गिरीश पंकज को मिला 'वसुंधरा सम्मान'

गिरीश पंकज
भिलाई (छत्तीसगढ़). प्रख्यात व्यंग्यकार-पत्रकार और सद्भावना दर्पण के संपादक गिरीश पंकज को 14 अगस्त को भिलाई में 'वसुंधरा सम्मान' प्रदान किया गया। सम्मान में श्री पंकज को शाल-श्री फल, अभिनंदन पात्र के साथ ग्यारह हजार रुपए भेंट किये गए. छत्तीसगढ़ के उच्च शिक्षा मंत्री प्रेमप्रकाश पाण्डे कार्यक्रम के मुख्य अतिथि थे. कार्यक्रम की अध्यक्षता  नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंह देव ने की. सभी अतिथियों के हाथो गिरीश पंकज का सम्मान हुआ.  मंच पर 'छत्तीसगढ़ मित्र' के सम्पादक पूर्व आईएएस सुशील त्रिवेदी और विधायक अरुण वोरा भी मौजूद थे।

 संयोजक विनोद मिश्र ने स्वागत भाषण दिया। वक्ताओं ने गिरीश पंकज के निरंतर लेखन की भूरि-भूरि प्रशंसा की और कहा  कि  पंकज की विभिन्न विधाओं में ५२ पुस्तको का प्रकाशन उल्लेखनीय घटना है. कवि शरद कोकास ने अभिनंदन का वाचन किया। श्री पंकज को भेंट किये गए प्रशस्त पत्र में कहा गया कि समकालीन पत्रकारिता की अनेक चुनौतियों के बीच रहते हुए उन्होंने पत्रकारिता के मूल्यों का साथ दिया और कभी समझौता नहीं किया।  सुशील त्रिवेदी ने लोकतंत्र के महत्व पर प्रकाश डाला। मंत्री प्रेमप्रकाश पाण्डे  ने कहा लोकतंत्र को मजबूत  करने के लिए कि जन भागीदारी की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि नौकरशाहों को सेवानिवृत्ति के बाद लोकतंत्र की याद आती है. शायर मुमताज ने आभार माना। कीर्तिशेष देवीप्रसाद चौबे जी की स्मृति में  प्रतिवर्ष ऐसे पत्रकारों या लेखको को 'वसुंधरा सम्मान' प्रदान किया  जाता है. जो लोकचेतना की दिशा में कार्य करते रहते हैं. श्री चौबे का चालीस साल पहले निधन हुआ. वे विधायक थे और आजीवन खेतिहर मजदूरो और वंचित समाज के उन्नयन में रत रहे।  उनके सुपुत्र प्रदीप चौबे और रवींद्र चौबे भी विधायक रहे। रवींद्र चौबे वर्षो तक मध्यप्रदेश सरकार में शिक्षा मंत्री भी रहे।  छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार में भी मंत्री थे. अपने पिता के नाम से उन्होंने सम्मान शुरू किया और पिछले सोलह वर्षो से यह क्रम जारी है।