दिल मछली कांसे की !!!

- अनघ शर्मा 
अनघ शर्मा 

वो नवम्बर का आखिरी इतवार था, ठंड में लिपटा दिसम्बर की ओर बढ़ता हुआ। इवनिंग मास को खत्म हुए अभी पांच मिनट से कम ही वक़्त हुआ था पर भीड़ मानो एकदम ही कहीं गायब हो गयी थी। रूथ ने कंधे पे पड़ा शॉल खोल के ओढा और रोज़री पर्स के अंदर रख दी। वो चर्च का लॉन पार कर के बाहर निकल ही रही थी कि किसी ने कंधे पर हाथ रख दिया। उसने पलट कर देखा उसी की उम्र की एक औरत सामने खड़ी थी,पर वो पहचान नहीं पायी।

“सोफ़ी गोम्ज़? मिसेज़ गोम्ज़ की बेटी।”
“यस, आई एम डॉटर ऑफ़ मिसेज़ गोमेज़ बट नॉट सोफ़ी। आई एम रूथ, सॉरी पर मैंने पहचाना नहीं आपको।
“मैं एलीना,डफ़र कहीं की।”
“ओह माय गॉश!” कह के रूथ उसके गले से झूल गयी।
“सॉरी मैं सोफ़ी समझी थी। स्टिल यू बोथ लुक सेम।
रूथ ने कुछ नहीं कहा वो चुप रही।
“तुम आगरा कब आयीं?”
“वीक हुआ, मॉम का घर सेल करने के लिए आई हूँ।”
“चलो बढ़िया है, कॉफ़ी पीने चलें?”
“इस टाइम एलीना? फिर किसी दिन चल लें, अभी तो हूँ दस-बारह दिन और मैं।”
“पर मैं कल गोवा वापस जा रही हूँ।”
“ठीक है,पर कहाँ?”
“वहीं राजामंडी, अपना पुराना अड्डा, विली कॉफ़ी हाउस।”
“वो है अबतक?”
“हाँ भई।”
“चल फिर, वो मानो एक बार फिर वही पुरानी रूथ बन गयी थी।”
बाज़ार के एक कोने में विली कॉफ़ी हाउस अब भी वैसे ही खड़ा हुआ था जैसे चौबीस साल पहले, बस ज़रा सा छोटा हो गया था। वो दोनों अंदर घुस के दायें कोने में लगी कुर्सियां पर जा कर बैठ गयीं।
“देखा रूथ आज भी हमें हमारा फेवरेट कार्नर मिल गया।”
“हाँ, लकी हैं हम, इंटीरियर बदल गया है न यहाँ का।” रूथ ने पर्स टांगते हुए कहा।
“काफी कुछ, मैं जब पिछली बार आई थी तो यहाँ काम चल रहा था।”
“मैं पूरे चौबीस साल बाद आई हूँ आज यहाँ।”
“स्ट्रेंज।”
अचानक से रूथ उठी और पास से गुज़रते एक आदमी की बाँह पकड़ ली।
“अंकल विली पहचाना मुझे?”
“ओह माय! माय चाइल्ड सोफ़ी,इतना साल बाद।”
एलीना ने देखा रूथ का गोरा उजला चेहरा एक सेकंड को काला पड़ गया।
“अंकल विली मैं रूथ हूँ, सोफ़ी की बहन।”
“ओह! सॉरी माय चाइल्ड ,बूढा हो गया है तुम्हारा अंकल ,पहचान ही नहीं पाया। रुको तुमको कॉफ़ी हाउस की लेटेस्ट कॉफ़ी पिलाता हूँ ,मोका कॉफ़ी।
विली के जाने के बाद एलीना ने उससे कहा।
“पिछले तीन साल से सबको यही पिला रहे हैं और अब तक लेटेस्ट-लेटेस्ट कहते रहते हैं।”
“मेरे लिए तो सब नया ही है अब यहाँ। कितना डेवलपमेंट मिस किया मैंने इस शहर का। कितना फैल गया है अब ये शहर।”
“सच! याद है रूथ कैसे हम, मैं,तुम,एला,सोफ़ी और डियाज़ केंट में हर शाम साइकिल ले कर निकला करते थे। तब सब कितना खाली-खाली लगता था और अब देखो।”
“अब शहर भर जाते हैं और लाइफ ख़ाली हो जाती है।” रूथ ने कॉफ़ी पीते हुए कहा।
हमारे पूरे ग्रुप में डियाज़ ही एक लड़का था। अच्छा याद है कैसे उसकी मॉम बात-बात पर खुडाया –खुडाया कहती रहती थीं। कोई न्यूज़ उनकी?”
इतनी देर में जा कर अब रूथ के चेहरे पर मुस्कान आयी।
“हाँ! ही इज़ माय ब्रदर इन लॉ नाउ।”
“सच! सोफ़ी गोट मैरिड टू डियाज़।”
“हूँ !”
“रूथ क्या बात है? सोफ़ी के नाम से तुम बड़ा आक्वर्ड हो जा रही हो?”
“नहीं ऐसा तो कुछ नहीं है।”
“कुछ हुआ है क्या तुम्हारे बीच?”
“मैं तो कई सालों से मिली ही नहीं उससे। ऑल मोस्ट ट्वेंटी टू इयर्स।”
“व्हाट sssssssssss? यू आर ट्विन्स एंड आइड़ेंटिकल ट्विन्स। यू वर सो क्लोज्ड रूथ,फिर क्या हुआ? आई स्टिल रिमेम्बर जब एक्साम्स होते थे तो आधा सिलेबस तुम याद करती थीं आधा सोफ़ी। लोग तुम को सोफ़ी और सोफ़ी को तुम समझ कंफ्यूज़ रहते थे, मैं ख़ुद आज तुम्हें सोफ़ी नहीं समझ बैठी थी।”
“तुम क्या सभी यही समझते हैं। मेरी पूरी आइडेंटिटी ही खत्म कर दी इस चीज़ ने एलीना।”
अब चलें एलीना दस बजने आया, उसने कुर्सी से उठते हुए कहा।
“अच्छा अंकल विली बाय,नेक्स्ट वीक आऊंगी।”
“तुम कब जा रही हो?”
“दिसम्बर सेवेनटीन ।”
“क्या क्रिसमस से पहले ही चली जाओगी?”
“यस अंकल।”
“मिसेज़ गोम्ज़ को मेरा हेलो और सोफ़ी को मेरा लव बोलना।”
“श्योर।”
वो एलीना को कैफ़े में ही छोड़ बाहर आ गयी।
“ऑटो,केंट चलोगे?”, उसने बाहर खड़े ऑटो से पूछा।

2
घर के पिछली तरफ़ जहाँ रूथ और सोफ़ी का कमरा हुआ करता था उसकी खिड़की से स्कूल का मेन गेट दिखा करता था।उसने खिड़की खोली तो सामने ही स्कूल का बड़ा सा बोर्ड चमक रहा था। कितनी-कितनी बातें रूथ के मन में हलचल सी मचाने लगीं।
“मॉम देखो सोफ़ी आज फिर मेरी स्कर्ट पहन के भाग गयी। अब मैं स्कूल कैसे जाऊँगी?”
“तुम उसका स्कर्ट पहन कर चली जाओ रूथ, एक ही साइज़ है हनी।”
“मॉम उसका नहीं उसकी। वो अपनी गंदी स्कर्ट बेड पर फेंक कर गयी है।”
“ओह! गॉड ये लड़की भी न टेंथ तक आ कर भी बच्ची बनी हुई है।”
“आप ही ने बनाया हुआ है ऐसा।”
“वो तुम से छोटी है रूथ।”
“व्हाट? कितनी छोटी, सिर्फ सात मिनट सत्रह सेकंड। हम ट्विन्स हैं ये क्यों भूल जाती हो।”
“अच्छा-अच्छा! मुझे देर मत करो हॉस्पिटल के लिए और तुम स्कूल जा रही हो या नहीं?”
“जाऊँगी उसकी वही गन्दी स्कर्ट पहन कर।”
रूथ को अब तक याद है कितनी डांट पड़ी थी उसे स्कूल में स्कर्ट के लिए। कौन नहीं जानता था शहर भर में कि फ्रंसिस्कन नन्स का स्कूल कितना स्ट्रिक्ट है। उसने कॉफ़ी मग उठाया और बाहर लॉन में आ गयी। यही लॉन जो अब मिट्टी के मैदान सा हो गया है कभी सच का लॉन हुआ करता था,जिसमें लिली,बोगनवेलिया और भी जाने कितने फूल हुआ करते थे और पैर के नीचे घास। इसी लॉन में टिन शेड के नीचे कोने में उनकी साइकिल खड़ी रहती थीं। एक जैसी,ठीक उन्हीं की तरह जुड़वां । डैडी उन्हें नए खुले शो रूम से पहले ही दिन लाये थे। उन दिनों वो आठवीं में थीं। उसी साल डैडी की डेथ हुई थी। उसके बाद मॉम को उनकी जगह हॉस्पिटल में नौकरी मिली। धीरे-धीरे मॉम हॉस्पिटल की शिफ्ट्स पर ज्यादा और घर में कम रहने लगीं। ये वही दिन थे जब दोनों बहनें दोस्ती के गहरे बंधन में बंध रही थीं। इस घर से कितनी यादें जुडी थीं उसकी। यही घर जो कभी शीशे सा चमकता था, आज कैसा खंडहर सा हो गया है। रूथ ने आँख से बहता आँसू पोंछा। आज उसे डैडी की बहुत याद आ रही थी। आज होते तो सेवेंटी फोर के होते। मॉम-डैड में डैडी उसके ज्यादा क़रीब थे और मॉम सोफ़ी के। उसने उठ कर लॉन की लाइट बुझा दी और ड्राइंगरूम का दरवाज़ा खोल दिया। उसे ऐसा लगा जैसे पीछे से सोफ़ी ने आकर उसे जकड़ लिया हो, वो अक्सर ऐसा ही किया करती थी।
“ओके बाबा आई एम् सॉरी, मेरी वजह से तुमको सिस्टर की डांट पड़ी। प्रॉमिस आगे से तुम्हारी यूनिफार्म पहन के नहीं जाऊँगी।” सोफ़ी ने उसके गले में झूलते हुए कहा।
“सोफ़ी छोड़ो, मेरा दम घुट रहा है।”
“अच्छा चल डियाज़ के घर चलते हैं। उसकी मदर हर फ्राइडे प्रॉन नूडल्स बनाती हैं। आज भी बनाये होंगे। चल खा कर आते हैं।
“अच्छा! और डियाज़ की मॉम से क्या कहेंगे?”
“तुम कुछ मत कहना, तुम बस साथ चलो ।मैं कह दूंगी कि डियाज़ से ट्रम्पेट का कुछ सीखना है।”
“मैं फिर भी नहीं जाऊँगी।”
“व्हाई?”
“मुझे उसकी मॉम को देख कर हंसी आती है।”
“हैं?”
“याद नहीं एनुअल फंक्शन पर क्या पहन कर आयी थीं गाना गाने।”
“बी डिसेंट रूथ ,वो हमारी टीचर हैं।” कह कर सोफ़ी खिलखिला कर हंस पड़ी।
“वैसे मुझे लगता है डियाज़ लाइक्स यू।”
“यक ... आई डोंट लाइक हिम।”
“हाँ वैसे भी मुझे उसकी मॉम हुडुकचुल्लू सी लगती हैं, अगर तेरी मदर इन लॉ बन गयीं तो।” रूथ ने कहा।
“हाँ मदर इन लॉ ऐसी और हसबैंड बैंड के संग होटल, चर्च में ट्रम्पेट बजाता हो। छी-छी! एंड बाय द वे, व्हाट दिड यू से? कहाँ सीखा ये वर्ड?”
“लीला मिस से।”
“पूअर लेडी, बड़ी डीमोटीवेटेड लगती हैं मुझे वो।” सोफ़ी ने कहा।
“मे बी ... वरना कन्वर्ट हो कर क्रिश्चियन क्यों बनती।”
कभी-कभी मजाक में कही बात सच हो जाती है। सोफ़ी और डियाज़ ..., कल स्कूल जाऊँगी क्या पता कोई पुराना स्टाफ़ ही मिल जाये। हाउ टाइम फ्लाइज़। उसने सोचा।

3
कोहरे में डूबी सुबह का सूरज अभी निकला भी नहीं था कि फ़ोन की घंटी बज पड़ी । उसने करवट ले घडी देखी सुबह के छ: बज रहे थे। इतनी सुबह किसका फ़ोन होगा। उसने अलसाई आवाज़ में कहा।
“हेलो”
“हेलो हनी।”
“कैसी हो मॉम? बहुत लो साउंड कर रही हो ”
“हाँ, हॉस्पिटल से फ़ोन कर रही हूँ। बंगलुरु से।”
“बंगलुरु से,हॉस्पिटल से?”
“हाँ डियाज़ एडमिट है। साल भर से किडनी प्रॉब्लम देने लगी थी उसकी। अब तक तो मेरे ही हॉस्पिटल में था पर अब यहाँ रेफ़र कर दिया है। इतना अल्कोहल शुरू कर दिया था कि क्या बताऊँ रूथ। सोफ़ी का टेंशन से बहुत बुरा हाल है। उस पर मॉल्विन भी अभी तक नहीं आया हॉस्टल से। तुम सुन रही हो?”
“हाँ,बोलती रहो सुन रहीं हूँ।”
“तुम आओगी डियाज़ को देखने?”
“मुश्किल है, शायद आना नहीं हो पाये।”
“रुथ हम तुम्हारे शहर में हैं।”
“ठीक है मॉम लीव इट।”
“विक्रम कब आ रहा है?”
“क्रिसमस से पहले आने की कह रहा था।”
“और बच्चे?”
“वो भी तभी तक आयेंगे।”
“घर का कुछ फाइनल हुआ?”
“जल्दी हो जायेगा, ब्रोकर आया था देखने।”
“चलो बाय।” कह कर उसने फ़ोन काट दिया।
तो मॉम ये घर डियाज़ के इलाज के लिए बेच रहीं हैं। क्या सोफ़ी के पास उसके इलाज लायक पैसा भी नहीं है। गॉड ओनली नोज़ । उसने सोचा और रजाई दुबारा सर तक खींच ली। सोने की नाकाम कोशिश में वापस पुराने दिनों की तरफ़ लौट गयी।
सोफ़ी-रूथ आज घर को साफ़ रखना। चर्च चली जाना और लौट कर डिनर तैयार रखना। शाम को मैंने गेस्ट इन्वाइट  किये हैं। मिसेज़ गोम्ज़ ने घर से बाहर निकलते हुए कहा।
मॉम रुको-रुको-रुको सोफ़ी ने दौड़ते हुए जा कर उन्हें पकड़ लिया।
“डिनर वी कांट कुक, हमें कुछ बनाना ही नहीं आता।”
“शटअप सोफ़ी, तुम लोग कॉलेज में हो और तुम्हें अंडा तक बनाना मुश्किल लगता है। ओह गॉड! अब मैं ड्यूटी पर जाऊं या खाना देखूं। रूथ से कहना केक तैयार रखे और तुम स्टयू एंड सूप तैयार रखना।और कहीं घूमने मत निकल जाना। रूथ से कहना वाइट फ्रॉक पहने।”
सोफ़ी जब वापस लौटी तो रूथ सोफे पे लेटे-लेटे संतरा छील रही थी।
“व्हाट हैपन्ड?”
“नथिंग, तुम को केक तैयार रखना है, मुझे स्टयू और सूप।”
“कौन आ रहा है?”
“डोंट नो। रूथ चल डियाज़ के घर चलते हैं। उसने नया स्कूटर लिया है।चला के आयेंगे!!”
“छोड़ न, सोते हैं , बहुत दिन बाद तो मॉम की आफ्टरनून शिफ्ट लगी है।”
उस शाम गार्डन में लगे लिली कुछ ज्यादा ही खिल थे। सफ़ेद क्रोशिया की फ्रॉक में रूथ कुछ ज्यादा ही सुंदर लग रही थी।
“रूथ मेरा ब्लू फ्रॉक क्लीन नहीं है। मैं भी वाइट वाला ही पहन लूँ?”
“पहन लो, वैसे अलग-अलग पहने को क्यों बोल के गयी हैं?”
“हमें पहचानने में आसानी होगी उन्हें।” कह कर सोफ़ी हंस पड़ी।
“मॉम कौन आ रहा है डिनर पर?” रूथ ने पूछा।
“मेरी फ्रेंड मिसेज़ सेठी और उनका बेटा।”
“ओह, क्यों?”
“उनके बेटा का एयर फ़ोर्स में सलेक्शन हुआ है। दैट्स व्हाई।
डैडी की डेथ के बाद ये पहला गेस्ट है जो इस घर में आया है। सोफ़ी ने फुसफुसा के रूथ के कान में कहा। रूथ ने जाने सोफ़ी की बात सुनी भी या नहीं। सोफ़ी ने देखा रूथ कनखियों से विक्रम को देख रही थी। सोफ़ी ने पहले मेहमान को देखा और फिर पलट के रूथ के चेहरे की तरफ़ देखा, रूथ की आँखें सामने बैठे विक्रम से हट ही नहीं रही थीं।
“डोंट स्टेयर ऐट हिम, बेचारा डर जायेगा। चल किचन में चल।” सोफ़ी ने उसे कोहनी मारते हुए कहा।

4
दरवाज़े के ठीक सामने वर्जिन मेरी की एक बहुत बड़ी तस्वीर टंग रही थी, जिसका ऑइल पेंट अब इतना धुंधला, इतना हल्का पड़ गया था कि अब उसपे बने चेहरे के भाव देख पाना,पढ़ पाना बहुत ही मुश्किल था। ये आगरा में रुथ का आख़िरी सन्डे था। इसके बाद कौन जाने दुबारा इस चर्च को अब देखना भी हो या नहीं। समय कितना बदल गया है उसने सोचा। इन्हीं वर्जिन मेरी की तस्वीर के साथ सेंट अंथोनी की एक छोटी तस्वीर हुआ करती थी, जो रूथ को आज नहीं दिखी। सेंट अंथोनी, पैट्रन ऑफ़ मिरेकिल्स, चमत्कारों के संत, खोयी हुई चीज़ों को वापस करने वाले संत, ख़ुशी के देवता। रूथ की भी तो खोई हुई चीज़ लौटाई थी इनने। उसने दुकान से सेंट अंथोनी की एक तस्वीर ख़रीदी और रिक्शे में बैठ गयी। किले की लम्बी दीवार के साये-साये चलता रिक्शा जब बिजली घर के लिए मुड़ा तो मानो जैसे उसके पुराने दिन लौट आये।
“सुनो, बिजली घर पे अभी भी रामबाबू की दुकान है?” उसने रिक्शे वाले से पूछा।
“है, बहुत भीड़ रहती है पर।”
“दो मिनट रोक लोगे वहाँ? एक प्लेट पूड़ी ले आना मेरे लिए।” उसने सोच में डूबे-डूबे ही कहा।
रिक्शेवाले ने उसे ऐसे देखा जैसे किसी आसमान से उतरी हो वो।
“हाऊ फ़ास्ट यू ईट विक्रम?” सोफ़ी ने विक्रम से पूछा।
“हम एयरफ़ोर्स वाले हैं एयरोप्लेन सी स्पीड है हमारी।” वो बोला।
ये उन दिनों की बात थी जब वो दोनों दोस्ती में विक्रम के नज़दीक और डियाज़ से दूर जा रहीं थी । ऐसे ही किसी एक दिन रूथ ने सोफ़ी से पूछा।
“क्लार्क्स चलोगी सोफ़ी डियाज़ की परफॉरमेंस है ट्रम्पेट की।”
“नो, वो बोर करता है मुझे।”
“हाँ, ये तो है। विक्रम के साथ मज़ा आता है पर।” रूथ के मुँह से अचानक जैसे दिल की बात निकल गयी ।
उस रात रूथ ने सेंट अंथोनी से जाने किस चमत्कार की प्रार्थना की। बचपन से उसका मन सेंट अन्थोनी के अनगिनत चमत्कारों की कहानियों से भरा पड़ा था। पर उसका सबसे पसंदीदा वो किस्सा था जिसमें एक अकेली लड़की को कैसे उसका केम्पेनियन मिला देते हैं सेंट अंथोनी। फिर एक दिन उसकी बात भी सुन ही ली उनने।
केंट की ख़ाली सुनसान सड़कों पे स्कूटर सीखते हुए एक दिन उसने विक्रम से अपने मन की बात कह दी।
“तुम आउट ऑफ़ कास्ट मैरिज करोगी?” सोफ़ी ने उससे पूछा।
“क्यों? क्या प्रॉब्लम है?आई लाइक हिम, ही लाइक्स मी।”
“रियली।”
रिक्शे के रुकने से उसका ध्यान टूटा तो उसने देखा कि सर्दी की शाम का सूरज बुझते- बुझते एक ज़रा से गोले में बदल गया था। कितनी जल्दी दिन डूब जाते हैं। जाने से पहले उसे अंकल विली से मिलना है। घर का एंटीक फर्नीचर बेचना है। विक्रम के कुछ पुराने दोस्तों के घर जा कर मिलना है। ऑल्विन के लिए क्रिसमस गिफ्ट्स लेने हैं। ऑल्विन और मॉंल्विन उसके और सोफ़ी दोनों के बच्चों के नाम मॉम ने ही रखे थे। कितनी मुश्किल से मॉम सोफ़ी को शादी के लिए तैयार कर पायी थीं। डियाज़ के चर्च में,होटल में ट्रम्पेट बजाने के जॉब से,उसकी सैलरी से सोफ़ी बिलकुल खुश नहीं थी। ये मॉम ने ही उसे बताया था।
“शी इस नॉट वैरी हैप्पी।”
“व्हाई?”
“हिज जॉब,हिज स्टेटस एंड हिज मनी इज़ नॉट अपीलिंग तो हर। शी वांटेड अ बॉय लाइक विक्रम।”
“चाहने से कुछ नहीं होता मॉम। अब उसे हाँ बोलना चाहिये मैरिज को ”
“यू डोंट नो रुथ शी लाइक्स विक्रम।”
रूथ का चेहरा एक सेकंड को बिलकुल कोरा हो गया और फिर उदास। ये पहली बार था जब धागे में बल पड़ा था। इतने दिन से जिस चीज़ को वो समझना चाह रही थी वो आज सामने थी। सोफ़ी का विक्रम के आस-पास रहना और विक्रम का उस पर अटेंशन।
“मुझे लगता है विक्रम के मन में सोफ़ी के लिए सॉफ्ट कार्नर बन रहा है। कैन दे चीट मी ऑन?” उसने मिसेज़ गोम्ज़ से पूछा।
“डोंट बी सिली हनी, वो तुम्हारा हसबेंड है,और सोफ़ी सिस्टर।”
पर रूथ जानती थी कि ये बादल ख़ाली नहीं लौटेंगे। वो अक्टूबर की सुहानी शाम थी। उसे याद है उसदिन एयरफोर्स डे था। उसने घर पर विक्रम और दोस्तों के लिए शाम को छोटी सी पार्टी रखी थी। मेहमानों से भरे घर में बस सोफ़ी और विक्रम ही गायब थे।
“इसे पकड़ो थोड़ी देर मैं ज़रा विक्रम को देखूं सब गेस्ट पूछ रहे हैं उसे।” रुथ ने ऑल्विन को गोद से उतार कर मिसेज़ गोम्ज़ को पकड़ाते कहा।
वो गई और कुछ ही सेकंड्स में वापस लौट आई ।पूरी पार्टी में मिसेज़ गोम्ज़ ने उसे खामोश और परेशान देखा।अगली सुबह उसने उनसे कहा।
“मॉम आप सोफ़ी को वापस ले जाओ।”
न मिसेज़ गोम्ज़ ने उससे पूछा न ही उसने बताया कि क्या हुआ। कैसे बताती कि जब उसने दरवाज़ा खोला तो सोफ़ी के हाथ विक्रम के हाथ में और विक्रम के होंठ उसके माथे पर थे। पर मिसेज़ गोम्ज़ बिना कुछ कहे ही सब समझ गयीं। उसके बाद ये बाईस साल रुथ ने सोफ़ी से बिना मिले काटे और विक्रम ने गिल्ट और शर्म में। वो प्रेयर खत्म कर के सोने जा ही रही थी कि उसका फ़ोन बज गया।
“हेलो।”
“हेलो हनी।”
“हाउ आर यू मॉम?”
“ओके, बट लिटिल हेक्टिक हियर।”
“डियाज़ की तबियत कैसी है अब?”
“पहले से बेटर है। तुम अपना बताओ? वापस आने का दिन आ रहा है तुम्हारा।”
“हाँ परसों।”
“आओगी इधर?”
“मालूम नहीं।”
“रुथ एक बात कहूँ?”
“हम्म्म्म”
“इतना स्टरबन होने से काम नहीं चलता। तुमने इतने साल यूँ भी चीज़ों के एक्ज़ेज़रेट कर के देखा है। कम बैक टू अस, कम बैक टू फॅमिली हनी। एक बात पूछू?”
“क्या?”
“व्हाई डिड यू फॉलो डबल स्टैंडर्ड्स ऑल लाइफ?”
“व्हाट स्टैंडर्ड्स मॉम?”
“जिस बात के लिए तुमने लाइफ लॉन्ग सोफ़ी को पनिश किया उस बात का आधा रेस्पोंसिबल तो विक्रम भी है। वो तुम्हारा हसबैंड है,तुम्हारे बेटे का फ़ादर है इस लिए उसे बेनिफिट ऑफ़ डाउट है रुथ। ये फ्लेक्सिबल एप्रोच सोफ़ी के वास्ते क्यूँ नहीं। तुमने कभी कंफ्र्न्ट किया विक्रम को। समझो हनी इतने साल तो लाइफ नहीं चलती जितने साल तुमने साइलेंस चलाया अपना। ट्राय टू कलेक्ट फॅमिली।
“गुड नाईट मॉम”, वो कुछ देर चुप रह कर बोली।
अगली सुबह रुथ ने घर में बिखरा हुआ सामान समेटना शुरू कर दिया था। वापसी के दिन पास आ रहे थे । डैडी का ये घर अब बिक गया है,अब इस शहर में लौट कर आना शायद ही कभी होगा। उसने सोचा और उसकी आँखें भर आयीं। उसने कॉफ़ी बनाने रखी और मिसेज़ गोम्ज़ को फ़ोन मिला दिया।
“मॉम सुनो मैंने चेक जमा कर दिया है कुछ दिन में मिल जायेगी मनी आपको।”
“तुमने अपने लिए कुछ नहीं रखा रुथ?”
“नहीं मुझे कोई नीड नहीं है। आपको अभी ज़रूरत पड़ेगी डियाज़ के लिये।पता नहीं सोफ़ी के पास इतनी सेविंग हो भी या नहीं। मैंने बस ब्रॉन्ज़ का एक एंटीक वाज़ रख लिया है अपने लिये”
“कौन सा?”
“एक फिश शेप का है, डैडी त्रिची से लाये थे एक बार, याद है।”
“डोंट कीप दैट।”
“क्यों?”
“ब्रॉन्ज़ इज़ नॉट अ गुड मेटल फॉर अवर फैमिली। उसी साल तुम्हारे डैडी की डेथ हुई थी रुथ। ब्रॉन्ज़ की फिश पर सबसे पहले बिजली गिरती है स्काई से।”
“मेरे दिल की मछली पे तो कब की बिजली गिर पड़ी मॉम।”
“डोंट से लाइक दिस।”
“अच्छा! छोड़ो ये सब। अब ये बताओ मॉल्विन की शर्ट का साइज़ क्या होगा? बस उसी का गिफ्ट समझ नहीं आ रहा मुझे। डियाज़ और सोफ़ी के लिए तो वॉच ले लूंगी ।”
“आर यू कमिंग हनी?
“यस,आई एम् कमिंग। अच्छा अब मैं फ़ोन रख रही हूँ मेरी कॉफ़ी भी बन गयी है। और पैसा मिल जाये तो बता देना मुझे ।” कह कर उसने फ़ोन काट दिया।
“ओह! गॉड, हार्ट इज़ अ ब्रॉन्ज़ फिश।”
वो उठी, कमरे में एक कोने में खड़ी अटैची के पास ले जा कर उस कांसे की मछली को रख दिया। और अब कमरा कॉफ़ी की तेज ख़ुशबू से महक रहा था।