दर्पण साह की कविताएँ

१-

तुम नाचना
और तेज़, और तेज़
सा रे ग म प ध नि
नि ट्रांसप्लेंट होने तक
और मैं इस दरवाज़े से उस दरवाज़े तक तुम्हारा करना कैट-वॉक
देखूंगा टकटकी लगाकर
आँखों में कैट-रेक छा जाने तक
बूढ़ा होना अचानक आएगा
वो जैसे आती है अचानक छींक
और तुम और मैं अपनी नाक पोछते हुए
कहेंगे एक दूसरे से सॉरी
झेंपने लगेंगे शर्म के मारे किसी पार्टी में एक दूसरे के हाथों को थामे
तुम कहोगी 'बूढ़े हो गए हो तुम'
और मेरी नज़रों को पढ़ने की कोशिश करोगी
वो जैसे पहली बार फर्स्ट अप्रैल को की थी
और मैं स्वीकार करते हुए स्कॉच का बचा हुआ पैग पूरा पी जाऊँगा
बुढ़ापा यूँ बचा रहेगा हम दोनों में जैसे
उस पैग में बची रह जाएंगी दो आईस क्यूब्स
साथ साथ पिघलने के वास्ते
दो बुढ़ापे अतीत की इंटेंसिटी द्विगुणित कर देते हैं
मैं खांसते हुए नीत्शे दोहराऊंगा
तुम अनसुना करते हुए नाचने का असफ़ल प्रयास करोगी
अपने कदमों की ओर देखते हुए
सा रे ग म प ध...
'नि' ट्रांसप्लांट के बाद
मौन में हम कौतुहल होंगे
चीज़ें इतनी अधिक स्थाई होंगी हमारे लिए कि
हर 'क्रिया'
'संज्ञा' हो जायेगी
तुम अपने दाँतों को देखते हुए शीशे में
पूछोगी आदतन
कैसी लग रही हूँ मैं
और मैं कैट-रेक के ऊपर चश्मा चढ़ाकर कहूँगा
'हम्म'

२- 

मुझे तो सब कुछ ही चाहिए था नसो, तुम 'सब कुछ' बन गयी
फ़िर मुझे कुछ भी नहीं चाहिए था
फ़िर, तुम 'कुछ भी नहीं' बन गयी
जब मुझे पता ही न था कि मुझे क्या चाहिए
तब तुम मोनाल के पंख बनी
मैं दूर भागना चाहता था
मग़र तुम दूर थीं इतनी की साथ में चलती रही मेरे
जैसे अल्मोड़ा जाते वक्त कसारदेवी का पर्वत चला करता है
साथ साथ
जब पहाड़ों में बारिश पूरी पड़ चुकती है
नीचे घाटियों से बादल वापिस लौटते हैं उल्टी बहती नदी की तरह
जब भीगा होता है मन तुम्हारे प्रेम से
अंदर से बाहर की ओर उड़ती हैं दुआएँ और फैलती जाती हैं तब
- ऊपर चारों तरफ़
जानती हो मैंने स्वप्न देखा था...
कि हम क्यूँ हैं आखिर खुश इतने
तब जबकि इस पूरी कायनात में हम 'कुछ भी नहीं' के बराबर 'हैं'
(जब मुझे होना था तब तुम 'मैं' बन गयी)
मैंने देखा कि सब कुछ कितना छोटा है
कितने ढेर आयाम हैं खुद हमारे ही
हर चुनाव एक नया तारा बनता है
और हम हर पल एक नया तारा चुनते हैं
और सब कुछ समा रहा था कहीं शून्य में
तब मैं न चाहते हुए भी बना रहना चाहता था
तब मैंने दुआ की
"सब कुछ सुंदर कर दे, ये बताते हुए कि सुंदरता एक माया है।"
तब मैं जाग गया
यानि मैं फ़िर से सुला दिया गया किसी डिवाइन चुनाव के तहत।
और फ़िर तुम, फिर मोनाल, फ़िर कसारदेवी।
जागते हुए स्वप्न देखना अच्छा है
अच्छा है सोते हुए वास्तविकता जानना

३-

नब्ज़ काट लेने दो
कि सौ साल का हूँ मैं
सरकारी तफ्तीशों में मेरी आत्महत्या 'एक नैसर्गिक मौत' मानी जायेगी
जबकि टेक्नीकली कोई भी मृत्यु नैसर्गिक नहीं होती
कोई सांस लेना यूँ नहीं भूलता जैसे मजदूर भूल जाता है कान में रखी बीड़ी.
मरना एक आदत है
ढेर दोहरावों से भरी
'इतिहास अपने को दोहराता है' इस जुमले की तरह
मैं नौ माह के गर्भ काल के बाद फ़िर-फ़िर जन्मा हूँ
मेरे अतीत से जुडी हुई नाड़ी फ़िर-फ़िर अलग की गई
स्टेरेलाइज्ड सीज़र से.
तो
नब्ज़ को काट लेने दो...
...ये आत्महत्या नहीं आत्मजन्म है गोया.

४-

भूला दिए गये की सफलता इस बात पर निर्भर है कि
क्या भूले ये कभी याद न आये
फ़िर भी मुझे याद है कि मैं भूल चूका हूँ
रात के वक्त की रजनीगन्धा की खुश्बू
कोई चीज़ अचानक याद आना
अचानक से कोई दूसरी चीज़ भूल जाना होता है
जब उन्हें याद हो आई 'बरसने' की
ठीक तब बादल भूल गये थे 'न बरसना'
और यूँ भीग जाने के दौरान
मुझे याद आया कि मैं फ़िर भूल जाता हूँ छतरी ले जाना।
मुझे हमेशा से पता था कि
इसे भूला जा सकता है
बीवी की चिक चिक और बच्चों की खट पट के बीच
इसी वजह से
मैं कभी नहीं भूलता था इसे
आज बीवी की चिक चिक नहीं थी चूँकि
और नहीं थी बच्चों की खट पट भी
इसलिए देखो तो ज़रा
मुझे भी याद न रहा कि मैं भूल सकता हूँ
और यूँ
मैं फ़िर भूल जाता हूँ छतरी ले जाना।
कितनी ही तो चीजें हैं
कितनी ही बातें
सोचने पर उन सबका भूलना याद आए शायद
जैसे मैं भूल चूका हूँ
पॉपिंस में से केवल नीली गोली चुनना
एक निश्चित रास्ते चलते जाने के कारण
भूल चूका हूँ रास्ता भूल जाना
दिन और रात की असीमित तीव्रता के कारण
शाम का होना भूल चुकी है शाम
भूल चुका हूँ बारिश में भीगना
क्यूंकि कभी नहीं भूलता छतरी ले जाना।
सड़क पार करना दो तरह से भूला जा सकता है
एक, सड़क पार ही न करना
दूसरा, सड़क पार करके भूल जाना कि हम दूसरी ओर हैं
मैं इस दूसरी तरह से हर चीज़ भूल चूका हूँ
जैसे प्रेम, जीना और सिगरेट पीना
कहते हैं कि ध्यान में रहते हुए
नहीं पी जा सकती सिगरेट
जैसे होश में रहते हुए नहीं किया जाता प्रेम
नहीं जिया जा सकता ये जानते हुए कि जी रहे हैं।
जब मुझे याद रहता था कि छतरी लेकर जाना है
मेरे अन्तःमन में छतरी ले जाने की कोई पूर्व स्मृति रहती थी
कुछ याद रखना हमेशा पुनरावृति है
किन्तु कुछ भूल जाना हमेशा पहली बार ही होता है
बेशक मैं कहता हूँ कि
'फ़िर' भूल जाता हूँ छतरी ले जाना
लेकिन पिछली बार भूला था
ये याद नहीं
यूँ मैं हर बार पहली बार भूलता हूँ छतरी भूलना
नीली छतरी ले जाना
नहीं होता पीली छतरी ले जाना
मगर छतरी भूलना
मात्र भूलना होता है
कुछ याद रखने में
बना रहता है कुछ भूल जाना
किन्तु कुछ भूलना
शुद्ध रूप से भूलना होता है
भूलते जाना सब कुछ
और सब कुछ भूल जाना
और अंततः ये भी भूल जाना कि भूल गये
मोक्ष है
बस ये भी न याद रहे किन्तु कि ये मोक्ष है
कई बार मोक्ष की प्राप्ति के लिए
जान बूझ कर
फ़िर फ़िर भूलता हूँ छतरी ले जाना
किन्तु जान बूझ कर कोई चीज़ भूल नहीं सकते
इसलिए छतरी भूलने से मुझे आज तक मोक्ष नहीं मिला
भीगने न भीगने के बीच
प्रार्थना भर का अंतर होता है
इबादत में उठे हाथ
खुली हुई छतरी सरीखे अर्ध चन्द्राकार होते हैं
प्रार्थनाएं बरसात को रोकती नहीं
वे कभी भी इतनी कमज़ोर नहीं कि
विस्थापित कर दें द्रोणागिरि
इसलिए वे अत्यंत निजी रूप से
आपको भर बचाए रखती हैं
हर कोई भूलता जा रहा है छतरियां ले जाना
प्रार्थनाएं टंगी रहती हैं
बंद किसी खूँटी में
मन्दिर बंद हैं मन्दिरों में
मैं फ़िर भूल जाता हूँ छतरी ले जाना
लेकिन मैं नहीं भूल सकता छतरी ले जाना
मैं भूल जाता हूँ
पर...
...मैं भूल नहीं सकता।

५-

हम बातें करेंगे
हम बातें करेंगे
सुबह में डूबते सूर्य की
मुग़लों में मौर्य की
जून में बर्फ और भेड़ों की
फार्म विला में पेड़ों की
मुफ़लिसी में विंटेज वाईन की
भूख में फाईन डाइन की
फ़्रांस में मच्छरों की
मोरक्को में गोरों की
अमेरिका में वियतनाम की
...और क्यूबा की भी
...और हिटलर, पिट्सबर्ग, सीरिया और तेल के कुओं की
चीन में तिब्बत की
विश्वनाथ में मक़बूल की
गुड़गांव में फूल की
सीरिया में कन्सन्ट्रेशन केम्प की
प्राग में रासायनिक हथियारों की
गुजरात में गोधरा की
बैचलर्स पार्टी में शोवनिज़्म की
बांग्लादेश में तस्लीमा की
हम विज्ञान के इतिहास की
भूगोल के मनोविज्ञान की बातें करेंगे
हम इलेक्ट्रॉन की असिहष्णुता को गरियाएँगे
हम इंसान के 'ड्युल नेचर' की
जीवन के 'हाइजेनबर्ग' सिद्धांत की
इतिहास के 'स्वोट ऐनिलिसिस' की
समाज के 'योग्यतम की उत्तरजीविता' की
बातें करेंगे
भूख में मेंडल के मटर की
प्यास में ज्वलनशील हाइड्रोजन और अग्नि-उत्प्रेरक ऑक्सीजन की
दुःख में उत्प्लावन बल की
'कल' में 'कल' की
बातें करेंगे
साहित्य में श्रोडिंगहर की बिल्ली के 'टू बी ऑर नॉट टू बी' की
प्रेम में मार्केटिंग के फ़ोर 'पी' की
समाजवाद में 'ऑनली मी' की
बातें करेंगे
हम देखेंगे ईश्वर पर ग्रीन हाउस गैसों का प्रभाव
फ़िर हम चार्ली हेबडो के फ़्रांस में
ग्लोबल वार्मिंग से उपजने वाले आतंकवाद की बात करेंगे
बातें दरअसल बुढ़ापे का जोश है
बातें बचपन की मैच्योरटी
बातें जो एरिज़ोना का मॉनसून है
बातें हबल से दिखने वाले नेब्युला का बोटिनिकेल नाम
बातें इम्प्रोम्पट्यू की लम्बी प्लानिंग
बातें जो प्रारब्ध में ऐपिलॉग है
अंत की प्राक्कथन
हम बैठेंगे आमने सामने
और बातें करेंगे मौन में
बातों में कहीं युद्ध नहीं होता
बातों से कोई बुद्ध नहीं होता
अतः हम युद्ध में प्राण की
और बुद्ध के निर्वाण की बातें करेंगे
बातों बातों में हम निकल पड़ेंगे एक लम्बे सफ़र पर
और एक लम्बे रास्ते में मंज़िलों की बातें करते हुए भटक जाएंगे
हम एक एक शब्द छूकर बातें करेगें
हम बुदबुदाते हुए क्रांतियों की बातें करेंगे
हम चिल्ला चिल्ला के बताएंगे लोगों को शिष्टाचार
अंततः हम बातें करते हुए किसी एक निष्कर्ष पर पहुंच ही जाएँगे।