अपूर्व शुक्ल

कानपुर में १९८० में जन्मे और मूलरूप से शाहजहाँपुर निवासी अपूर्व पिछले कई वर्षों से बैंगलोर में रह रहे हैं और पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं। हिन्दी में जितनी कमी पाठकों की है उससे भी कई गुना अधिक कमी है अपूर्व शुक्ल जैसे पाठकों की, जोकि चाट के ठेले पर या सड़क पर पड़े अखबार के टुकड़े पर भी पसंदीदा सामग्री मिलने पर उसे पढ़ डालते हैं और अपनी पीढ़ी के सर्वश्रेष्ठ कवियों में से एक होते हुए भी स्वयं को कवि नहीं मानते। कुछ साल पहले तक अपने ब्लॉग 'दफ़अतन' और 'बैरंग' पर कुछ कविताऐं- कहानियाँ लगाते रहे।