पूनम डोगरा की लघुकथाऐं

१-बॉन्डिंग

शाम के समय दादा पोता दोनों चहलकदमी करते थे.. आज उनके 5 वर्षीय पोते ने उनके खुरदुरे हाथ पर अपनी नन्ही कोमल हथेली फेरी और बोला ,"दादाजी आपके हाथ इतने कटे फटे क्यूँ हैं ? "

बँटवारे का दर्द एक बार फिर उभर आया किशन लाल जी के सीने में। उनका चौधरीपन तो वहीं छूट गया था लाहौर से बीस मील दूर उनके गाँव में। शरणार्थी बनकर खाली हाथ आये थे इस पार। एक बंजर ज़मीन का टुकड़ा उनकी पीठ-तोड़ मेहनत से लहलहाती फसल उगलने लगा था.. उसी संघर्ष की एक-एक कहानी दर्ज थी उनकी सख्त खुरदरी हथेलियों में।

 "पुत्तर एह हथ कामगार हथ ने..इन हत्थाँ ने बहोत म्हणत कीत्ती ताँ ही उस खोत्ते नु इंजीनियर बणाया"..

 अपने इंजीनियर बेटे का अपनी सुन्दरी पत्नी के आगे पीछे डोलना, उन्हें उसका दब्बूपन लगता। मर्द को मर्द बनकर रहना चाहिए, जैसे वो रहे.. और यह सोचकर अनायास उनका हाथ अपनी मूँछों पर चला गया।

"दादाजी, ‘खोता’ कौन है?"

धीरे से पोते के कान में दादा जी ने भेदभरे अंदाज़ में कहा "तेरा प्यो ".

एक ठहाका लगा और दो पीढ़ियों के बीच का जुड़ाव और मज़बूत हो गया।

२- प्रश्न चिह्न

देश के सबसे पिछड़े प्रदेश का वह दूर दराज़ का गाँव.  वहां पहले धान उगता था, लेकिन अब लोहे की खदान से निकला हुआ लाल ज़हर (रेड ऑक्साइड) उगने लगा.नदी लाल , खेती लाल और नक्सली बन्दूक से
 बहता लहू भी लाल. बड़ी मुश्किल से पढ़ लिखकर सुखमय भविष्य की कल्पना लिए दोनों भाई घर से निकल पड़े . एक फ़ौज में सिपाही , तो दूसरा राजधानी की यूनिवर्सिटी में।

एक, विषम परिस्थितियों से संघुर्ष करता बर्फीली पहाड़ियों में दुश्मनों को मार गिराने की तकनीक सीख रहा था ,तो दूसरा अपने गाँव, अपने खेत व पानी को ज़हर में डूबता देख व्याकुल था।

यूनिवर्सिटी में पहुँच उसे ज्ञान हुआ की वह एक शोषित वर्ग का था। उसका शोषण किया सरकार ने, और खदान मालिकों ने !  वह दोनों हाथ लूटा गया। उसके खेत, उसके प्रदेश का चीर-हरण हो रहा था। खनिज लुट रहा था, खेत लुट रहे थे, पानी लुट रहा था. उन्हें लूटकर उन्ही के हाथों में कटोरा थमा दिया गया था।

उसने आवाज़ लगाई! वह चिंघाड़ा!!
लोगों के कान खुलने लगे..
लुटेरे सजग हो गए. घेर कर मारने के उपाय कुलबुलाने लगे.
देश के अन्दर और बाहर दुश्मन घात लगाए बैठे थे.
आज दोनों भाई लड़ रहे थे अपने अपने कर्म क्षेत्र में.
गोली दोनों ने खाई !
एक ने देश के दुश्मनों से .
दूसरे ने ?
एक शहीद हुआ
दूसरा?