्वल धवल तरंग।
न शेष रहे अमावस का तम,
मिल करें नाश तिमिर का हम,
एक अमरदीप प्रज्वलित कर
दीपोत्सव आज मना लें संग,
दीपों के उज्वल धवल तरंग।
***


कुछ गीत मगर अभी बाकी हैं

कई गीत सुन लिए हम सबने,
कुछ गीत मगर अभी बाकी हैं।
ऋण राशि चुकाने हैं सबको,
ऋण प्रीत का अभी बाकी है।

इन राहों में उन दो राहों में,
हर गलियों सड़क चौराहों में ,
मन मीत न पाया है मैंने ,
जीवन संगीत न पाया है मैंने।

बाहर बहुत हूँ ढूँढ चूका ,
मन मीत मिलन अभी बाकी है।
कई गीत सुन लिए हम सबने ,
कुछ गीत मगर अभी बाकी हैं।

ज़रा खुद से तो पहले मिल लूँ
अपने अंतर्मन की सुन लूूँ,
मन मीत छिपा मेरे मन में ,
संग उसके दो क्षण मैं जी लूँ।

जीवन तो बहुत बीत चला
नव जीवन अभी बाकी है ,
कई गीत सुन लिए हम सबने ,
कुछ गीत मगर अभी बाकी हैं।
***

परिचय
जन्म: 27 फरवरी 1995, वाराणसी, उत्तर प्रदेश
शिक्षा: बी.टेक (सिविल अभियांत्रिकी), एम.टेक  
सम्प्रति: वाराणसी के शिक्षण एवं समाजसेवी संस्था विज़डम इंस्टिट्यूट ऑफ़ एक्सीलेंस के संस्थापक एवं निदेशक, अनेक संस्थाओं एवं संगठनों से सम्बद्धता,अध्ययन-अध्यापन के साथ साहित्यिक एवं सम-सामयिक लेखन में सक्रिय  
रचना: विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में सौ से अधिक रचनाएँ एवं कई अंतर्राष्ट्रीय शोधपत्र प्रकाशित 
पता: डी 36/123 सरोज भवन, अगस्त्यकुंड, दशाश्वमेध, वाराणसी, उत्तर प्रदेश, भारत 221001
चलभाष: 6394439380
ईमेल: mohittripathivashisth27@gmail.com

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