कविताएँ: शिवानी

शिवानी
कविता - 1

जानती हूँ
काफी मुश्किल होता है
छोड़ना,
परन्तु
कभी-कभी
छोड़ देना चाहिए
चीजों को,
उनके हालात  पर
स्थिति पर
खुद पर
और लोगों पर
जिनसे आपको फर्क पड़ता है
आपको जिनसे फर्क पड़ता है
जरूरी नहीं न
सुलझाना हर बार,
कभी-कभी
अधूरेपन में भी
एक अजीब सी खूबसूरती होती है,
जो चीजों के
पूरा हो जाने से
पलकें मूंदकर
शायद कहीं छिप जाती है।
***

कविता - 2

कविता क्या है
जीवन की उत्पत्ति
मनोभावों की अभिव्यक्ति
परिस्थितियों का संदर्भ
अर्थ खोते हुए शब्द
बदलते हुए प्रारब्ध
उलझा हुआ मन
भूखे पेट का रूदन
सपनों के गीत
बिछड़े हुए मीत
या जाता हुआ वसंत
दो जून के भोजन का प्रबंध
या चन्द गूंथे हुए लफ्ज़
कविता क्या है
चलती हुई साँसें
अपनों के झांसे
भागता हुआ वक्त
नवजात शिशु का किलकना
एहसासों का मर जाना
या मुर्दे सा सो जाना
तन्हाई का चिल्लाना
या करोड़ों की भीड़ में
खुद को नितान्त अकेला पाना
कविता क्या है
भावों का उन्माद
गरीबी का प्रलाप
जीवन की किताब
या समस्याएँ बेहिसाब

परिचय:- शिवानी वर्तमान में राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान हमीरपुर, हिमाचल प्रदेश के मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान विज्ञान विभाग में अंग्रेजी साहित्य में शोध कर रही हैं। शिवानी ने अंग्रेजी साहित्य में  ही स्नातक एवं परस्नातक बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से किया है। शिवानी के शोध पत्र भी राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय शोध पत्रिकाओं (Media Watch तथा KEMANUSIAAN) में प्रकाशित हो चुके हैं।

2 comments :

  1. बहुत सुंदर कविताएं हैं। दूसरी पहली से भी अच्छी है।

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  2. दूसरी कविता बहुत ही सुंदर
    अभिनंदन

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