काव्य (शैलजा शर्मा) अंग्रेज़ी से अनूदित

हिंदी अनुवाद सीमा जैन (द्विभाषीय कवयित्री अनुवादिका एवं सम्पादिका सेवानिवृत एसोसिएट प्रोफेसर तथा अंग्रेजी विभागाध्यक्षा क. म. वि. जालंधर)

शैलजा शर्मा
मेरी गली

चमकीला छिद्रित आवरण और आँखोँ में कहानियाँ
सूरज की गुनगुनी धूप इसके बजरी बिखरे चेहरे पर
इसके गड्ढों में पानी जैसे स्वेद किसी चंचल बालक का
आम के दरख़्त की शाखाएँ मानो इसकी गुंथी हुई चोटियाँ
मेरी गली ----
मिनी मार्किट से कुछ फर्लांग दूर
जहाँ मिलता था बचपन का स्वाद
मिनी मार्किट में रहती है चहल पहल अभी भी
नन्हे-नन्हे ग्राहकों की
अजनबी फेरीवालों की कतार घूम-घूम कर अच्छे दिखने वाले फलों को बेचते हुए
अनखुली अखबारों के गिर्द मंडराते व्यथित पँछी
मेरी मासूम गली अब आबाद है नए मालिकों से
कुछ यादें दफ़न हैं उन घरों के नीचे जिन्होंने आधिपत्य जमाया था गुमनाम खेल के मैदानों पर
खेलने की जगह अब शायद बदल गई होगी
मांओं को फ़िक्र है बच्चे कहीं खो न जाएँ भीड़ भाड़ भरी सड़कों पर
जैसे खो जातीं हैं छोटी सड़कें एक बड़ी सी दुनिया में
वक़्त ले आया है मुझे बहुत दूर उस सड़क से
थक गयी हूँ मैं
मगर मेरा बचपन आज भी खेलता है वहीं कहीं
अकेले अपने आप
उस सड़क पर जहाँ मैं पली बढ़ी
जहाँ बसता है मेरा दिलो-दिमाग अभी भी
वो गली जो मुझे ले जाती है आसमान तक
और करती है मेरी कल्पना में
मेरा स्वागत बाँहें पसार कर!

(लिटरेरी यार्ड जुलाई 2021; अकादमी ऑफ़ हार्ट एंड माइंड जनवरी 2022; पुस्तक 'डिअर ममा' सेतु फ़रवरी 2022 में प्रकाशित)
सीमा जैन
***


My Street
(Original English Version By Shailja Sharma)

Shiny porous skin and
eyes full of story. Sun's sweet heat
glowing on its loose graveled
face. Rainwater resting in its
pits like sweat of a playful child.
The branchy mango tree-- its
braided hair. My street.
My street stood only laps
away from the Mini-Market
where flavors of childhood were sold.
The Mini Market is still
booming with new little customers.
A parade of unfamiliar vendors
walks with their better-looking fruit.
Stressed birds flutter around
unopened newspapers.
My innocent street is now
populated with swapped
owners. Some memories
are buried under their houses
which colonized
the untitled playgrounds.
Play may be happening
somewhere else now. Mothers
worry little ones
could get lost on busy streets.
Just as small streets get lost
in a big world.
Time has travelled me far
beyond that street. I am tired.
But my childhood continues to
play over there. By itself.
On that street, where I grew up
and where I continue to grow
by mind's extension. That street
which pushes me to the sky
and then stands for me
open-armed in my mind's vision.

(Published in Literary Yard, July 2021; Academy of Heart and Mind, January 2022; Setu, February 2022)

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